अवैध कॉलोनियों पर सख्ती के दावे करने वाली सरकार के अपने ही विभाग इस खेल को बढ़ावा दे रहे हैं। जिला प्रशासन और नगर निगम जहां मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1956 और नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं रजिस्ट्रार कार्यालय इन्हीं कॉलोनियों के प्लॉट की खुलेआम रजिस्ट्री कर रहा है। स्थिति यह है कि जिन कॉलोनियों को प्रशासन ने नोटिस देकर अवैध घोषित किया, उन्हीं में खरीद-फरोख्त का सरकारी रिकॉर्ड भी तैयार हो रहा है। नगर निगम ने धारा 292-C के तहत अवैध कॉलोनियों में विकास और लेन-देन पर रोक लगाई है। साथ ही नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 30 व 31 के अनुसार बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करना अपराध है। इसके बावजूद रजिस्ट्रार कार्यालय को लिखे गए पत्रों का असर नहीं दिख रहा और रजिस्ट्री लगातार जारी है। दूसरी ओर बिजली कंपनी भी इन कॉलोनियों को वैधता का रास्ता दे रही है। सिर्फ रजिस्ट्री या नोटरी, आधार कार्ड और बैंक पासबुक के आधार पर बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि बाद में इन्हीं कॉलोनियों में जनप्रतिनिधि अपनी निधि से सड़क, पानी, सीवर और बिजली के काम कराते हैं। यानी जिस कॉलोनी को कानून अवैध बता रहा है, उसी में सरकारी पैसा लगाकर उसे बसाया जा रहा है। इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यही है कि जब एक ही सरकार के अलग-अलग विभाग अलग-अलग नियमों पर काम करेंगे, तो अवैध कॉलोनियों पर रोक कैसे लगेगी? एक विभाग कार्रवाई करता है, दूसरा रजिस्ट्री कर देता है और तीसरा सुविधाएं देकर बसावट को स्थायी बना देता है। बिजली कंपनी: सिर्फ कनेक्शन-पैसे से मतलब
बिजली कंपनी को वैध-अवैध कॉलोनी से मतलब सिर्फ अपनी फीस को लेकर रहता है। कंपनी अधिकारियों के अनुसार अवैध कॉलोनी में कनेक्शन के लिए प्रति कनेक्शन एक किलोवाट पर 15, 567 रुपए इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जाते हैं, ये राशि किलोवॉट के अनुसार बढ़ते जाते हैं। साथ ही कनेक्शन के लिए लगने वाला सामान्य खर्च अलग से लगता है। दस्तावेजों में सिर्फ रजिस्ट्री, आधार और बैंक पासबुक की कॉपी ली जाती है। कई बार नोटरी के आधार पर भी कनेक्शन दे दिए जाते हैं।
एक्सपर्ट – विजय राठौर, एडवोकेट विभागीय सामंजस्य से होगा समस्या का समाधान
सरकार यदि वास्तविकता में अवैध कॉलोनी काटने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आना चाहती है तो उसे सबसे पहले विभागीय सामंजस्य बनाना होगा। इसके लिए नियम बनाने होंगे। जैसे कि रजिस्टर कार्यालय में केवल तभी रजिस्ट्री हो, जब टीएंडसीपी से अनुमति हो। जिला प्रशासन और निगम को उन तमाम सर्वे नंबरों की जानकारी देनी होगी, जहां कॉलोनी काटने की अनुमति ही नहीं ली गई है। निगम भी विकास कार्य केवल वैध कॉलोनी में ही कराए। रजिस्ट्री बैन नहीं हो सकती
विभागीय स्तर पर व्यवस्था है कि रजिस्ट्री बैन नहीं हो सकती। हम लोग विभाग के आदेशानुसार ही नियमों के तहत रजिस्ट्री करते हैं – अशोक शर्मा, जिला पंजीयक कार्रवाई की जाएगी
अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री रोकने पंजीयन विभाग को पहले पत्र गए हैं। यदि फिर भी उन स्थानों की रजिस्ट्री हो रही है तो आगे कार्यवाही की जाएगी। -सीबी प्रसाद, एडीएम


