नवादा के सदर प्रखंड स्थित ओरैना पंचायत ने शिक्षा और तकनीकी जागरूकता के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। यह बिहार का पहला पंचायत बन गया है, जहां से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को राज्य स्तरीय ‘बिहार एआई समिट 2026’ में भाग लेने के लिए भेजा गया। पंचायत की इस पहल का उद्देश्य गांव के बच्चों को आधुनिक तकनीक, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी उभरती तकनीकों से जोड़ना है। पटना स्थित ऊर्जा भवन ऑडिटोरियम में आयोजित इस राज्य स्तरीय सम्मेलन में शामिल होने के लिए पंचायत द्वारा चयनित प्रतिभाशाली बच्चों को विशेष रूप से भेजा गया। सम्मेलन में बच्चों ने एआई, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और भविष्य की संभावनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। ग्रामीण बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास ओरैना पंचायत की मुखिया रिंकू देवी ने इस पहल को ग्रामीण बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि आज का दौर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। ऐसे समय में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक तकनीकों से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने कहा कि यदि गांव के बच्चों को सही समय पर तकनीकी शिक्षा और नवाचार से परिचित कराया जाए तो वे न केवल अपने परिवार और पंचायत, बल्कि जिले और पूरे राज्य का नाम रोशन कर सकते हैं। पंचायत का प्रयास है कि ग्रामीण और शहरी बच्चों के बीच तकनीकी ज्ञान की दूरी कम हो। बच्चों के मार्गदर्शन के लिए भेजे गए प्रतिनिधि सम्मेलन में बच्चों के साथ पंचायत की ओर से प्रशांत मानव को प्रतिनिधि और मार्गदर्शक के रूप में भेजा गया था। उन्होंने बच्चों को विभिन्न सत्रों में भाग लेने, विशेषज्ञों से संवाद करने और नई तकनीकों को समझने में सहयोग किया। प्रशांत मानव ने बताया कि सम्मेलन में बच्चों ने बड़ी उत्सुकता के साथ एआई से जुड़ी गतिविधियों और प्रस्तुतियों को देखा तथा विशेषज्ञों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं। इससे उनमें तकनीक और नवाचार के प्रति रुचि बढ़ी है। AI की दुनिया को करीब से समझा सम्मेलन में शामिल बच्चों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न पहलुओं को करीब से समझा। उन्होंने जाना कि किस प्रकार एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है। बच्चों ने तकनीक आधारित भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी जानकारी प्राप्त की। इस कार्यक्रम में अभिषेक, आलोक, शशिकांत, राज, मोहित, मनित, अमित, पीयूष, हिमांशु और रिशव सहित कई बच्चों ने भाग लिया। बच्चों ने सम्मेलन के अनुभव को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें नई तकनीकों को समझने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। स्थानीय स्तर पर हो रही सराहना ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा और तकनीकी जागरूकता को बढ़ावा देने की इस पहल की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है। पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने इसे दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि इससे बच्चों में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के प्रति नई सोच विकसित होगी। अभिभावकों का मानना है कि गांव के बच्चों को इस तरह के मंचों तक पहुंचाने से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित होंगे। शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में प्रेरणादायक पहल ओरैना पंचायत की यह पहल नवादा जिले ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को तकनीकी शिक्षा और एआई जैसे आधुनिक विषयों से जोड़ने का यह प्रयास भविष्य में अन्य पंचायतों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायत स्तर पर इस तरह की पहलें लगातार होती रहीं तो ग्रामीण प्रतिभाओं को नई पहचान मिलेगी और तकनीकी क्षेत्र में बिहार की भागीदारी और मजबूत होगी। नवादा के सदर प्रखंड स्थित ओरैना पंचायत ने शिक्षा और तकनीकी जागरूकता के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। यह बिहार का पहला पंचायत बन गया है, जहां से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को राज्य स्तरीय ‘बिहार एआई समिट 2026’ में भाग लेने के लिए भेजा गया। पंचायत की इस पहल का उद्देश्य गांव के बच्चों को आधुनिक तकनीक, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी उभरती तकनीकों से जोड़ना है। पटना स्थित ऊर्जा भवन ऑडिटोरियम में आयोजित इस राज्य स्तरीय सम्मेलन में शामिल होने के लिए पंचायत द्वारा चयनित प्रतिभाशाली बच्चों को विशेष रूप से भेजा गया। सम्मेलन में बच्चों ने एआई, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और भविष्य की संभावनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। ग्रामीण बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास ओरैना पंचायत की मुखिया रिंकू देवी ने इस पहल को ग्रामीण बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि आज का दौर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। ऐसे समय में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक तकनीकों से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने कहा कि यदि गांव के बच्चों को सही समय पर तकनीकी शिक्षा और नवाचार से परिचित कराया जाए तो वे न केवल अपने परिवार और पंचायत, बल्कि जिले और पूरे राज्य का नाम रोशन कर सकते हैं। पंचायत का प्रयास है कि ग्रामीण और शहरी बच्चों के बीच तकनीकी ज्ञान की दूरी कम हो। बच्चों के मार्गदर्शन के लिए भेजे गए प्रतिनिधि सम्मेलन में बच्चों के साथ पंचायत की ओर से प्रशांत मानव को प्रतिनिधि और मार्गदर्शक के रूप में भेजा गया था। उन्होंने बच्चों को विभिन्न सत्रों में भाग लेने, विशेषज्ञों से संवाद करने और नई तकनीकों को समझने में सहयोग किया। प्रशांत मानव ने बताया कि सम्मेलन में बच्चों ने बड़ी उत्सुकता के साथ एआई से जुड़ी गतिविधियों और प्रस्तुतियों को देखा तथा विशेषज्ञों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं। इससे उनमें तकनीक और नवाचार के प्रति रुचि बढ़ी है। AI की दुनिया को करीब से समझा सम्मेलन में शामिल बच्चों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न पहलुओं को करीब से समझा। उन्होंने जाना कि किस प्रकार एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है। बच्चों ने तकनीक आधारित भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी जानकारी प्राप्त की। इस कार्यक्रम में अभिषेक, आलोक, शशिकांत, राज, मोहित, मनित, अमित, पीयूष, हिमांशु और रिशव सहित कई बच्चों ने भाग लिया। बच्चों ने सम्मेलन के अनुभव को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें नई तकनीकों को समझने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। स्थानीय स्तर पर हो रही सराहना ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा और तकनीकी जागरूकता को बढ़ावा देने की इस पहल की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है। पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने इसे दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि इससे बच्चों में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के प्रति नई सोच विकसित होगी। अभिभावकों का मानना है कि गांव के बच्चों को इस तरह के मंचों तक पहुंचाने से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित होंगे। शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में प्रेरणादायक पहल ओरैना पंचायत की यह पहल नवादा जिले ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को तकनीकी शिक्षा और एआई जैसे आधुनिक विषयों से जोड़ने का यह प्रयास भविष्य में अन्य पंचायतों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायत स्तर पर इस तरह की पहलें लगातार होती रहीं तो ग्रामीण प्रतिभाओं को नई पहचान मिलेगी और तकनीकी क्षेत्र में बिहार की भागीदारी और मजबूत होगी।


