भाजपा प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल द्वारा पूर्व डिप्टी सीएम और टोंक विधायक सचिन पायलट पर दिए गए बयान का विरोध तेज हो गया है। सांसद मुरारी लाल मीणा समेत कांग्रेस नेताओं ने अग्रवाल के बयान को राजनीतिक द्वेष और दिमाग के दिवालिएपन में दिया गया बयान बताया है। सांसद ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए लिखा- यह कैसी विडंबना है कि जो खुद दूसरों के घर की नींव तलाश रहे हैं, वे इतिहास और तथ्यों से अपनी आंखें मूंद चुके हैं। स्वर्गीय राजेश पायलट ने 1980 के दशक से राजस्थान को अपनी कर्मभूमि बनाया और दौसा की सेवा करते हुए ही वे शहीद हुए। रमा पायलट ने संसद में दौसा का मजबूती से प्रतिनिधित्व किया। खुद सचिन पायलट दौसा और अजमेर से सांसद रहे हैं और वर्तमान में टोंक से विधायक हैं। दशकों से जो परिवार राजस्थान की मिट्टी में रचा-बसा है, उसे ‘बाहरी’ कहना केवल राजनीतिक द्वेष और दिमाग के दिवालिएपन को दर्शाता है। सांसद मीना ने पीएम मोदी पर उठाए सवाल सांसद ने लिखा- अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के होकर वाराणसी (UP) से चुनाव लड़ते हैं, तो क्या वे वहां ‘बाहरी’ नहीं हैं? भाजपा के वर्तमान प्रदेश प्रभारी जो उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं, क्या वे बाहरी नहीं हैं? नियम तो यह कहता है कि एक स्थान पर 10 साल रहने के बाद सरकार भी मूल निवास प्रमाण पत्र दे देती है, यहां तो 40 सालों से एक परिवार राजस्थान की सेवा में समर्पित है। जनता तय करती है कि अपना कौन हैं उन्होंने लिखा- राधामोहन अग्रवाल, आप भाजपा के उच्च पद पर आसीन एक शिक्षित व्यक्ति हैं, लेकिन आपके बयानों में नियमों की समझ और मर्यादा की कमी साफ झलकती है। राजनीति में बयानों का स्तर इतना भी नहीं गिरना चाहिए कि हम जनसेवा के इतिहास को ही नकार दें। लोकतंत्र में जनता तय करती है कि अपना कौन हैं और पायलट परिवार को राजस्थान की जनता ने हमेशा अपना माना है। पीसीसी उपाध्यक्ष ने लिखा- सार्वजनिक रूप से माफी मांगे राजनीति में वैचारिक मतभेद होना लोकतंत्र की खूबसूरती है, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और अभद्र टिप्पणी भाजपा की गिरती सियासी संस्कृति का परिचायक है। राजस्थान भाजपा प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल द्वारा जनप्रिय नेता सचिन पायलट के खिलाफ दिया गया बयान निंदनीय और राजनीतिक मर्यादाओं के विपरीत है। पायलट जैसे शालीन और दूरदर्शी नेता पर ऐसी टिप्पणी करना स्वस्थ राजनीति के मूल्यों के खिलाफ है। भाजपा नेतृत्व को इस अभद्रता का संज्ञान लेना चाहिए। राधामोहन दास अग्रवाल को अपने अमर्यादित बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए।


