सड़क पर बैठकर फूट-फूटकर रोए Nawazuddin Siddiqui! सिर्फ ‘Parle-G’ खाकर काटे दिन, याद कर छलके आंसू

सड़क पर बैठकर फूट-फूटकर रोए Nawazuddin Siddiqui! सिर्फ ‘Parle-G’ खाकर काटे दिन, याद कर छलके आंसू

Nawazuddin Siddiqui interview: बॉलीवुड के सबसे दमदार स्टार्स में से एक नवाजुद्दीन सिद्दीकी की जिंदगी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है, लेकिन ये कहानी पर्दे पर नहीं, असल जिंदगी में लिखी गई है, संघर्ष, आंसुओं और टूटन के साथ। बता दें, हाल ही में रेडियो नशा के साथ एक बातचीत में उन्होंने अपने उन सालों की दर्द के बारे में खुलकर शेयर की जब वो बार-बार टूटे, लेकिन हर बार उठ खड़े हुए।

वो एक लंबी लड़ाई लड़ रहे थे, बुरी किस्मत ने मुझे घेर लिया हो

एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी जब मुंबई आए थे तब उनकी जेब में सिर्फ 2,500 रुपये थे। गुजारे के लिए उन्होंने वॉचमैन की नौकरी की और अपनी टैलेंट को निखारने के लिए थिएटर में डूब गए, लेकिन मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री ने उन्हें आसानी से नहीं अपनाया। सालों तक रिजेक्शन के बाद आखिरकार ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने उन्हें वो पहचान दिलाई जिसके लिए वो एक लंबी लड़ाई लड़ रहे थे।

इतना ही नहीं, नवाजपुद्दीन ने बताया कि शुरुआत में उनमें जोश और आत्मविश्वास था, लेकिन बार-बार के संघर्षों ने धीरे-धीरे उस आत्मविश्वास को खोखला कर दिया। उन्होंने कहा कि वो एक ऐसी मानसिक अवस्था में पहुंच गए थे जहां उन्हें खुद पर शक होने लगा था और वो खुद को अनफिट महसूस करने लगे थे। बता दें, उनके शब्दों में, “ऐसा लगता था जैसे बुरी किस्मत ने मुझे घेर लिया हो। जब भी कोई बड़ा मौका आता, वो ठीक उसी वक्त हाथ से निकल जाता जब मिलने वाला होता था।” ये लगभग 10 साल तक चलता रहा और इस दौरान वो खुद को मनहूस मानने लगे थे।

Nawazuddin Siddiqui

एक इंसान जो आज करोड़ों का दिल जीतता है, वो सड़क पर अकेले रोता था

इतना ही नहीं, उन्होंने बताया, “कई बार ऐसा हुआ जब मुझे बीच सड़क पर रोने का मन किया और मैं रोया, लेकिन साथ ही ये भी देखता रहा कि कोई देख तो नहीं रहा।” ये पल पढ़कर दिल भारी हो जाता है एक इंसान जो आज करोड़ों का दिल जीतता है, कभी सड़क पर अकेले रोता था। बता दें, अपने सबसे मुश्किल दौर में भी नवाजुद्दीन एक्टिंग से दूर नहीं हुए। उन्होंने बताया कि वो सड़क पर चलते-चलते जोर से डायलॉग की रिहर्सल करते थे।

एक्टर ने अपनी गरीबी के उन दिनों को याद करते हुए एक ऐसी बात कही जो सुनकर आंखें नम हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि उन दिनों उनका नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का खाना, सब कुछ Parle-G बिस्कुट ही था। दिल्ली में रहते हुए यही उनकी जिंदगी थी। साथ ही, उन्होंने कहा, “आज भी जब मैं Parle-G खाता हूं तो मुझे वे दिन याद आ जाते हैं। इसका स्वाद आज भी दर्द देता है।” कर्ली टेल्स के एक पुराने इंटरव्यू में भी उन्होंने बताया था कि वो करीब डेढ़ साल तक सिर्फ चाय और Parle-G पर जीते रहे।

हर कोई एक ऐसे मोड़ से गुजरता है जहां हार मानने का मन करता है

इतना ही नहीं, राज शमनी के साथ इमोशनल बातचीत में नवाजुद्दीन ने कहा था कि 2012 से पहले के सालों में जब भी कोई मौका मिलता, वो हाथ से निकल जाता था। उन्हें लगने लगा था कि शायद वो जिंदगी में कुछ खास हासिल करने के लिए नहीं बने। उन्होंने कहा, “हर कोई एक ऐसे मोड़ से गुजरता है जहां हार मानने का मन करता है। मैं भी वहां था। फिर कोई छोटी-सी चीज उम्मीद जगा देती थी। ये सिलसिला 7-8 साल तक चला।”

इन दिनों नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपनी फिल्म ‘मैं एक्टर नहीं हूं’ के प्रमोशन में बिजी हैं जो 8 मई को रिलीज होगी। इसके अलावा वो मोस्टअवेडेट फिल्म ‘तुम्बाड 2’ में भी नजर आएंगे जो 3 दिसंबर 2027 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

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