बिलासपुर में NSUI की नई नियुक्तियों में एक बार फिर एआईसीसी सचिव और विधायक देवेंद्र यादव समर्थक खेमे का दबदबा नजर आया है। यूथ कांग्रेस चुनाव के दौरान जारी नियुक्ति आदेशों पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समर्थक खेमे की आपत्ति के बाद रोक लगा दी गई थी। बताया गया था कि चुनाव नियमों का हवाला देकर इन नियुक्तियों को फ्रीज कराया गया था, क्योंकि नियुक्ति सूची में उनके समर्थकों के नाम नहीं थे। अब रोक हटने के बाद संशोधन के नाम पर लगभग उन्हीं नियुक्तियों को दोबारा जारी कर दिया गया है। पहली बार शहर और ग्रामीण में बंटा जिलाध्यक्ष का पद एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय की ओर से जारी नियुक्ति आदेश में बिलासपुर जिलाध्यक्ष का पद पहली बार रायपुर की तर्ज पर शहर और ग्रामीण, दो हिस्सों में बांटा गया है। ग्रामीण जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी रंजेश सिंह क्षत्री को सौंपी गई है, जिन्हें देवेंद्र यादव समर्थक माना जाता है। वहीं, इसी खेमे से जुड़े समर्थ मिरानी को शहर जिलाध्यक्ष बनाया गया है। समर्थ मिरानी को जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री की सरपरस्ती हासिल बताई जाती है। नियुक्तियों के बाद संगठन के भीतर गुटीय समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रंजीत सिंह को लगा झटका राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक, बिलासपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों से एनएसयूआई की कमान संभाल रहे रंजीत सिंह को नई नियुक्तियों से झटका लगा है। इसके पीछे यूथ कांग्रेस चुनाव के दौरान भूपेश बघेल समर्थक खेमे का खुलकर साथ देना एक बड़ी वजह माना जा रहा है। संगठन को मजबूत करने पर रंजेश का जोर ग्रामीण जिलाध्यक्ष नियुक्त होने के बाद रंजेश सिंह क्षत्री ने संगठन को मजबूत करने और छात्र हितों के लिए काम करने की बात कही। उन्होंने कहा, मैं किसान का बेटा हूं। मेहनत से सींचना बचपन से सीखा हूं। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के अधिकारों, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य की लड़ाई लड़ने वाला सशक्त मंच है। जिलाध्यक्ष के रूप में उनकी प्राथमिकता संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करना होगा।

