अब बस-ट्रेन या कार नहीं, हेलीकॉप्टर से देख सकेंगे राजगीर:अगले महीने से ‘हेली टूरिज्म’ सेवा की हो सकती शुरुआत, हर उड़ान में 5 लोग बैठ सकेंगे

अब बस-ट्रेन या कार नहीं, हेलीकॉप्टर से देख सकेंगे राजगीर:अगले महीने से ‘हेली टूरिज्म’ सेवा की हो सकती शुरुआत, हर उड़ान में 5 लोग बैठ सकेंगे

राजगीर-पावापुरी को पर्यटन के मानचित्र पर अब एक नई रफ्तार मिलने वाली है। राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल के तहत पर्यटक अब सड़क या रेल मार्ग की लंबी और थकान भरी यात्राओं को पीछे छोड़कर आसमान से बिहार की खूबसूरत वादियों का दीदार कर सकेंगे। इसके लिए नागरिक उड्डयन विभाग जल्द ही ‘हैली टूरिज्म’ सेवा की शुरुआत करने जा रहा है, जिसकी संभावना अगले महीने से जताई जा रही है। इस सेवा के शुरू होने से न केवल बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिलेगी, बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए कम समय में राज्य की समृद्ध विरासत को देखना भी आसान हो जाएगा। हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनी के साथ 5 साल होगा अनुबंध इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए नागरिक उड्डयन विभाग ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट आमंत्रित किया है और चयनित हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनी के साथ 5 वर्षों का अनुबंध किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत यात्रियों की सुविधा के लिए नए हेलीपैड विकसित किए जाएंगे और प्रत्येक उड़ान में 5 से 6 यात्रियों की बैठने की व्यवस्था होगी। योजना का मुख्य केंद्र पटना को बनाया गया है, जहां से हेलीकॉप्टर उड़ान भरकर विभिन्न पर्यटन स्थलों तक जाएंगे। विभाग की योजना है कि पर्यटकों की सुविधा के अनुसार एक दिवसीय भ्रमण और विशेष टूर पैकेज भी तैयार किए जाएं, ताकि लोग अपनी पसंद के अनुसार यात्रा का चुनाव कर सकें।
पांच से छह घंटों का यह सफर महज कुछ ही मिनटों में होगा वर्तमान में बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बीच सड़क मार्ग से दूरी तय करने में कई घंटे लग जाते हैं, लेकिन हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए पांच से छह घंटों का यह सफर महज कुछ ही मिनटों में पूरा हो सकेगा। इससे पर्यटक एक ही दिन में दो या तीन प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर वापस लौट सकेंगे। यह सेवा विशेष रूप से उन वरिष्ठ नागरिकों, विदेशी सैलानियों और वीआईपी यात्रियों के लिए वरदान साबित होगी जो ट्रैफिक और लंबी यात्रा की परेशानियों से बचना चाहते हैं।
अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है पर्यटन के इस नए अध्याय से बिहार की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। जब पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, तो स्थानीय स्तर पर होटल, गाइड, और ट्रांसपोर्ट सेवाओं से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि नालंदा के प्राचीन खंडहर, राजगीर की पहाड़ियां और गर्म कुंड, पावापुरी का जल मंदिर, बोधगया का महाबोधि मंदिर, वैशाली की ऐतिहासिक भूमि, पटना साहिब, विक्रमशिला और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जैसे 8 प्रमुख केंद्रों को एक सूत्र में पिरोकर एक सशक्त ‘स्पिरिचुअल टूरिज्म सर्किट’ विकसित किया जाए। राजगीर-पावापुरी को पर्यटन के मानचित्र पर अब एक नई रफ्तार मिलने वाली है। राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल के तहत पर्यटक अब सड़क या रेल मार्ग की लंबी और थकान भरी यात्राओं को पीछे छोड़कर आसमान से बिहार की खूबसूरत वादियों का दीदार कर सकेंगे। इसके लिए नागरिक उड्डयन विभाग जल्द ही ‘हैली टूरिज्म’ सेवा की शुरुआत करने जा रहा है, जिसकी संभावना अगले महीने से जताई जा रही है। इस सेवा के शुरू होने से न केवल बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिलेगी, बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए कम समय में राज्य की समृद्ध विरासत को देखना भी आसान हो जाएगा। हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनी के साथ 5 साल होगा अनुबंध इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए नागरिक उड्डयन विभाग ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट आमंत्रित किया है और चयनित हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनी के साथ 5 वर्षों का अनुबंध किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत यात्रियों की सुविधा के लिए नए हेलीपैड विकसित किए जाएंगे और प्रत्येक उड़ान में 5 से 6 यात्रियों की बैठने की व्यवस्था होगी। योजना का मुख्य केंद्र पटना को बनाया गया है, जहां से हेलीकॉप्टर उड़ान भरकर विभिन्न पर्यटन स्थलों तक जाएंगे। विभाग की योजना है कि पर्यटकों की सुविधा के अनुसार एक दिवसीय भ्रमण और विशेष टूर पैकेज भी तैयार किए जाएं, ताकि लोग अपनी पसंद के अनुसार यात्रा का चुनाव कर सकें।
पांच से छह घंटों का यह सफर महज कुछ ही मिनटों में होगा वर्तमान में बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बीच सड़क मार्ग से दूरी तय करने में कई घंटे लग जाते हैं, लेकिन हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए पांच से छह घंटों का यह सफर महज कुछ ही मिनटों में पूरा हो सकेगा। इससे पर्यटक एक ही दिन में दो या तीन प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर वापस लौट सकेंगे। यह सेवा विशेष रूप से उन वरिष्ठ नागरिकों, विदेशी सैलानियों और वीआईपी यात्रियों के लिए वरदान साबित होगी जो ट्रैफिक और लंबी यात्रा की परेशानियों से बचना चाहते हैं।
अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है पर्यटन के इस नए अध्याय से बिहार की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। जब पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, तो स्थानीय स्तर पर होटल, गाइड, और ट्रांसपोर्ट सेवाओं से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि नालंदा के प्राचीन खंडहर, राजगीर की पहाड़ियां और गर्म कुंड, पावापुरी का जल मंदिर, बोधगया का महाबोधि मंदिर, वैशाली की ऐतिहासिक भूमि, पटना साहिब, विक्रमशिला और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जैसे 8 प्रमुख केंद्रों को एक सूत्र में पिरोकर एक सशक्त ‘स्पिरिचुअल टूरिज्म सर्किट’ विकसित किया जाए।  

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