सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार अब स्कूली यूनिफॉर्म (वर्दी) की सहायता राशि सीधे विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों के बैंक खाते में भेजने की तैयारी कर रही है। शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए इस पूरी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, इस सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए एक अनिवार्य शर्त रखी गई है—विद्यार्थियों का बैंक खाता उनके ‘जनआधार’ कार्ड से लिंक होना बेहद जरूरी है। इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यह योजना मुख्य रूप से सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8वीं तक के पात्र छात्र-छात्राओं के लिए लागू होगी। इस व्यवस्था के तहत यूनिफॉर्म की सहायता राशि बिना किसी बिचौलिए या देरी के सीधे लाभार्थी के बैंक अकाउंट में जमा (Direct Benefit Transfer – DBT) की जाएगी। अधिकारियों को प्राथमिकता से काम पूरा करने के निर्देश योजना को धरातल पर उतारने के लिए अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयकों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग ने साफ किया है कि पात्र विद्यार्थियों के जनआधार प्रमाणीकरण (Verification) और बैंक खाता लिंकिंग के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा करवाया जाए। जनआधार अपडेट न होने पर रुक सकता है पैसा शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन विद्यार्थियों का जनआधार ‘शाला दर्पण’ पोर्टल पर प्रमाणित नहीं होगा, या जिनका जनआधार बैंक खाते से जुड़ा हुआ नहीं होगा, उन्हें डीबीटी (DBT) के तहत मिलने वाली सहायता राशि से वंचित रहना पड़ सकता है। इसलिए बच्चों के जनआधार कार्ड को समय रहते अपडेट करवाना अनिवार्य है। शाला दर्पण पोर्टल पर ऐसे होगी पूरी प्रक्रिया इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए ‘शाला दर्पण’ पोर्टल की मदद ली जा रही है। इसकी पूरी प्रक्रिया ऐसे पूरी होगी। पात्रता सूची: शाला दर्पण पोर्टल पर विद्यालय स्तर पर योग्य विद्यार्थियों की एक सूची दिखाई देगी। डेटा मिलान: स्कूल लॉगिन के माध्यम से विद्यार्थियों के डेटा को खोला जाएगा और उनके जनआधार व बैंक खाते की जानकारियों का आपस में मिलान किया जाएगा। मोबाइल नंबर: इस प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए जनआधार से जुड़ा मोबाइल नंबर एक्टिव होना जरूरी है, ताकि आवश्यक सूचनाएं प्राप्त हो सकें। ऑटो-फॉरवर्ड आवेदन: पोर्टल पर डेटा का सफलतापूर्वक वेरिफिकेशन (सत्यापन) होते ही आवेदन खुद-ब-खुद संबंधित उच्च अधिकारी को फॉरवर्ड हो जाएगा। इस अंतिम सत्यापन के बाद विभाग द्वारा सीधे छात्र के बैंक खाते में सहायता राशि हस्तांतरित कर दी जाएगी।


