Sunetra Pawar Prashant Kishor Meeting: बिहार चुनाव के झटकों के बाद देश के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई और बेहद धमाकेदार पारी की शुरुआत कर सकते हैं। राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, प्रशांत किशोर अब सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का पूरी तरह से कायाकल्प (Revamp) करने की तैयारी में हैं। इस संभावित गठबंधन को लेकर पार्टी के भीतर अभी से ही भारी बेचैनी और खींचतान का माहौल गरमा गया है, खासकर उन नेताओं के बीच जो अब तक रणनीति संभाल रहे नरेश अरोड़ा के करीबी माने जाते थे।
पवार परिवार और प्रशांत किशोर के बीच 2 घंटे की सीक्रेट मीटिंग
एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि इसी हफ्ते राकांपा (NCP) की राष्ट्रीय अध्यक्षा सुनेत्रा पवार, सांसद पार्थ पवार और प्रशांत किशोर के बीच एक बेहद अहम और करीब दो घंटे लंबी गुप्त बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी के नए राजनीतिक तालमेल और भविष्य की रणनीति के व्यापक खाके पर गंभीर चर्चा की गई। हालांकि, इस मुलाकात पर सफाई देते हुए पार्थ पवार ने सोशल मीडिया पर अफवाहों को खारिज करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि प्रशांत जी हमारे मित्र और भाई जैसे हैं। वह दादा (अजीत पवार) के समय से ही हमारे परिचित हैं। कल वह शहर में थे, इसलिए उन्हें घर पर लंच के लिए आमंत्रित करना और उनके साथ कुछ ज्ञानवर्धक बातचीत करना हमारे लिए बेहद सुखद रहा। जहां तक एनसीपी के साथ काम करने की अटकलें हैं, तो मैं रिकॉर्ड साफ कर देना चाहता हूं कि भले ही पवार परिवार इसे एक औपचारिक शिष्टाचार मुलाकात बता रहा हो, लेकिन सूत्रों का दावा है कि अगले दो दिनों के भीतर सभी कानूनी और रणनीतिक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद, 1 जून 2026 से प्रशांत किशोर की टीम आधिकारिक तौर पर एनसीपी के लिए जमीन पर काम करना शुरू कर सकती है।
अजीत पवार के निधन के बाद नेतृत्व संकट से जूझ रही है NCP
एनसीपी के लिए यह घटनाक्रम ऐसे बेहद संवेदनशील और नाजुक मोड़ पर आया है, जब पार्टी आंतरिक कलह, संगठनात्मक अनिश्चितता और राजनीतिक दिशाहीनता से जूझ रही है। गौरतलब है कि इसी साल जनवरी 2026 में एक दुखद विमान हादसे में पार्टी के सबसे कद्दावर नेता अजीत पवार का निधन हो गया था। अजीत पवार के अचानक चले जाने से खाली हुए शून्य को भरने और आगामी स्थानीय निकाय व विधानसभा चुनावों से पहले अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लिए पार्टी को एक मजबूत बैसाखी की जरूरत है।
पार्टी के भीतर ‘पावर सेंटर’ बदलने की सुगबुगाहट
प्रशांत किशोर (PK) की एंट्री की खबरों ने एनसीपी के भीतर अंदरूनी समीकरणों को पूरी तरह से हिला दिया है। अब तक पार्टी के संगठनात्मक और रणनीतिक इनपुट्स को संभाल रहे नरेश अरोड़ा को वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल का बेहद करीबी माना जाता था।
अब नरेश अरोड़ा की विदाई और पीके के नेटवर्क के आने से यह कयास तेज हो गए हैं कि पार्टी में अब युवा नेतृत्व यानी पार्थ पवार और सुनेत्रा पवार के इर्द-गिर्द एक नया ‘पावर सेंटर’ (सत्ता का केंद्र) उभर रहा है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी के कई पदाधिकारी इस बात से डरे हुए हैं कि पीके की टीम के कमान संभालते ही पूरी मीडिया, डिजिटल और संगठनात्मक विंग का पुनर्गठन (Restructuring) कर दिया जाएगा, जिससे कई पुराने नेताओं का पत्ता कट सकता है।
पीएम मोदी से लेकर स्टालिन तक को जिता चुके हैं पीके
प्रशांत किशोर का ट्रैक रिकॉर्ड देश की राजनीति में बेमिसाल रहा है। उन्होंने साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक चुनावी अभियान से शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने अरविंद केजरीवाल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, ममता बनर्जी और एमके स्टालिन जैसे कद्दावर नेताओं को सत्ता के शिखर तक पहुंचाया। हालांकि, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ उनका प्रयोग पूरी तरह फ्लॉप रहा था और हाल ही में बिहार चुनावों में भी उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था।


