प्रख्यात शिक्षाविद कालीचरण मिश्रा का निधन:राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित थे, कांग्रेस नेता बोले-राजकीय सम्मान से हो विदाई

प्रख्यात शिक्षाविद कालीचरण मिश्रा का निधन:राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित थे, कांग्रेस नेता बोले-राजकीय सम्मान से हो विदाई

सुपौल के प्रख्यात शिक्षाविद एवं विलियम्स हाई स्कूल सुपौल के पूर्व प्रधानाचार्य लगभग 100 वर्षीय कालीचरण मिश्रा का निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को लेकर उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका था। वे लंबे समय तक विद्यालय में अपनी सेवा देकर हजारों छात्रों के जीवन को नई दिशा देने के लिए जाने जाते थे। कालीचरण मिश्रा ने अपने कार्यकाल में शिक्षा की ऐसी नींव रखी, जिससे सुपौल का नाम बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में ऊंचा हुआ। उनके मार्गदर्शन में पढ़े छात्र आज देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्र क्रमशः चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सिविल सेवा, राजनीति और अन्य पेशों में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनके निधन को शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि उनके निधन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। कांग्रेस नेता मिन्नत रहमानी ने इसे सुपौल के लिए बेहद दुखद क्षण बताया। उन्होंने कहा कि कालीचरण मिश्रा जैसे शिक्षाविद विरले ही होते हैं, जिन्होंने न केवल शिक्षा का स्तर ऊंचा किया बल्कि समाज को भी नई दिशा दी। मिन्नत रहमानी ने बिहार सरकार से मांग की है कि कालीचरण मिश्रा की अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ की जाए। उन्होंने इस संबंध में सुपौल के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से भी आग्रह किया है कि उनके सम्मान में उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्थानीय लोगों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने भी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। सभी ने एक स्वर में कहा कि कालीचरण मिश्रा का योगदान सदैव याद रखा जाएगा और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे। सुपौल के प्रख्यात शिक्षाविद एवं विलियम्स हाई स्कूल सुपौल के पूर्व प्रधानाचार्य लगभग 100 वर्षीय कालीचरण मिश्रा का निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को लेकर उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका था। वे लंबे समय तक विद्यालय में अपनी सेवा देकर हजारों छात्रों के जीवन को नई दिशा देने के लिए जाने जाते थे। कालीचरण मिश्रा ने अपने कार्यकाल में शिक्षा की ऐसी नींव रखी, जिससे सुपौल का नाम बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में ऊंचा हुआ। उनके मार्गदर्शन में पढ़े छात्र आज देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्र क्रमशः चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सिविल सेवा, राजनीति और अन्य पेशों में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनके निधन को शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि उनके निधन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। कांग्रेस नेता मिन्नत रहमानी ने इसे सुपौल के लिए बेहद दुखद क्षण बताया। उन्होंने कहा कि कालीचरण मिश्रा जैसे शिक्षाविद विरले ही होते हैं, जिन्होंने न केवल शिक्षा का स्तर ऊंचा किया बल्कि समाज को भी नई दिशा दी। मिन्नत रहमानी ने बिहार सरकार से मांग की है कि कालीचरण मिश्रा की अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ की जाए। उन्होंने इस संबंध में सुपौल के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से भी आग्रह किया है कि उनके सम्मान में उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्थानीय लोगों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने भी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। सभी ने एक स्वर में कहा कि कालीचरण मिश्रा का योगदान सदैव याद रखा जाएगा और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।  

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