मुंगेर में न्यायालय के आदेशों की लगातार अवहेलना करने पर मुफस्सिल थाना के थानाध्यक्ष विपिन कुमार सिंह के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया गया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-7 संतोष कुमार-2 की अदालत ने पुलिस अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई बार-बार आदेश दिए जाने के बावजूद आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने के कारण की गई। अधिवक्ता ओम प्रकाश पोद्दार ने बताया कि यह मामला मुफस्सिल थाना कांड संख्या 157/2010 और सेशन वाद संख्या 92/2011 से संबंधित है। न्यायालय ने 9 अप्रैल को मुख्य अभियुक्त मो. सत्तार के मृत्यु प्रतिवेदन की मांग की थी। निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। अदालत ने 13 मई को जमानती वारंट जारी किया रिपोर्ट उपलब्ध न होने पर 8 मई को थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा गया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अदालत ने 13 मई को जमानती वारंट जारी किया। इसके बाद 20 मई को न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक और मुफस्सिल थानाध्यक्ष को आदेश की प्रति भेजकर चेतावनी दी थी कि अदालत पुलिस के नकारात्मक रवैये और न्यायिक आदेशों की अनदेखी पर मूकदर्शक नहीं रहेगी। आदेश का पालन नहीं होने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए 1 जून को थानाध्यक्ष के विरुद्ध गैरजमानती वारंट जारी कर दिया। रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण ऐसी सिचुएशन उत्पन्न हुई यह मामला वर्ष 2010 का है, जब तत्कालीन मुफस्सिल थानाध्यक्ष प्रवेंद्र भारती ने गुप्त सूचना के आधार पर बाकरपुर गांव स्थित मो. सत्तार के घर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान 49 बोरा अमोनियम नाइट्रेट, 100 डेटोनेटर, 2750 मीटर फ्यूज वायर और 2725 पीस जिलेटिन स्टिक बरामद किए गए थे। इस मामले में तीन लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था, जिनमें मो. सत्तार मुख्य अभियुक्त था। बाद में मो. सत्तार की मृत्यु हो गई थी। न्यायालय उसी संबंध में मृत्यु प्रतिवेदन की मांग कर रहा था, लेकिन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। अधिवक्ता ओम प्रकाश पोद्दार ने बताया कि न्यायालय के आदेशों की लगातार अनदेखी के चलते अदालत को यह कठोर कदम उठाना पड़ा है। मुंगेर में न्यायालय के आदेशों की लगातार अवहेलना करने पर मुफस्सिल थाना के थानाध्यक्ष विपिन कुमार सिंह के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया गया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-7 संतोष कुमार-2 की अदालत ने पुलिस अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई बार-बार आदेश दिए जाने के बावजूद आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने के कारण की गई। अधिवक्ता ओम प्रकाश पोद्दार ने बताया कि यह मामला मुफस्सिल थाना कांड संख्या 157/2010 और सेशन वाद संख्या 92/2011 से संबंधित है। न्यायालय ने 9 अप्रैल को मुख्य अभियुक्त मो. सत्तार के मृत्यु प्रतिवेदन की मांग की थी। निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। अदालत ने 13 मई को जमानती वारंट जारी किया रिपोर्ट उपलब्ध न होने पर 8 मई को थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा गया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अदालत ने 13 मई को जमानती वारंट जारी किया। इसके बाद 20 मई को न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक और मुफस्सिल थानाध्यक्ष को आदेश की प्रति भेजकर चेतावनी दी थी कि अदालत पुलिस के नकारात्मक रवैये और न्यायिक आदेशों की अनदेखी पर मूकदर्शक नहीं रहेगी। आदेश का पालन नहीं होने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए 1 जून को थानाध्यक्ष के विरुद्ध गैरजमानती वारंट जारी कर दिया। रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण ऐसी सिचुएशन उत्पन्न हुई यह मामला वर्ष 2010 का है, जब तत्कालीन मुफस्सिल थानाध्यक्ष प्रवेंद्र भारती ने गुप्त सूचना के आधार पर बाकरपुर गांव स्थित मो. सत्तार के घर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान 49 बोरा अमोनियम नाइट्रेट, 100 डेटोनेटर, 2750 मीटर फ्यूज वायर और 2725 पीस जिलेटिन स्टिक बरामद किए गए थे। इस मामले में तीन लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था, जिनमें मो. सत्तार मुख्य अभियुक्त था। बाद में मो. सत्तार की मृत्यु हो गई थी। न्यायालय उसी संबंध में मृत्यु प्रतिवेदन की मांग कर रहा था, लेकिन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। अधिवक्ता ओम प्रकाश पोद्दार ने बताया कि न्यायालय के आदेशों की लगातार अनदेखी के चलते अदालत को यह कठोर कदम उठाना पड़ा है।


