मुंबई, दो नवंबर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ने तक सरकार पूंजीगत व्यय के जरिये आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना जारी रखेगी। सीतारमण ने यहां एचएसबीसी की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार राजकोषीय अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय जारी रखने के साथ खर्च के मामले में संतुलन बनाए रखेगी। सीतारमण ने कहा, ‘‘पूंजीगत व्यय हमारी वृद्धि रणनीति का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जब तक निजी क्षेत्र क्षमता विस्तार या नई क्षमता स्थापित करने के लिए निवेश नहीं करता, तब तक सरकार के लिए पूंजीगत व्यय को जारी रखना महत्वपूर्ण है।’’
उन्होंने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों में इस रणनीति के अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं और इससे अर्थव्यवस्था को लाभ हुआ है। सरकार इस दिशा में आगे भी काम करती रहेगी, क्योंकि भारत की वृद्धि की रफ्तार किसी भी सूरत में कमजोर नहीं पड़नी चाहिए। हालांकि, वित्त मंत्री ने राजकोषीय अनुशासन को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि वृद्धि को प्रोत्साहित करने और खर्च जारी रखने के लिए विवेकपूर्ण होने के साथ नए तरीके भी अपनाने होंगे।
उन्होंने अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर सात प्रतिशत से अधिक बने रहने का उल्लेख करते हुए भारतीयों से देश के बारे में पूरे भरोसे के साथ बात करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में कोई कमजोरी नहीं है और जमीनी स्तर पर गतिविधियां मजबूत हैं। सीतारमण ने कहा कि मजबूत जीएसटी संग्रह और भारतीय बैंकों की स्थिति अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि कभी-कभी जानकार लोग भी संदेह जताते हैं, लेकिन देश को इस भाषा में बदलाव लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत को बहुत आशावाद की जरूरत है। देश में आशावादी बातचीत बढ़नी चाहिए और निराशावाद कम होना चाहिए।
हमें यह जताना होगा कि हमें खुद पर भरोसा है।’’
वित्त मंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत में ईंधन की आपूर्ति समय पर हो रही है। उन्होंने कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने को महत्वपूर्ण बताते हुए जिला स्तर पर ऐसी व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने वाले विद्यार्थियों के कौशल भी उद्योग की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।
सीतारमण ने एआई और सूचना प्रौद्योगिकी के साथ हार्डवेयर का प्रशिक्षण देने वाली प्रयोगशालाएं स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने दो साल पहले आईटीआई के पुनरुद्धार के लिए बजट में की गई पहल का जिक्र करते हुए कहा कि इसे अपनाने वाले राज्यों को काफी लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि असम और ओडिशा ने सिंगापुर सरकार के साथ मिलकर वहां की सरकार से प्रमाणित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं।
इन कार्यक्रमों के तहत एक बैच सिंगापुर भी जा चुका है।

