ITC के सिगरेट कारोबार पर Tax बढ़ने से सितंबर तिमाही Net Profit 18.6 फीसदी गिरा

ITC के सिगरेट कारोबार पर Tax बढ़ने से सितंबर तिमाही Net Profit 18.6 फीसदी गिरा

कंपनी के कारोबार में अच्छी बढ़त दर्ज होने के बावजूद आईटीसी के लिए सितंबर तिमाही कुछ खास नहीं रही। सिगरेट की बिक्री में गिरावट का असर कंपनी के मुनाफे पर साफ दिखाई दिया। हालांकि, दूसरी ओर बिस्कुट, नमकीन, मसाले और घरेलू इस्तेमाल के सामान जैसे उत्पादों की मांग बढ़ने से कंपनी के गैर-सिगरेट कारोबार ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

आईटीसी लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करते हुए बताया कि जुलाई से सितंबर के बीच उसका एकीकृत शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 18.6 प्रतिशत घटकर 5,126 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 6,294 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। कंपनी के मुताबिक, सिगरेट की बिक्री में आई गिरावट इसका प्रमुख कारण रही। इसके बावजूद कंपनी की परिचालन से होने वाली आय में 44 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 30,578 करोड़ रुपये पहुंच गई। पिछले साल सितंबर तिमाही में यह आंकड़ा 21,256 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने कहा कि सिगरेट पर कर में अप्रत्याशित बढ़ोतरी के कारण इस कारोबार की बिक्री पर दबाव बना रहा। इसका असर कंपनी की कमाई पर भी पड़ा। कामकाजी स्तर पर भी प्रदर्शन कमजोर रहा। कंपनी का ब्याज, कर, मूल्यह्रास और कर्ज भुगतान से पहले का मुनाफा 17.4 प्रतिशत घटकर 5,160 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले यह 6,250 करोड़ रुपये था। वहीं, मुनाफे का अंतर भी घटकर 28 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 34.6 प्रतिशत था।

दूसरी ओर, सिगरेट के अलावा कंपनी के कारोबार में लगातार अच्छी बढ़त देखने को मिली। आईटीसी के गैर-सिगरेट कारोबार की एकीकृत आय में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कंपनी के मुताबिक, यह लगातार चौथी तिमाही है, जब इस कारोबार ने दो अंकों में वृद्धि दर्ज की है। इसकी आय पिछले 14 तिमाहियों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। बिस्कुट, नमकीन, नूडल्स, मसाले, नमक, जमे हुए खाद्य पदार्थ, घरेलू इस्तेमाल के सामान और कॉपियों जैसे उत्पादों में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़त रही। वहीं, दूध से बने उत्पादों और व्यक्तिगत सफाई से जुड़े सामान में भी अच्छी मांग बनी रही।

गौरतलब है कि कंपनी को इस दौरान कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, महंगे परिवहन और आपूर्ति में रुकावट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाधाओं ने भी कारोबार पर असर डाला। कंपनी ने बताया कि इन बढ़ती लागतों को संभालने के लिए उसने उत्पादों की गुणवत्ता और श्रेणी में सुधार, खर्चों पर नियंत्रण और जरूरत के अनुसार कीमतों में बदलाव जैसे कदम उठाए।

कंपनी के डिजिटल माध्यम से बिकने वाले और जैविक उत्पादों के कारोबार ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। योगाबार, 24 मंत्रा, प्रसुमा, मीटिगो और मदर स्पर्श जैसे ब्रांडों की बिक्री में सालाना आधार पर 70 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। इस कारोबार की सालाना अनुमानित आय 1,800 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई।

सिगरेट कारोबार में कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप नए उत्पाद और अपने ब्रांड पेश करने की जानकारी दी। साथ ही, कंपनी ने तस्करी के जरिए आने वाली सिगरेट की बढ़ती खेपों पर चिंता जताई। उसके मुताबिक, कर में अंतर का फायदा उठाकर इस तरह के उत्पाद बाजार में पहुंच रहे हैं और जब्ती की घटनाएं भी बढ़ी हैं।

कृषि कारोबार की आय में 12 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। मूल्य बढ़ाने वाले उत्पादों और पत्ती वाले तंबाकू के निर्यात से इसे सहारा मिला, हालांकि पश्चिम एशिया में व्यापार संबंधी बाधाओं और ग्राहकों की ओर से मांग में देरी का असर बना रहा। वहीं, कागज कारोबार में सुधार देखने को मिला। इसकी आय 36 प्रतिशत बढ़ी, जबकि ब्याज और कर से पहले का मुनाफा 48 प्रतिशत बढ़ गया। कुल मिलाकर, आईटीसी के नतीजे बताते हैं कि सिगरेट कारोबार पर दबाव के बीच कंपनी के दूसरे कारोबार उसकी कमाई को सहारा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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