NHRC सदस्य कानूनगो ने विजय मंदिर को लेकर जताई उम्मीद:भोजशाला फैसले पर कहा- देश अपनी गौरवशाली विरासत को फिर से पहचान रहा

NHRC सदस्य कानूनगो ने विजय मंदिर को लेकर जताई उम्मीद:भोजशाला फैसले पर कहा- देश अपनी गौरवशाली विरासत को फिर से पहचान रहा

धार भोजशाला मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद विदिशा के ऐतिहासिक विजय सूर्य मंदिर (बीजा मंडल) को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने शनिवार को विदिशा दौरे के दौरान सांस्कृतिक पुनर्जागरण की बात कही। उन्होंने कहा कि देश अपनी गौरवशाली विरासत को फिर से पहचान रहा है। कानूनगो ने अयोध्या में 500 साल बाद भव्य राम मंदिर के निर्माण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी प्राचीन विरासतों पर गर्व महसूस कर रहा है। उन्होंने इस दौर को भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का समय बताया। मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत लाया जाएगा
एनएचआरसी सदस्य ने धार भोजशाला मामले में आए फैसले का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि मां वाग्देवी की प्रतिमा को पुनः भारत लाकर भोजशाला में स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने विदिशा के विजय सूर्य मंदिर को लेकर भी बड़ी आशा व्यक्त की और महाकाल से श्रद्धालुओं की भावनाएं पूरी होने की प्रार्थना की। भोजशाला मामले के बाद अब विदिशा का विजय सूर्य मंदिर भी तेजी से चर्चा में है। शहर के किलेअंदर स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर वर्ष 1965 से बंद है। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की अनुमति के लिए ग्वालियर उच्च न्यायालय में एक अपील दायर की गई है, जिस पर सुनवाई जारी है। ASI) की खुदाई में मूर्तियां मिली थीं
बताया जाता है कि चालुक्य और परमार राजवंशों द्वारा निर्मित इस मंदिर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाई के दौरान बड़ी संख्या में मूर्तियां और प्राचीन अवशेष मिले थे। इन खोजों ने यहां एक प्राचीन मंदिर होने के प्रमाणों को और मजबूत किया है। अब श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि भोजशाला की तरह विजय सूर्य मंदिर के ताले भी जल्द खुल सकते हैं।

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