बांका में 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत:4 हजार से अधिक नोटिस तामील, पुराने विवादों का होगा निपटारा

बांका में 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत:4 हजार से अधिक नोटिस तामील, पुराने विवादों का होगा निपटारा

बांका सिविल कोर्ट में 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर आयोजित होने वाली इस वर्ष की पहली लोक अदालत में पुराने विवादों का निपटारा किया जाएगा। जिला जज सत्यभूषण आर्य ने बताया कि अब तक विभिन्न मामलों में 4 हजार से अधिक नोटिस तामील कराए जा चुके हैं। जिला जज सत्यभूषण आर्य ने बताया कि लोक अदालत की तैयारियों को लेकर व्यापक स्तर पर कार्रवाई जारी है। आपराधिक सुलहनीय और अन्य सुलहनीय मामलों में विभिन्न न्यायालयों से लगभग 4 हजार नोटिस तामील किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, बैंकिंग वादों में भी लगभग 4200 नोटिस संबंधित पक्षों को भेजे जा चुके हैं, और अतिरिक्त नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पक्षकारों को नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है, वे भी स्वेच्छा से लोक अदालत में उपस्थित होकर अपने मामलों का निस्तारण करा सकते हैं। आपसी सहमति से होगा सिविल मामलों का समाधान लोक अदालत में सुलहनीय आपराधिक वाद, प्ली बारगेनिंग, चेक बाउंस मामले, बैंक रिकवरी वाद, मोटर दुर्घटना मुआवजा वाद, ट्रैफिक चालान, श्रम विवाद, बिजली-पानी बिल से जुड़े मामले, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण, किराया, उपभोक्ता वाद सहित अन्य सिविल मामलों का समाधान आपसी सहमति से किया जाता है। हाजिरी शुल्क या वकील की अनिवार्यता नहीं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बताया कि लोक अदालत में मामलों के निस्तारण के लिए किसी प्रकार की कोर्ट फीस, हाजिरी शुल्क या वकील की अनिवार्यता नहीं होती है। यह पक्षकारों के लिए विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने पिछले वर्ष के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2023 में आयोजित चारों राष्ट्रीय लोक अदालतों में करीब 20 हजार मामलों का निबटारा हुआ था, जिससे 30 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली संभव हो सकी थी। बांका सिविल कोर्ट में 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर आयोजित होने वाली इस वर्ष की पहली लोक अदालत में पुराने विवादों का निपटारा किया जाएगा। जिला जज सत्यभूषण आर्य ने बताया कि अब तक विभिन्न मामलों में 4 हजार से अधिक नोटिस तामील कराए जा चुके हैं। जिला जज सत्यभूषण आर्य ने बताया कि लोक अदालत की तैयारियों को लेकर व्यापक स्तर पर कार्रवाई जारी है। आपराधिक सुलहनीय और अन्य सुलहनीय मामलों में विभिन्न न्यायालयों से लगभग 4 हजार नोटिस तामील किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, बैंकिंग वादों में भी लगभग 4200 नोटिस संबंधित पक्षों को भेजे जा चुके हैं, और अतिरिक्त नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पक्षकारों को नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है, वे भी स्वेच्छा से लोक अदालत में उपस्थित होकर अपने मामलों का निस्तारण करा सकते हैं। आपसी सहमति से होगा सिविल मामलों का समाधान लोक अदालत में सुलहनीय आपराधिक वाद, प्ली बारगेनिंग, चेक बाउंस मामले, बैंक रिकवरी वाद, मोटर दुर्घटना मुआवजा वाद, ट्रैफिक चालान, श्रम विवाद, बिजली-पानी बिल से जुड़े मामले, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण, किराया, उपभोक्ता वाद सहित अन्य सिविल मामलों का समाधान आपसी सहमति से किया जाता है। हाजिरी शुल्क या वकील की अनिवार्यता नहीं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बताया कि लोक अदालत में मामलों के निस्तारण के लिए किसी प्रकार की कोर्ट फीस, हाजिरी शुल्क या वकील की अनिवार्यता नहीं होती है। यह पक्षकारों के लिए विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने पिछले वर्ष के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2023 में आयोजित चारों राष्ट्रीय लोक अदालतों में करीब 20 हजार मामलों का निबटारा हुआ था, जिससे 30 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली संभव हो सकी थी।  

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