मदर्स डे स्पेशल: अनपढ़ होकर भी हरकू देवी ने समझा शिक्षा का महत्व, स्कूल के लिए दान की जमीन

मदर्स डे स्पेशल: अनपढ़ होकर भी हरकू देवी ने समझा शिक्षा का महत्व, स्कूल के लिए दान की जमीन

Mother’s Day Success Story: कहते हैं कि एक मां केवल जन्म नहीं देती, बल्कि अपने बच्चों और समाज के भविष्य की नींव भी रखती है। मदर्स डे के इस खास मौके पर हम आपको रूबरू करवा रहे हैं बालोतरा जिले की एक ऐसी मां से…

जिन्होंने खुद कभी स्कूल की चौखट नहीं लांघी, लेकिन अपनी दूरदर्शिता से सैकड़ों बच्चों के लिए ज्ञान के द्वार खोल दिए। यह कहानी है हरकू देवी की, जिनका त्याग आज शिक्षा की मशाल बनकर जल रहा है।

अनपढ़ होकर भी समझा शिक्षा का मोल

बालोतरा के धोरों (रेगिस्तान) में रहने वाली हरकू देवी का जीवन संघर्षों से भरा रहा। वे स्वयं निरक्षर थीं, लेकिन उन्होंने अभावों के बीच यह बखूबी समझ लिया था कि गरीबी और पिछड़ेपन की बेड़ियों को केवल शिक्षा ही काट सकती है।

Mother Day 2026

उनके पास अपनी जमापूंजी के नाम पर कुछ खातेदारी भूमि थी। जहां लोग जमीन के एक टुकड़े के लिए अपनों से लड़ जाते हैं। वहीं, हरकू देवी ने एक मिसाल पेश की। उन्होंने अपनी कीमती जमीन सरकार को स्कूल बनाने के लिए दान कर दी।

उनकी इसी उदारता का परिणाम है कि आज रूप नगर कंवरली में राजकीय विद्यालय खड़ा है। कल तक जहां केवल रेत के टीले थे, आज वहां स्कूल की घंटी गूंजती है और बच्चे अपना भविष्य संवार रहे हैं।

संघर्ष से सफलता तक, बेटे को बनाया शिक्षक

हरकू देवी का समर्पण केवल दान तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने पुत्र सालगराम को पढ़ाने के लिए दिन-रात मजदूरी की। पसीने की हर बूंद से उन्होंने बेटे की कलम में स्याही भरी। मां के दिए संस्कारों और कड़ी मेहनत का ही नतीजा था कि सालगराम न केवल शिक्षित हुए, बल्कि उन्होंने शिक्षक बनकर समाज को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया।

राष्ट्रपति पुरस्कार से बढ़ा मान

सालगराम ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मां के सपनों को हकीकत में बदला। उनके उत्कृष्ट अध्यापन और प्रयासों के कारण उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा ‘राष्ट्रपति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। एक मां के लिए इससे बड़ा गौरव क्या होगा कि जिस बेटे को उसने मजदूरी कर पढ़ाया, उसे देश के सर्वोच्च नागरिक ने सम्मानित किया।

हरकू देवी की यह कहानी हमें सिखाती है कि मातृत्व केवल लाड-प्यार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के कल्याण के लिए किया गया त्याग है। आज रूप नगर कंवरली का वह स्कूल हरकू देवी के उसी त्याग की गवाही दे रहा है। मदर्स डे पर ऐसी मां को कोटि-कोटि नमन, जिन्होंने रेगिस्तान की प्यासी धरती पर शिक्षा की गंगा बहा दी।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *