सम्राट के दरबार में सबसे ज्यादा अधिकारियों की शिकायत:पीड़ित बोला साहब CO ने मुझे थप्पड़ मारा, एक्शन लें, खुलेआम रिश्वत मांगते हैं

‘दाखिल खारिज की पक्की नकल मांगने पर CO साहब ने तीन थप्पड़ मेरे गाल पर मारे। इंदिरा आवास के लिए अधिकारी ने 40 हजार रुपए मांगे। नहीं दिया तो मेरी बहू का नाम काट दिया। सीएम साहेब आप एक्शन लें।’- राम गुलाम सिंह बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के जनता दरबार में लगाई गई ये फरियाद तो सिर्फ बानगी है। सम्राट ने सीएम बनने के बाद 3 दिन जनता दरबार लगाया। 775 लोग उनसे मिले, इनमें 315 फरियादी थे, जिन्होंने अफसरों के खिलाफ शिकायत की। सीएम के सामने सबसे अधिक शिकायतें अधिकारियों की आ रही हैं। रिश्वतखोरी के गंभीर इल्जाम लग रहे हैं। इसके बाद मारपीट, जमीन विवाद और प्रशासनिक लापरवाही जैसे गंभीर मामलों से जुड़ी शिकायतें हैं। सम्राट चौधरी के जनता दरबार में लोग क्या शिकायतें लेकर आए? पूर्व सीएम नीतीश कुमार और वर्तमान सीएम सम्राट चौधरी के जनता दरबार में क्या अंतर है? पढ़िए रिपोर्ट..। मुख्यमंत्री के जनता दरबार की तस्वीर देखिए पहले जानिए चार फरियादियों का दर्द 1- नकल की कॉपी मांगने पर अंचल के सीओ ने मारे तीन थप्पड़ मुख्यमंत्री के सामने गुरुवार को जनता दरबार में जय श्री राम के नारे लगाने वाले बुजुर्ग राम गुलाम सिंह मधुबनी जिला के लदनीयां थाना क्षेत्र के निवासी हैं। उन्होंने बताया, ‘दाखिल खारिज की नकल मांगने पर अंचल के सीओ ने मेरे गाल पर तीन थप्पड़ मारे। इंदिरा आवास के अधिकारी ने 40 हजार रुपए घूस मांगे। नहीं देने पर मेरी बहू का नाम इंदिरा आवास से हटा दिया।’ 2- अधिकारी कहते हैं पैसा दोगे, तभी काम होगा औरंगाबाद के रफीगंज थाना के कृष्णा साव ने कहा, ‘हम लोग 2 भाई हैं। मैं झारखंड में कमा खा रहा हूं। मेरे भाई ने सारी संपत्ति पर कब्जा कर लिया है। हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि केस लड़ें। अधिकारियों के पैर पकड़कर थक गया हूं।’ उन्होंने कहा, ‘सम्राट अगर मेरा काम कर देंगे तो इनका जय जयकार करेंगे। नहीं करेंगे तो समझ जाएंगे कि एक ही दूध के सब धोए हुए हैं।’ गृह मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री को दे चुके हैं आवेदन कृष्णा साव ने गृह मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक को आवेदन लिखा है। आरोप लगाया है कि उनके भाई ने उनकी पुश्तैनी जमीन और मकान पर अवैध कब्जा कर लिया है। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती है। घर में घुसने नहीं दिया जाता है। वह पिछले करीब 20 वर्षों से अपने परिवार के साथ झारखंड में मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। पंचायत से लेकर जिला स्तर के अधिकारी मांगते हैं रिश्वत कृष्णा साव ने कहा, ‘जमीन और मकान से संबंधित सभी कागजात मेरे पास हैं। इस मामले में सिविल कोर्ट औरंगाबाद में केस संख्या 260/12 भी लंबित है। इसके बाद भी न्याय नहीं मिल रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘पंचायत से लेकर अंचल और जिला स्तर तक अधिकारी काम कराने के नाम पर 10 से 50 हजार रुपए रिश्वत मांग रहे हैं। मेरे पास इतना पैसा नहीं है।’ 3- एसपी ने मेरा वेतन रुकवा दिया पटना के विजय कुमार दास ने आरोप लगाया, ‘पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने हमारा शोषण किया है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पदों पर अवैध नियुक्ति कर हमारा वेतन छीन लिया गया। हाईकोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया, लेकिन इसका भी अनुपालन नहीं किया गया।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे पूरा बिहार घुमाकर आरा में तैनात किया गया। आरा में मैंने काम किया, लेकिन विभागीय पदाधिकारी और आरा एसपी रहे मुरारी लाल मीना ने मेरा निबंधित डाक दबाकर वेतन रुकवा दिया। 1990 से मुझे वेतन नहीं मिला। मुझे रोड पर ला दिया। अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया है।’ 4- सरकारी कर्मचारी जमीन मामले में लापरवाही करते हैं कटिहार जिला स्थित फलका अंचल से आए महेंद्र ऋषि ने कहा, ‘अंचलाधिकारी लापरवाही कर रहे हैं। पूर्वज से मिली जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा है। सरकार ने कहा है कि भू-माफियाओं को खत्म करेंगे, लेकिन अभी भी ख़त्म नहीं हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि, ‘विजय सिन्हा के आने से सारे कार्य ठप पड़ गए। हमलोग का कोई सुनवाई नहीं हो रहा है। नई सरकार आई है तो उम्मीद है कि सही फैसला होगा। अब जानिए मुख्यमंत्री के जनता दरबार में कैसे लगा सकते हैं फरियाद सम्राट चौधरी के जनता दरबार में बिहार का कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत या फरियाद लेकर जा सकता है। 4 देश रत्न मार्ग के मुख्य द्वार पर सिक्योरिटी गार्ड्स लगाए गए हैं। ये सीएम के दरबार में जाने वाले लोगों की जांच करते हैं। आवेदन के अलावा किसी भी व्यक्ति को कोई भी सामान अंदर ले जाने की इजाजत नहीं है। सबसे पहले मुख्य द्वार पर एक पर्चा दिया जाता है, जिसमें लोग अपना नाम और पता भरकर अंदर जा सकते हैं। अंदर जाने के बाद मुख्यमंत्री से मिलकर अपना आवेदन देते हैं। सीएम को दिए आवेदन का क्या होता है? जनता दरबार में सीएम लोगों से मिलते हैं, उनकी पीड़ा सुनते हैं और आवेदन ले लेते हैं। सीएम आश्वसन देते हैं कि आपकी परेशानी का हल होगा। वह आवेदन पास मौजूद अधिकारियों को देते हैं। जनता दराबार में सीएम के सचिव के नेतृत्व में अधिकारियों की पूरी टीम काम करती है। किस व्यक्ति ने क्या फरियाद लगाई। उसकी परेशानी किया है। सभी बातों का डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जाता है। इसके बाद उसे संबंधित विभाग को जांच और कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। नीतीश के जनता दरबार और सम्राट के जनता दरबार में अंतर नीतीश के जनता दरबार की खासियत पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जनता दरबार पूरी तरह ‘सिस्टम’ और ‘प्रोसेस’ पर आधारित था। यह एक औपचारिक राजकीय कार्यक्रम था, जिसमें सभी विभागों के प्रधान सचिव और डीजीपी (DGP) स्तर के अधिकारी मौजूद रहते थे। यहां मुख्यमंत्री के निर्देश का मतलब सीधा सरकारी आदेश होता था। नीतीश कुमार के जनता दरबार में पहुंचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ता था। सुरक्षा और अनुशासन बहुत सख्त होता था। हालांकि, वे अधिकारियों को सीधे फोन लगाकर या ऑन-द-स्पॉट निर्देश देने के लिए जाने जाते हैं। सम्राट का जनता दरबार ‘पब्लिक कनेक्ट’ पर केंद्रित वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जनता दरबार ‘डायरेक्ट एक्शन’ और ‘पब्लिक कनेक्ट’ पर ज्यादा केंद्रित है। उनके दरबार में एंट्री लेने के लिए भी औपचारिकताएं कम है। आम लोग अपनी शिकायतों के साथ सीधे पहुंच सकते हैं। जनता दरबार में जो भी लोग आवेदन लेकर जाते हैं वह वहां मौजूद सचिव को अपने आवेदन की जानकारी देते हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक-एक करके सभी से मिलकर उनको आश्वासन देते हैं हालांकि मामले पर किस तरीके से कार्रवाई हो रही है वह आने वाले समय में पता चलेगा। ‘दाखिल खारिज की पक्की नकल मांगने पर CO साहब ने तीन थप्पड़ मेरे गाल पर मारे। इंदिरा आवास के लिए अधिकारी ने 40 हजार रुपए मांगे। नहीं दिया तो मेरी बहू का नाम काट दिया। सीएम साहेब आप एक्शन लें।’- राम गुलाम सिंह बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के जनता दरबार में लगाई गई ये फरियाद तो सिर्फ बानगी है। सम्राट ने सीएम बनने के बाद 3 दिन जनता दरबार लगाया। 775 लोग उनसे मिले, इनमें 315 फरियादी थे, जिन्होंने अफसरों के खिलाफ शिकायत की। सीएम के सामने सबसे अधिक शिकायतें अधिकारियों की आ रही हैं। रिश्वतखोरी के गंभीर इल्जाम लग रहे हैं। इसके बाद मारपीट, जमीन विवाद और प्रशासनिक लापरवाही जैसे गंभीर मामलों से जुड़ी शिकायतें हैं। सम्राट चौधरी के जनता दरबार में लोग क्या शिकायतें लेकर आए? पूर्व सीएम नीतीश कुमार और वर्तमान सीएम सम्राट चौधरी के जनता दरबार में क्या अंतर है? पढ़िए रिपोर्ट..। मुख्यमंत्री के जनता दरबार की तस्वीर देखिए पहले जानिए चार फरियादियों का दर्द 1- नकल की कॉपी मांगने पर अंचल के सीओ ने मारे तीन थप्पड़ मुख्यमंत्री के सामने गुरुवार को जनता दरबार में जय श्री राम के नारे लगाने वाले बुजुर्ग राम गुलाम सिंह मधुबनी जिला के लदनीयां थाना क्षेत्र के निवासी हैं। उन्होंने बताया, ‘दाखिल खारिज की नकल मांगने पर अंचल के सीओ ने मेरे गाल पर तीन थप्पड़ मारे। इंदिरा आवास के अधिकारी ने 40 हजार रुपए घूस मांगे। नहीं देने पर मेरी बहू का नाम इंदिरा आवास से हटा दिया।’ 2- अधिकारी कहते हैं पैसा दोगे, तभी काम होगा औरंगाबाद के रफीगंज थाना के कृष्णा साव ने कहा, ‘हम लोग 2 भाई हैं। मैं झारखंड में कमा खा रहा हूं। मेरे भाई ने सारी संपत्ति पर कब्जा कर लिया है। हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि केस लड़ें। अधिकारियों के पैर पकड़कर थक गया हूं।’ उन्होंने कहा, ‘सम्राट अगर मेरा काम कर देंगे तो इनका जय जयकार करेंगे। नहीं करेंगे तो समझ जाएंगे कि एक ही दूध के सब धोए हुए हैं।’ गृह मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री को दे चुके हैं आवेदन कृष्णा साव ने गृह मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक को आवेदन लिखा है। आरोप लगाया है कि उनके भाई ने उनकी पुश्तैनी जमीन और मकान पर अवैध कब्जा कर लिया है। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती है। घर में घुसने नहीं दिया जाता है। वह पिछले करीब 20 वर्षों से अपने परिवार के साथ झारखंड में मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। पंचायत से लेकर जिला स्तर के अधिकारी मांगते हैं रिश्वत कृष्णा साव ने कहा, ‘जमीन और मकान से संबंधित सभी कागजात मेरे पास हैं। इस मामले में सिविल कोर्ट औरंगाबाद में केस संख्या 260/12 भी लंबित है। इसके बाद भी न्याय नहीं मिल रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘पंचायत से लेकर अंचल और जिला स्तर तक अधिकारी काम कराने के नाम पर 10 से 50 हजार रुपए रिश्वत मांग रहे हैं। मेरे पास इतना पैसा नहीं है।’ 3- एसपी ने मेरा वेतन रुकवा दिया पटना के विजय कुमार दास ने आरोप लगाया, ‘पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने हमारा शोषण किया है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पदों पर अवैध नियुक्ति कर हमारा वेतन छीन लिया गया। हाईकोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया, लेकिन इसका भी अनुपालन नहीं किया गया।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे पूरा बिहार घुमाकर आरा में तैनात किया गया। आरा में मैंने काम किया, लेकिन विभागीय पदाधिकारी और आरा एसपी रहे मुरारी लाल मीना ने मेरा निबंधित डाक दबाकर वेतन रुकवा दिया। 1990 से मुझे वेतन नहीं मिला। मुझे रोड पर ला दिया। अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया है।’ 4- सरकारी कर्मचारी जमीन मामले में लापरवाही करते हैं कटिहार जिला स्थित फलका अंचल से आए महेंद्र ऋषि ने कहा, ‘अंचलाधिकारी लापरवाही कर रहे हैं। पूर्वज से मिली जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा है। सरकार ने कहा है कि भू-माफियाओं को खत्म करेंगे, लेकिन अभी भी ख़त्म नहीं हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि, ‘विजय सिन्हा के आने से सारे कार्य ठप पड़ गए। हमलोग का कोई सुनवाई नहीं हो रहा है। नई सरकार आई है तो उम्मीद है कि सही फैसला होगा। अब जानिए मुख्यमंत्री के जनता दरबार में कैसे लगा सकते हैं फरियाद सम्राट चौधरी के जनता दरबार में बिहार का कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत या फरियाद लेकर जा सकता है। 4 देश रत्न मार्ग के मुख्य द्वार पर सिक्योरिटी गार्ड्स लगाए गए हैं। ये सीएम के दरबार में जाने वाले लोगों की जांच करते हैं। आवेदन के अलावा किसी भी व्यक्ति को कोई भी सामान अंदर ले जाने की इजाजत नहीं है। सबसे पहले मुख्य द्वार पर एक पर्चा दिया जाता है, जिसमें लोग अपना नाम और पता भरकर अंदर जा सकते हैं। अंदर जाने के बाद मुख्यमंत्री से मिलकर अपना आवेदन देते हैं। सीएम को दिए आवेदन का क्या होता है? जनता दरबार में सीएम लोगों से मिलते हैं, उनकी पीड़ा सुनते हैं और आवेदन ले लेते हैं। सीएम आश्वसन देते हैं कि आपकी परेशानी का हल होगा। वह आवेदन पास मौजूद अधिकारियों को देते हैं। जनता दराबार में सीएम के सचिव के नेतृत्व में अधिकारियों की पूरी टीम काम करती है। किस व्यक्ति ने क्या फरियाद लगाई। उसकी परेशानी किया है। सभी बातों का डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जाता है। इसके बाद उसे संबंधित विभाग को जांच और कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। नीतीश के जनता दरबार और सम्राट के जनता दरबार में अंतर नीतीश के जनता दरबार की खासियत पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जनता दरबार पूरी तरह ‘सिस्टम’ और ‘प्रोसेस’ पर आधारित था। यह एक औपचारिक राजकीय कार्यक्रम था, जिसमें सभी विभागों के प्रधान सचिव और डीजीपी (DGP) स्तर के अधिकारी मौजूद रहते थे। यहां मुख्यमंत्री के निर्देश का मतलब सीधा सरकारी आदेश होता था। नीतीश कुमार के जनता दरबार में पहुंचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ता था। सुरक्षा और अनुशासन बहुत सख्त होता था। हालांकि, वे अधिकारियों को सीधे फोन लगाकर या ऑन-द-स्पॉट निर्देश देने के लिए जाने जाते हैं। सम्राट का जनता दरबार ‘पब्लिक कनेक्ट’ पर केंद्रित वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जनता दरबार ‘डायरेक्ट एक्शन’ और ‘पब्लिक कनेक्ट’ पर ज्यादा केंद्रित है। उनके दरबार में एंट्री लेने के लिए भी औपचारिकताएं कम है। आम लोग अपनी शिकायतों के साथ सीधे पहुंच सकते हैं। जनता दरबार में जो भी लोग आवेदन लेकर जाते हैं वह वहां मौजूद सचिव को अपने आवेदन की जानकारी देते हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक-एक करके सभी से मिलकर उनको आश्वासन देते हैं हालांकि मामले पर किस तरीके से कार्रवाई हो रही है वह आने वाले समय में पता चलेगा।  

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