बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनाव (एक सीट पर उपचुनाव) होने हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून है। 18 जून को जरूरत पड़ी तो वोटिंग कराई जा सकती है। नामांकन के 3 दिन बचे हैं, लेकिन अब तक एक भी प्रत्याशी ने पर्चा नहीं भरा है। सूत्रों के अनुसार जदयू ने अपने चारों उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं। भाजपा और चिराग पासवान की LJP (R) ने पत्ते नहीं खोले हैं। भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए विधान परिषद चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार कब नॉमिनेशन फाइल करेंगे। किस पार्टी ने अपने प्रत्याशी लगभग फाइनल कर लिया है। सबसे पहले जानिए NDA के उम्मीदवार कब नॉमिनेशन फाइल करेंगे NDA की ओर से जदयू के 4, भाजपा के 3 और LJP(R) व RLM के एक-एक उम्मीदवार उतारे जाएंगे। नॉमिनेशन के लिए एनडीए ने तारीख पक्की कर ली है। एनडीए सूत्रों की माने तो गठबंधन के तमाम प्रत्याशी 8 जून को पर्चा भरेंगे। इस मौके पर बिहार के सीएम सम्राट चौधरी, पूर्व सीएम नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा अन्य नेता मौजूद रहेंगे। NDA के पास 9 सीटें जीतने लायक संख्या बल है। एक सीट जीतने के लिए 25 विधायकों की जरूरत है। राजद को एक सीट पर जीत मिल सकती है। जदयू की तैयारी लगभग पूरी, 4 सीट के लिए इन 5 नामों की चर्चा विधान परिषद चुनाव के लिए जदयू ने तैयारी पूरी कर ली है। विधान परिषद जाने वाले नेताओं के नाम लगभग फाइनल हो गए हैं। सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में नाम तय किए गए। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के अलावा अन्य तीन नाम पर सहमति लगभग पक्की है। मुख्य रूप से 5 नामों की चर्चा है। 1- निशांत कुमार स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का विधान परिषद जाना तय है। इस वक्त वह किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें शपथ लेने के 6 माह के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना है। निशांत पूर्व सीएम और जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के पुत्र हैं। नीतीश राजनीति से विदा लेते-लेते अपने पुत्र को सियासी मैदान में उतार चुके हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से बार-बार कहा जाता है कि जदयू कार्यकर्ताओं और नेताओं की मांग पर निशांत सियासत में आए हैं। 2- प्रोफेसर नवीन आर्या प्रो. नवीन आर्या जदयू के पुराने कार्यकर्ता और नेता हैं। पार्टी में लंबे समय से जुड़े हैं। पार्टी के अंदर और सियासी गलियारों में इनके नाम की चर्चा तेज है। कहा जा रहा है कि नवीन आर्या को विधान परिषद भेजकर पार्टी के बाहर और अंदर बड़ा मैसेज दिया जा रहा है। नवीन आर्य जदयू के प्रमुख नेता और बिहार राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष हैं। मौजूदा वक्त में पार्टी के प्रदेश महासचिव और जदयू प्रदेश कार्यालय में ‘जनसुनवाई कार्यक्रम’ के प्रभारी हैं। पार्टी के अंदर इनकी सक्रियता काफी होती है। चंद्रवंशी समाज से आते हैं। उन्हें जदयू के संगठन, विशेष रूप से अति पिछड़ा वर्ग के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने वाले अहम नेताओं में गिना जाता है। वह पटना यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। 3- डॉ. कुमुद वर्मा डॉ. कुमुद वर्मा को रिपीट किया जा सकता है। वह जून 2020 में विधानसभा कोटे से निर्विरोध निर्वाचित होकर विधान परिषद पहुंची थीं। विधान परिषद में ‘बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण समिति’ की अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। कुमुद वर्मा कोइरी दांगी समुदाय से आती हैं। लंबे समय से जदयू से जुड़ी हुई हैं। नीतीश कुमार लवकुश समीकरण साधने के लिए दांगी समाज के नेता को उच्च सदन का सदस्य बनाते रहें हैं। यही वजह है कि कुमुद वर्मा को रिपीट किया जा सकता है। इनसे पहले दांगी समाज से आने वाले नागमणि और उपेंद्र प्रसाद बागी जैसे नेताओं को MLC बनाया गया था। 4- प्रो. गुलाम गौस प्रो. गुलाम गौस के रिपीट होने की चर्चा है। इसकी वजह नीतीश कुमार का बेहद करीबी होना माना जा रहा है। अल्पसंख्यक कोटे से दूसरे एमएलसी हैं। मुस्लिम अति पिछड़ा समाज से आते हैं। गुलाम गौस 8 साल पहले राजद छोड़कर जदयू में आए थे। इसके बाद इन्हें नीतीश कुमार ने विधान परिषद भेजा था। वह 2005 से 2010 तक बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता थे। गुलाम गौस बिहार के दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व मंत्री और बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गुलाम सरवर के भतीजे हैं। 2025 में उन्होंने केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन बिल को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। भाजपा पर तीखा हमला बोला था। मार्च 2025 में ईद के मौके पर जेडीयू में होने के बावजूद गुलाम गौस अचानक आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मिलने राबड़ी आवास पहुंचे थे। इस घटना ने बिहार की राजनीति में काफी हलचल पैदा की थी। 5- ललन मंडल जदयू की ओर से नए नाम में ललन मंडल की भी चर्चा है। वह उभरते हुए नेता हैं। EBC समाज से आते हैं। ललन मुख्य रूप से पार्टी के सांगठनिक और स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहे हैं। जेडीयू के जमीनी स्तर के संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। ललन मंडल को पार्टी के भीतर रानीगंज प्रखंड अध्यक्ष जैसी स्थानीय सांगठनिक जिम्मेदारियां भी मिल चुकी है। भाजपा प्रत्याशियों के नाम तय करने के लिए हो रही बैठकें भाजपा की ओर से किन नेताओं को टिकट देना है, इसको लेकर सीनियर नेताओं ने बैठकें की हैं। कुछ समय पहले सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली गए थे। वहां पार्टी नेतृत्व के साथ बैठक हुई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पटना आए हैं। उनके आवास पर भाजपा नेताओं की बैठक हुई है। इसमें सम्राट चौधरी भी शामिल हुए। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि किसे विधान परिषद चुनाव का टिकट दिया जाए। हालांकि, टिकट पाने वालों के नाम अभी सामने नहीं आए हैं। RLM से दीपक प्रकाश का नाम तय RLM कोटे से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाना तय है। वह मंत्री तो हैं, लेकिन किसी सदन के सदस्य नहीं। ऐसे में उन्हें MLC बनाना जरूरी है ताकि 6 महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य होने की जरूरत पूरी हो सके। चिराग के भांजे की हो सकती है एंट्री
LJP(R) को एक उम्मीदवार उतारना है। इसके लिए तीन नामों की चर्चा है। सबसे ऊपर नाम चिराग पासवान के भांजे सीमांत मृणाल का है। वह फिलहाल पार्टी के युवा विंग को लीड कर रहे हैं। मृणाल को विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से गरखा से कैंडिडेट बनाया गया था, लेकिन हार गए थे। इनके अलावा चिराग पासवान के करीबी वेद प्रकाश पांडेय और पार्टी के सीनियर लीडर हुलास पांडेय के नाम पर भी चर्चा की जा रही है। बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनाव (एक सीट पर उपचुनाव) होने हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून है। 18 जून को जरूरत पड़ी तो वोटिंग कराई जा सकती है। नामांकन के 3 दिन बचे हैं, लेकिन अब तक एक भी प्रत्याशी ने पर्चा नहीं भरा है। सूत्रों के अनुसार जदयू ने अपने चारों उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं। भाजपा और चिराग पासवान की LJP (R) ने पत्ते नहीं खोले हैं। भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए विधान परिषद चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार कब नॉमिनेशन फाइल करेंगे। किस पार्टी ने अपने प्रत्याशी लगभग फाइनल कर लिया है। सबसे पहले जानिए NDA के उम्मीदवार कब नॉमिनेशन फाइल करेंगे NDA की ओर से जदयू के 4, भाजपा के 3 और LJP(R) व RLM के एक-एक उम्मीदवार उतारे जाएंगे। नॉमिनेशन के लिए एनडीए ने तारीख पक्की कर ली है। एनडीए सूत्रों की माने तो गठबंधन के तमाम प्रत्याशी 8 जून को पर्चा भरेंगे। इस मौके पर बिहार के सीएम सम्राट चौधरी, पूर्व सीएम नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा अन्य नेता मौजूद रहेंगे। NDA के पास 9 सीटें जीतने लायक संख्या बल है। एक सीट जीतने के लिए 25 विधायकों की जरूरत है। राजद को एक सीट पर जीत मिल सकती है। जदयू की तैयारी लगभग पूरी, 4 सीट के लिए इन 5 नामों की चर्चा विधान परिषद चुनाव के लिए जदयू ने तैयारी पूरी कर ली है। विधान परिषद जाने वाले नेताओं के नाम लगभग फाइनल हो गए हैं। सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में नाम तय किए गए। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के अलावा अन्य तीन नाम पर सहमति लगभग पक्की है। मुख्य रूप से 5 नामों की चर्चा है। 1- निशांत कुमार स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का विधान परिषद जाना तय है। इस वक्त वह किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें शपथ लेने के 6 माह के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना है। निशांत पूर्व सीएम और जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के पुत्र हैं। नीतीश राजनीति से विदा लेते-लेते अपने पुत्र को सियासी मैदान में उतार चुके हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से बार-बार कहा जाता है कि जदयू कार्यकर्ताओं और नेताओं की मांग पर निशांत सियासत में आए हैं। 2- प्रोफेसर नवीन आर्या प्रो. नवीन आर्या जदयू के पुराने कार्यकर्ता और नेता हैं। पार्टी में लंबे समय से जुड़े हैं। पार्टी के अंदर और सियासी गलियारों में इनके नाम की चर्चा तेज है। कहा जा रहा है कि नवीन आर्या को विधान परिषद भेजकर पार्टी के बाहर और अंदर बड़ा मैसेज दिया जा रहा है। नवीन आर्य जदयू के प्रमुख नेता और बिहार राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष हैं। मौजूदा वक्त में पार्टी के प्रदेश महासचिव और जदयू प्रदेश कार्यालय में ‘जनसुनवाई कार्यक्रम’ के प्रभारी हैं। पार्टी के अंदर इनकी सक्रियता काफी होती है। चंद्रवंशी समाज से आते हैं। उन्हें जदयू के संगठन, विशेष रूप से अति पिछड़ा वर्ग के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने वाले अहम नेताओं में गिना जाता है। वह पटना यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। 3- डॉ. कुमुद वर्मा डॉ. कुमुद वर्मा को रिपीट किया जा सकता है। वह जून 2020 में विधानसभा कोटे से निर्विरोध निर्वाचित होकर विधान परिषद पहुंची थीं। विधान परिषद में ‘बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण समिति’ की अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। कुमुद वर्मा कोइरी दांगी समुदाय से आती हैं। लंबे समय से जदयू से जुड़ी हुई हैं। नीतीश कुमार लवकुश समीकरण साधने के लिए दांगी समाज के नेता को उच्च सदन का सदस्य बनाते रहें हैं। यही वजह है कि कुमुद वर्मा को रिपीट किया जा सकता है। इनसे पहले दांगी समाज से आने वाले नागमणि और उपेंद्र प्रसाद बागी जैसे नेताओं को MLC बनाया गया था। 4- प्रो. गुलाम गौस प्रो. गुलाम गौस के रिपीट होने की चर्चा है। इसकी वजह नीतीश कुमार का बेहद करीबी होना माना जा रहा है। अल्पसंख्यक कोटे से दूसरे एमएलसी हैं। मुस्लिम अति पिछड़ा समाज से आते हैं। गुलाम गौस 8 साल पहले राजद छोड़कर जदयू में आए थे। इसके बाद इन्हें नीतीश कुमार ने विधान परिषद भेजा था। वह 2005 से 2010 तक बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता थे। गुलाम गौस बिहार के दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व मंत्री और बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गुलाम सरवर के भतीजे हैं। 2025 में उन्होंने केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन बिल को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। भाजपा पर तीखा हमला बोला था। मार्च 2025 में ईद के मौके पर जेडीयू में होने के बावजूद गुलाम गौस अचानक आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मिलने राबड़ी आवास पहुंचे थे। इस घटना ने बिहार की राजनीति में काफी हलचल पैदा की थी। 5- ललन मंडल जदयू की ओर से नए नाम में ललन मंडल की भी चर्चा है। वह उभरते हुए नेता हैं। EBC समाज से आते हैं। ललन मुख्य रूप से पार्टी के सांगठनिक और स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहे हैं। जेडीयू के जमीनी स्तर के संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। ललन मंडल को पार्टी के भीतर रानीगंज प्रखंड अध्यक्ष जैसी स्थानीय सांगठनिक जिम्मेदारियां भी मिल चुकी है। भाजपा प्रत्याशियों के नाम तय करने के लिए हो रही बैठकें भाजपा की ओर से किन नेताओं को टिकट देना है, इसको लेकर सीनियर नेताओं ने बैठकें की हैं। कुछ समय पहले सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली गए थे। वहां पार्टी नेतृत्व के साथ बैठक हुई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पटना आए हैं। उनके आवास पर भाजपा नेताओं की बैठक हुई है। इसमें सम्राट चौधरी भी शामिल हुए। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि किसे विधान परिषद चुनाव का टिकट दिया जाए। हालांकि, टिकट पाने वालों के नाम अभी सामने नहीं आए हैं। RLM से दीपक प्रकाश का नाम तय RLM कोटे से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाना तय है। वह मंत्री तो हैं, लेकिन किसी सदन के सदस्य नहीं। ऐसे में उन्हें MLC बनाना जरूरी है ताकि 6 महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य होने की जरूरत पूरी हो सके। चिराग के भांजे की हो सकती है एंट्री
LJP(R) को एक उम्मीदवार उतारना है। इसके लिए तीन नामों की चर्चा है। सबसे ऊपर नाम चिराग पासवान के भांजे सीमांत मृणाल का है। वह फिलहाल पार्टी के युवा विंग को लीड कर रहे हैं। मृणाल को विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से गरखा से कैंडिडेट बनाया गया था, लेकिन हार गए थे। इनके अलावा चिराग पासवान के करीबी वेद प्रकाश पांडेय और पार्टी के सीनियर लीडर हुलास पांडेय के नाम पर भी चर्चा की जा रही है।


