बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। इसमें 7 ऐसे युवा चेहरे हैं जो स्थापित धाकड़ नेताओं को चुनौती दे रहे हैं। कई तो पहली बार MLC चुनाव लड़ रहे हैं। छात्र नेता दिलीप कुमार दरभंगा स्नातक सीट से मैदान में हैं। छात्र आंदोलन के समय पुलिस की लाठी लगी। इसका असर है कि ठीक से सुन नहीं पाते हैं। कोसी स्नातक सीट से चुनाव लड़ रहे अमित विक्रम पहले शिक्षक थे। शिक्षकों की आवाज उठाने के लिए उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। MLC चुनाव में कौन से युवा उम्मीदवार मैदान में हैं? इनकी क्या ताकत है? पढ़िए रिपोर्ट…। 1- दिलीप कुमार; कंपीटिशन की तैयारी छोड़ छात्रों की लड़ाई लड़ी छात्र नेता दिलीप कुमार दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी हैं। बिहार में पिछले 11 वर्षों में हुई प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपरलीक, धांधली, सेटिंग और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। वैकेंसी निकालने, समय पर परीक्षा कराने, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने सहित छात्र हित मे निरंतर आंदोलन करते रहे हैं। दिलीप बहादुरपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। छात्रों के मुद्दों पर आंदोलन के दौरान कई बार दिलीप को पुलिस की लाठी खानी पड़ी। पुलिस की लाठी से लगी चोट के चलते उन्हें ठीक से सुनाई नहीं देता। एम्स दिल्ली में कान का ऑपरेशन कराना पड़ा। बार-बार चेकअप के लिए दिल्ली जाना पड़ता है। कान में हमेशा हूमिंग जैसी आवाज आती रहती है। भास्कर ने दिलीप कुमार से बात की। उन्होंने कहा, ‘कई पार्टियां धन-बल की ताकत पर उम्मीदवार उतार रही हैं। इसके बाद भी मुझे भरोसा है कि जनता मेरे 11 साल के संघर्ष का मेहनताना देगी। मैं जीतता हूं तो छात्रों के साथ ही शिक्षकों की भी आवाज उठाऊंगा।’ ‘पुलिस की लाठियों से लगी चोट के चलते मेरी पूरा बदन टूटता है। कंधे, हाथ और घुटने में काफी दर्द रहता है। आंखों से दिखना भी कम हो रहा है। मैंने कंपटीशन की तैयारी छोड़कर छात्रों की लड़ाई लड़ी है। चाहता तो अपनी पत्नी को बीपीएससी से पास करवा लेता, लेकिन कभी समझौता नहीं किया।’ दिलीप को दरभंगा स्नातक सीट पर सीटिंग एमएलसी सर्वेश कुमार का सामना करना होगा। पिछले चुनाव में सर्वेश निर्दलीय जीते थे। इस बार भाजपा ने टिकट दिया है। आरजेडी से यहां अनिल कुमार झा उम्मीदवार हैं। दिलीप कुमार यादव जाति से आते हैं और कांग्रेस ने उनका साथ दिया तो मुसलान वोट भी उनकी तरफ आ सकता है। 2- अमित विक्रम; शिक्षक की नौकरी से बर्खास्त हुए, कांग्रेस से न मिला टिकट अमित विक्रम कोसी स्नातक क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले कांग्रेस की सदस्यता ली। कांग्रेस ने टिकट नहीं भी दिया तो निर्दलीय चुनाव लड़ने को तैयार हैं। अमित मुंगेर जिले के एक स्कूल में शिक्षक थे। शिक्षकों के सवाल उठाने की वजह से उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद और अधिक मुखर होकर शिक्षकों के सवाल उठाने लगे। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज में भी रह चुके हैं, लेकिन विवाद के बाद अलग हो गए। कोसी स्नातक सीट पर विक्रम को बीजेपी के सीटिंग एमएलसी डॉ. एन.के. यादव का सामना करना है। आरजेडी ने नितेश कुमार को उतारा है। जनसुराज से रजनीश रंजन उम्मीदवार हैं। कोसी क्षेत्र में सहरसा, मधेपुरा, सुपौल आदि जिले आते हैं। इस क्षेत्र में राजपूत और ब्राह्मण जाति के लोगों की राजनीतिक पैठ रही है। यादव भी काफी संख्या में हैं। विक्रम राजपूत जाति से आते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने सब लोगों के लिए 12 साल संघर्ष किया। अपनी नौकरी तक गंवायी। इसी कामकाज के आधार पर वोट मांग रहा हूं। यह स्नातक क्षेत्र है। इसके मतदाताओं में बड़ी संख्या में शिक्षक हैं। मैं सभी तरह के वोटर से वोट की अपील कर रहा हूं।’ 3-दिव्या ज्योति; लड़कियों की शिक्षा के लिए काम किया पटना शिक्षक सीट से दिव्या ज्योति जन सुराज पार्टी की प्रत्याशी हैं। पहले वह निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं। उनका मुकाबला बीजेपी के धाकड़ नेता प्रो. नवल किशोर यादव से है। नवल यादव 5 बार चुनाव जीत चुके हैं। पटना शिक्षक सीट से राजद ने डॉ. संजीव कुमार सिंह को उतारा है। संजीव परबत्ता से विधायक रह चुके हैं। उनके पिता आरएन सिंह मंत्री रह चुके हैं। जन सुराज ने पटना के बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को हराया। अब पार्टी पटना की एमएलसी सीट पर बीजेपी के 30 साल पुराने गढ़ में सेंधमारी करना चाहती हैं। दिव्या भूमिहार जाति से हैं। चाणक्या कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। चाणक्या फाउंडेशन की CEO हैं। बालिका शिक्षा और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए काम करती रही हैं। 4- डॉ. विमोहन कुमार; वैशाली कोविड सेंटर खोलकर बचाई जानें डॉ. विमोहन कुमार तिरहुत स्नातक सीट से जन सुराज के उम्मीदवार हैं। पेशे से डॉक्टर विमोहन आईसीयू विशेषज्ञ हैं। मुजफ्फरपुर के प्रशांत अस्पताल में लगभग 15 वर्षों तक सेवाएं दी हैं। सितंबर 2026 से जन सुराज के साथ अपनी राजनीति शुरू की। राजनीति में नया चेहरा हैं। उन्होंने केरल से एमबीबीएस की पढ़ाई की और कोलकाता में आगे का अध्ययन किया। कोविड के समय ‘वैशाली कोविड सेंटर’ खोला और लोगों की जान बचाई। अब वे तिरहुत स्नातक से चुनाव लड़कर राजनीति भी करना चाहते हैं। शिक्षा और रोजगार उनके एजेंडा में सबसे ऊपर है। भास्कर के साथ बातचीत में डॉ. विमोहन ने कहा, ‘यहां चतुष्कोणीय मुकाबला है, लेकिन तीन उम्मीदवार आपस में ही लड़ रहे हैं। मेरा एजेंडा डेवलपमेंट से जुड़ा है।’ ‘बाबा गरीब स्थान को गरीबनाथ धाम बनाना, इंडस्ट्री की स्थापना, रिसर्च और एआई कोर्स शुरू करना, पीएचसी लेवल पर हर जांच की सुविधा, यूनिफाइड एग्रीकल्चर, ट्रेड इंटरनेशनल बॉर्डर और स्टेट बॉर्डर, ये हमारा एजेंडा है।’ ‘जनसुराज की वजह से जेनजी बड़ी संख्या में मुझसे जुड़ रहे हैं। एनडीए से नाराज वोटर भी मेरी तरफ आ रहे हैं। कोरोना काल में सबसे कम रेट में प्राइवेट आईसीयू मैंने शुरू किया था।’ 5- रजनीश रंजन; 5 लाख का ब्याज युक्त कर्ज दिलाएंगे कोसी स्नातक सीट से जनसुराज ने युवा नेता रजनीश रंजन को उतारा है। युवा शिक्षा शास्त्री के रूप में उनकी पहचान है। सहरसा के रहने वाले हैं। रजनीश अपने वोटर से वादा कर रहे हैं कि चुनाव जीत गए तो 5 लाख रुपए ब्याज युक्त कर्ज और अनुदान दिलाएंगे। वह कोसी प्रमंडल और आसपास के इलाकों में ‘ नमस्ते कटिहार’ जनसंपर्क अभियान के जरिए वोटर से मिल रहे हैं। 6-अभिषेक झा; जदयू के प्रवक्ता का एक बार फिर बंशीधर ब्रजवासी से सामना तिरहुत स्नातक सीट से जदयू ने युवा नेता और प्रवक्ता अभिषेक झा को टिकट दिया है। अभिषेक कोचिंग संस्थान चलाते हैं और शिक्षक हैं। देवेश चंद्र ठाकुर इस सीट से जीतते रहे थे, लेकिन वे लोकसभा का चुनाव जीत गए थे इसलिए उपचुनाव कराया गया था और उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी बंशीधर ब्रजवासी चुनाव जीत गए, अभिषेक हार गए थे। एक बार फिर अभिषेक मैदान में हैं पूरी तैयारी के साथ।
7- बंशीधर ब्रजवासी; शिक्षक की नौकरी से बर्खास्त हुए, बने MLC बंशीधर ब्रजवासी शिक्षक रहे लेकिन उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। उसके बाद उन्होंने निर्दलीय ताल ठोंका और जीत हासिल की थी। अपनी परंपरागत सीट पर जेडीयू के देवेश चंद्र ठाकुर जेडीयू के अभिषेक झा को चुनाव नहीं जितवा पाए थे। एक बार फिर बंशीधर मैदान में हैं। युवा नेता के रुप में शिक्षकों और स्नातकों के बीच काफी लोकप्रिय नाम हैं बंशीधर ब्रजवासी। वाक पटु भी हैं। लेकिन इस बार उनको कड़ी चुनौती जेडीयू के अभिषेक झा के साथ ही जनसुराज के डॉ. विमोहन कुमार से भी मिल रही है। बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। इसमें 7 ऐसे युवा चेहरे हैं जो स्थापित धाकड़ नेताओं को चुनौती दे रहे हैं। कई तो पहली बार MLC चुनाव लड़ रहे हैं। छात्र नेता दिलीप कुमार दरभंगा स्नातक सीट से मैदान में हैं। छात्र आंदोलन के समय पुलिस की लाठी लगी। इसका असर है कि ठीक से सुन नहीं पाते हैं। कोसी स्नातक सीट से चुनाव लड़ रहे अमित विक्रम पहले शिक्षक थे। शिक्षकों की आवाज उठाने के लिए उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। MLC चुनाव में कौन से युवा उम्मीदवार मैदान में हैं? इनकी क्या ताकत है? पढ़िए रिपोर्ट…। 1- दिलीप कुमार; कंपीटिशन की तैयारी छोड़ छात्रों की लड़ाई लड़ी छात्र नेता दिलीप कुमार दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी हैं। बिहार में पिछले 11 वर्षों में हुई प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपरलीक, धांधली, सेटिंग और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। वैकेंसी निकालने, समय पर परीक्षा कराने, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने सहित छात्र हित मे निरंतर आंदोलन करते रहे हैं। दिलीप बहादुरपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। छात्रों के मुद्दों पर आंदोलन के दौरान कई बार दिलीप को पुलिस की लाठी खानी पड़ी। पुलिस की लाठी से लगी चोट के चलते उन्हें ठीक से सुनाई नहीं देता। एम्स दिल्ली में कान का ऑपरेशन कराना पड़ा। बार-बार चेकअप के लिए दिल्ली जाना पड़ता है। कान में हमेशा हूमिंग जैसी आवाज आती रहती है। भास्कर ने दिलीप कुमार से बात की। उन्होंने कहा, ‘कई पार्टियां धन-बल की ताकत पर उम्मीदवार उतार रही हैं। इसके बाद भी मुझे भरोसा है कि जनता मेरे 11 साल के संघर्ष का मेहनताना देगी। मैं जीतता हूं तो छात्रों के साथ ही शिक्षकों की भी आवाज उठाऊंगा।’ ‘पुलिस की लाठियों से लगी चोट के चलते मेरी पूरा बदन टूटता है। कंधे, हाथ और घुटने में काफी दर्द रहता है। आंखों से दिखना भी कम हो रहा है। मैंने कंपटीशन की तैयारी छोड़कर छात्रों की लड़ाई लड़ी है। चाहता तो अपनी पत्नी को बीपीएससी से पास करवा लेता, लेकिन कभी समझौता नहीं किया।’ दिलीप को दरभंगा स्नातक सीट पर सीटिंग एमएलसी सर्वेश कुमार का सामना करना होगा। पिछले चुनाव में सर्वेश निर्दलीय जीते थे। इस बार भाजपा ने टिकट दिया है। आरजेडी से यहां अनिल कुमार झा उम्मीदवार हैं। दिलीप कुमार यादव जाति से आते हैं और कांग्रेस ने उनका साथ दिया तो मुसलान वोट भी उनकी तरफ आ सकता है। 2- अमित विक्रम; शिक्षक की नौकरी से बर्खास्त हुए, कांग्रेस से न मिला टिकट अमित विक्रम कोसी स्नातक क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले कांग्रेस की सदस्यता ली। कांग्रेस ने टिकट नहीं भी दिया तो निर्दलीय चुनाव लड़ने को तैयार हैं। अमित मुंगेर जिले के एक स्कूल में शिक्षक थे। शिक्षकों के सवाल उठाने की वजह से उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद और अधिक मुखर होकर शिक्षकों के सवाल उठाने लगे। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज में भी रह चुके हैं, लेकिन विवाद के बाद अलग हो गए। कोसी स्नातक सीट पर विक्रम को बीजेपी के सीटिंग एमएलसी डॉ. एन.के. यादव का सामना करना है। आरजेडी ने नितेश कुमार को उतारा है। जनसुराज से रजनीश रंजन उम्मीदवार हैं। कोसी क्षेत्र में सहरसा, मधेपुरा, सुपौल आदि जिले आते हैं। इस क्षेत्र में राजपूत और ब्राह्मण जाति के लोगों की राजनीतिक पैठ रही है। यादव भी काफी संख्या में हैं। विक्रम राजपूत जाति से आते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने सब लोगों के लिए 12 साल संघर्ष किया। अपनी नौकरी तक गंवायी। इसी कामकाज के आधार पर वोट मांग रहा हूं। यह स्नातक क्षेत्र है। इसके मतदाताओं में बड़ी संख्या में शिक्षक हैं। मैं सभी तरह के वोटर से वोट की अपील कर रहा हूं।’ 3-दिव्या ज्योति; लड़कियों की शिक्षा के लिए काम किया पटना शिक्षक सीट से दिव्या ज्योति जन सुराज पार्टी की प्रत्याशी हैं। पहले वह निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं। उनका मुकाबला बीजेपी के धाकड़ नेता प्रो. नवल किशोर यादव से है। नवल यादव 5 बार चुनाव जीत चुके हैं। पटना शिक्षक सीट से राजद ने डॉ. संजीव कुमार सिंह को उतारा है। संजीव परबत्ता से विधायक रह चुके हैं। उनके पिता आरएन सिंह मंत्री रह चुके हैं। जन सुराज ने पटना के बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को हराया। अब पार्टी पटना की एमएलसी सीट पर बीजेपी के 30 साल पुराने गढ़ में सेंधमारी करना चाहती हैं। दिव्या भूमिहार जाति से हैं। चाणक्या कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। चाणक्या फाउंडेशन की CEO हैं। बालिका शिक्षा और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए काम करती रही हैं। 4- डॉ. विमोहन कुमार; वैशाली कोविड सेंटर खोलकर बचाई जानें डॉ. विमोहन कुमार तिरहुत स्नातक सीट से जन सुराज के उम्मीदवार हैं। पेशे से डॉक्टर विमोहन आईसीयू विशेषज्ञ हैं। मुजफ्फरपुर के प्रशांत अस्पताल में लगभग 15 वर्षों तक सेवाएं दी हैं। सितंबर 2026 से जन सुराज के साथ अपनी राजनीति शुरू की। राजनीति में नया चेहरा हैं। उन्होंने केरल से एमबीबीएस की पढ़ाई की और कोलकाता में आगे का अध्ययन किया। कोविड के समय ‘वैशाली कोविड सेंटर’ खोला और लोगों की जान बचाई। अब वे तिरहुत स्नातक से चुनाव लड़कर राजनीति भी करना चाहते हैं। शिक्षा और रोजगार उनके एजेंडा में सबसे ऊपर है। भास्कर के साथ बातचीत में डॉ. विमोहन ने कहा, ‘यहां चतुष्कोणीय मुकाबला है, लेकिन तीन उम्मीदवार आपस में ही लड़ रहे हैं। मेरा एजेंडा डेवलपमेंट से जुड़ा है।’ ‘बाबा गरीब स्थान को गरीबनाथ धाम बनाना, इंडस्ट्री की स्थापना, रिसर्च और एआई कोर्स शुरू करना, पीएचसी लेवल पर हर जांच की सुविधा, यूनिफाइड एग्रीकल्चर, ट्रेड इंटरनेशनल बॉर्डर और स्टेट बॉर्डर, ये हमारा एजेंडा है।’ ‘जनसुराज की वजह से जेनजी बड़ी संख्या में मुझसे जुड़ रहे हैं। एनडीए से नाराज वोटर भी मेरी तरफ आ रहे हैं। कोरोना काल में सबसे कम रेट में प्राइवेट आईसीयू मैंने शुरू किया था।’ 5- रजनीश रंजन; 5 लाख का ब्याज युक्त कर्ज दिलाएंगे कोसी स्नातक सीट से जनसुराज ने युवा नेता रजनीश रंजन को उतारा है। युवा शिक्षा शास्त्री के रूप में उनकी पहचान है। सहरसा के रहने वाले हैं। रजनीश अपने वोटर से वादा कर रहे हैं कि चुनाव जीत गए तो 5 लाख रुपए ब्याज युक्त कर्ज और अनुदान दिलाएंगे। वह कोसी प्रमंडल और आसपास के इलाकों में ‘ नमस्ते कटिहार’ जनसंपर्क अभियान के जरिए वोटर से मिल रहे हैं। 6-अभिषेक झा; जदयू के प्रवक्ता का एक बार फिर बंशीधर ब्रजवासी से सामना तिरहुत स्नातक सीट से जदयू ने युवा नेता और प्रवक्ता अभिषेक झा को टिकट दिया है। अभिषेक कोचिंग संस्थान चलाते हैं और शिक्षक हैं। देवेश चंद्र ठाकुर इस सीट से जीतते रहे थे, लेकिन वे लोकसभा का चुनाव जीत गए थे इसलिए उपचुनाव कराया गया था और उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी बंशीधर ब्रजवासी चुनाव जीत गए, अभिषेक हार गए थे। एक बार फिर अभिषेक मैदान में हैं पूरी तैयारी के साथ।
7- बंशीधर ब्रजवासी; शिक्षक की नौकरी से बर्खास्त हुए, बने MLC बंशीधर ब्रजवासी शिक्षक रहे लेकिन उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। उसके बाद उन्होंने निर्दलीय ताल ठोंका और जीत हासिल की थी। अपनी परंपरागत सीट पर जेडीयू के देवेश चंद्र ठाकुर जेडीयू के अभिषेक झा को चुनाव नहीं जितवा पाए थे। एक बार फिर बंशीधर मैदान में हैं। युवा नेता के रुप में शिक्षकों और स्नातकों के बीच काफी लोकप्रिय नाम हैं बंशीधर ब्रजवासी। वाक पटु भी हैं। लेकिन इस बार उनको कड़ी चुनौती जेडीयू के अभिषेक झा के साथ ही जनसुराज के डॉ. विमोहन कुमार से भी मिल रही है।

