मंदसौर के शामगढ़ में मैट्रिमोनियल साइट के जरिए महिला से साढ़े 7 लाख रुपए की साइबर ठगी में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आया है। आरोपियों को पाकिस्तान में बैठे लोगों से निर्देश मिल रहे थे। पुलिस अब सबूतों के आधार पर इस एंगल से जांच कर रही है। दरअसल, 29 सितंबर को पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया था। इसमें 6 आरोपियों गिरफ्तार भी किया गया था। जांच आगे बढ़ने के बाद आरोपियों के पाकिस्तान कनेक्शन सामने आए। गिरोह का मुख्य सरगना बिहार निवासी टोनी कुमार है। वह ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पाकिस्तान भेज रहा था। पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, सिम कार्ड और क्रिप्टो वॉलेट की डिटेल खंगाल रही है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस राष्ट्रीय एजेंसियों का सहयोग लेगी। डीआईजी बोले- विदेशी लिंक की जांच जारी रतलाम रेंज डीआईजी निमिष अग्रवाल ने बताया कि मेट्रीमोनियल साइट पर पहचान के बाद गिफ्ट और कस्टम क्लीयरेंस के नाम पर ठगी की शिकायत मिली थी। जांच में सामने आया कि गिरोह अलग-अलग हिस्सों में बंटकर काम करता था। पकड़े गए आरोपियों का काम अलग-अलग खातों में आने वाली रकम निकालकर आगे पहुंचाना था। डीआईजी ने आगे बताया कि जांच और डिजिटल डाटा में पाकिस्तान एंगल सामने आया है। आरोपियों को निर्देश देने वाले लोगों के पाकिस्तान में होने की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि पैसा किन लोगों तक पहुंच रहा था। उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा था। इस संबंध में अभी जांच जारी है। विदेशी कनेक्शन आने के बाद राष्ट्रीय एजेंसियों की मदद ली जाएगी। मोबाइल नंबर- IP एड्रेस पाकिस्तान के मिले सीएसपी जितेंद्र भास्कर ने बताया कि आरोपियों के पाकिस्तान में बैठे लोगों से संपर्क की बात सामने आई है। वहीं से मिले निर्देशों के आधार पर स्थानीय लोगों के बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए जाते थे। उन खातों से रकम निकालकर आगे बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी। सीएसपी के अनुसार, आरोपियों ने संपर्क में लिए जिन मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया उनका IP एड्रेस भी पाकिस्तान से लिंक मिला है। खुद ठगी का शिकार हुआ, फिर मास्टरमाइंड बना जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी टोनी कुमार पहले खुद साइबर ठगी का शिकार हुआ था। इसके बाद वह इसी अपराध में शामिल हो गया। फिर धीरे-धीरे गिरोह का सरगना बन गया। आरोपी करीब 6 महीने में 11 करोड़ रुपए से अधिक के ट्रांजेक्शन से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा रहा है। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने 100 से ज्यादा साइबर घटनाओं को अंजाम दिया है। ठगी में आरोपियों ने 150 से अधिक म्यूल बैंक अकाउंट और सिम कार्ड का इस्तेमाल किया। 7.5 लाख की ठगी से खुला राज… शामगढ़ थाना क्षेत्र की युवती ने मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनाई थी। आरोपी ने खुद को NRI बताकर उससे संपर्क किया। इसके बाद नकली फोटो और फर्जी परिजनों के जरिए युवती का भरोसा जीता। शादी का झांसा दिया। आरोपी ने विदेश से महंगा गिफ्ट भेजने की बात कही। इसके बाद युवती को बताया कि गिफ्ट कस्टम विभाग में पकड़ा गया है। कस्टम ड्यूटी, सेल्स टैक्स और अन्य शुल्क के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रुपए जमा करवाए गए। अलग-अलग किश्तों में युवती ने साढ़े 7 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। ठगी का पता चलने के बाद युवती ने शामगढ़ थाने में शिकायत की। इसके बाद कार्रवाई शुरू हुई। पुलिस ने डेढ़ महीने तक जांच कर आरोपियों को पकड़ा। बैंक खातों में 11 करोड़ से ज्यादा का ट्रांजेक्शन आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में 6 महीने में 11 करोड़ रुपए से ज्यादा का ट्रांजेक्शन हुआ है। पुलिस को गिरोह में 100 से अधिक साइबर ठगों के जुड़े होने की जानकारी मिली है। आरोपियों से 22 एंड्रॉयड मोबाइल 150 से ज्यादा सिमकार्ड 5 एटीएम कार्ड जब्त किए गए हैं। अलग-अलग टीमों में बंटा था पूरा नेटवर्क जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क अलग-अलग हिस्सों में बंटा था। एक टीम म्यूल बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम उपलब्ध कराती थी। आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली, बिहार और भोपाल सहित अलग-अलग स्थानों से सिम और बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है। दूसरी टीम अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलकर खातों से रकम निकालती थी। बैंक अकाउंट फ्रीज होने के बाद आरोपी इस्तेमाल किए गए मोबाइल, सिम, एटीएम कार्ड फेंक देते थे। 10% रकम रखते, 90% पाकिस्तान भेजते मिली जानकारी के अनुसार आरोपी ठगी की रकम का 10% हिस्सा अपने पास रखते थे। बाकी 90% पाकिस्तान भेज देते थे। शुरुआती जांच में पाकिस्तान के कराची से जुड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आई है।

