दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने शनिवार को कहा कि “असहमति जताना अपराध नहीं है” और लोकतंत्र उन लोगों की आवाज दबाकर कायम नहीं रह सकता, जो उसकी रक्षा के लिए आगे आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में जो घटनाएं सामने आ रही हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर की जा रही दमनात्मक कार्रवाई उन्हें आपातकाल (1975-77) की उन दर्दनाक स्मृतियों की याद दिलाती है, जिसे उन्होंने खुद झेला था। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि दिल्ली और देश के अन्य सभी हिस्सों में हिरासत में लिए गए सभी राजनीतिक नेताओं, छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।
उन्होंने तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विस्तार के रूप में काम कर रही है और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस दमन कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया, “केंद्र सरकार को शांतिपूर्ण तरीके से अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई तुरंत बंद करनी चाहिए। असहमति जताना अपराध नहीं है और लोकतंत्र उन लोगों की आवाज दबाकर कायम नहीं रह सकता, जो उसकी रक्षा के लिए आगे आते हैं।”
उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा देना अनिवार्य है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, “उनके इस्तीफे के अलावा, निर्वाचन आयोग के संस्थागत ढांचे को जो भी नुकसान पहुंचाया गया है, उसकी भरपाई की जानी चाहिए और उसकी स्वतंत्रता तथा विश्वसनीयता बहाल की जानी चाहिए।

