चौमूं (जयपुर)। चौमूं उपखंड सहित आसपास के गांवों की उपजाऊ जमीन और किसानों की मेहनत ने सब्जियों की ऐसी पहचान बनाई है कि अब व्यापारी सीधे खेतों तक पहुंचकर खरीदारी कर रहे हैं। इससे किसानों को न केवल किराए की बचत हो रही है, बल्कि उन्हें मंडियों की तुलना में बेहतर भाव भी मिल रहा है। व्यापारियों के अनुसार प्रतिदिन लगभग 150 टन से अधिक सब्जियां खेतों से सीधे बाहर जा रही है।
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो इलाके के पानी में लवण की मात्रा कम होने और खेतों में रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद (गोबर) का उपयोग करने से चौमूं की सब्जियों की मांग अधिक रहती है। तहसील में लगभग 20 करोड़ की हर वर्ष 901.5 टन सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से गोभी, टमाटर, मिर्च, ककडी और बैंगन फसल की अधिक पैदावार शामिल हैं। किसान रामकरण पंचौली ने बताया कि पहले वे अपनी सब्जी जयपुर की मुहाना मंडी ले जाते थे, जहां कई बार सही भाव नहीं मिलता था। अब व्यापारी खुद गांव में आकर खरीद रहे हैं। उनकी मिर्च और टमाटर की मांग राज्य से बाहर तक है।

आधुनिक तकनीक अपना रहे
किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़कर नकदी फसलों की ओर रुख किया है। पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस तकनीक अपनाने से अब बेमौसम सब्जियां भी उगाई जा रही हैं। ड्रिप इरिगेशन से पानी की हर बूंद का सही इस्तेमाल हो रहा है। इससे उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आय में इजाफा हो रहा है।
इन राज्यों में बढ़ रही डिमांड
क्षेत्र में मंडी के अलावा खेतों से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, एमपी, गुजरात सहित प्रदेश के भीलवाड़ा, पाली, नागौर, जोधपुर और बीकानेर जिलों में तक सब्जियों पहुंच रही है। क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने से यहां से खेतों से तोड़ी गई सब्जियां दूसरे दिन तड़के चार बजे तक एमपी और जोधपुर की मंडियों में पहुंच जाती हैं। इससे ग्राहकों को ताजी सब्जियां मिलती हैं और खराब होने की संभावना कम रहती है।
रोजगार भी मिल रहा
व्यापारियों के सीधे खेतों से सब्जियों की खरीद करने से केवल किसान ही नहीं, बल्कि गांवों के ट्रक ड्राइवर, पल्लेदार, पैकिंग सामग्री बेचने वाले व्यापारी और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोग भी रोजगार पा रहे हैं। हालांकि किसानों का कहना है क्षेत्र में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज न होने से बंपर पैदावार के समय भाव गिर जाते है। मंडी प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
एक साल में सब्जियों का उत्पादन
गोभी: 4 लाख 50 हजार क्विंटल
मिर्च: 1 लाख क्विंटल
टमाटर: 2 लाख 88 हजार क्विंटल
ककड़ी: 13 हजार 500 क्विंटल
बैंगन: 50 हजार 705 क्विंटल


