मधेपुरा में शकरकंद की खेती किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन रही है। मंगलवार को बिहार की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला मंडल ने जिले के बेलारी क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने शकरकंद उत्पादक किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का आश्वासन दिया। मंत्री शीला मंडल ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकों और आम लोगों की समस्याओं के समाधान के बीच किसानों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने खेती-किसानी की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया। किसानों ने शकरकंद की खेती में बढ़ती उत्पादन लागत, बाजार उपलब्धता और फसल संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों से मंत्री को अवगत कराया। समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल करने का निर्देश किसानों की समस्याएं सुनने के बाद मंत्री ने जिला पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने और समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल करने का निर्देश दिया। उन्होंने किसानों के खेतों का निरीक्षण भी किया और वहां तैयार शकरकंद खरीदकर उनकी मेहनत की सराहना की। मंत्री के इस कदम से किसानों में उत्साह देखा गया। जिले में अब परंपरागत धान, गेहूं और मक्का की खेती के साथ शकरकंद की खेती का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है। कम लागत, कम सिंचाई की आवश्यकता और बेहतर बाजार मूल्य के कारण यह फसल किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। समस्याएं सुनने को एक सुखद अनुभव बताया शकरकंद को आंखों की रोशनी बढ़ाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने, पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक माना जाता है। यह बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए एक पौष्टिक आहार है। किसानों ने मंत्री के सीधे खेतों तक पहुंचने और उनकी समस्याएं सुनने को एक सुखद अनुभव बताया। किसानों ने उम्मीद जताई कि सरकार शकरकंद उत्पादकों के लिए विशेष योजनाएं, बेहतर बाजार व्यवस्था और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी। मंत्री शीला मंडल ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार कृषि आधारित आजीविका को मजबूत बनाने और किसानों को नई तकनीक व बेहतर बाजार से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि किसानों की समृद्धि ही प्रदेश के विकास की आधारशिला है। मधेपुरा में शकरकंद की खेती किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन रही है। मंगलवार को बिहार की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला मंडल ने जिले के बेलारी क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने शकरकंद उत्पादक किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का आश्वासन दिया। मंत्री शीला मंडल ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकों और आम लोगों की समस्याओं के समाधान के बीच किसानों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने खेती-किसानी की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया। किसानों ने शकरकंद की खेती में बढ़ती उत्पादन लागत, बाजार उपलब्धता और फसल संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों से मंत्री को अवगत कराया। समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल करने का निर्देश किसानों की समस्याएं सुनने के बाद मंत्री ने जिला पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने और समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल करने का निर्देश दिया। उन्होंने किसानों के खेतों का निरीक्षण भी किया और वहां तैयार शकरकंद खरीदकर उनकी मेहनत की सराहना की। मंत्री के इस कदम से किसानों में उत्साह देखा गया। जिले में अब परंपरागत धान, गेहूं और मक्का की खेती के साथ शकरकंद की खेती का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है। कम लागत, कम सिंचाई की आवश्यकता और बेहतर बाजार मूल्य के कारण यह फसल किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। समस्याएं सुनने को एक सुखद अनुभव बताया शकरकंद को आंखों की रोशनी बढ़ाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने, पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक माना जाता है। यह बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए एक पौष्टिक आहार है। किसानों ने मंत्री के सीधे खेतों तक पहुंचने और उनकी समस्याएं सुनने को एक सुखद अनुभव बताया। किसानों ने उम्मीद जताई कि सरकार शकरकंद उत्पादकों के लिए विशेष योजनाएं, बेहतर बाजार व्यवस्था और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी। मंत्री शीला मंडल ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार कृषि आधारित आजीविका को मजबूत बनाने और किसानों को नई तकनीक व बेहतर बाजार से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि किसानों की समृद्धि ही प्रदेश के विकास की आधारशिला है।


