भारत में बढ़ा माइक्रो ड्रामा का क्रेज, 2030 तक 24 हजार करोड़ रुपए का बाजार बनने की उम्मीद

भारत में बढ़ा माइक्रो ड्रामा का क्रेज, 2030 तक 24 हजार करोड़ रुपए का बाजार बनने की उम्मीद

Micro Drama Trends: देश में टीवी पर लंबे-लंबे सीरियल के बजाय स्मार्टफोन की स्क्रीन पर ‘माइक्रो ड्रामा’ देखने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। कैब का इंतजार करते, लिफ्ट से आते-जाते, चाय ब्रेक या सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हुए लोग एक से तीन मिनट के इन एपिसोड्स को देखना पसंद कर रहे हैं। यही वजह है कि स्ट्रीमिंग कंपनियां स्मार्टफोन की खड़ी (वर्टिकल) स्क्रीन को ध्यान में रखकर यह कंटेंट तैयार कर रही हैं।

वर्ष 2025 में भारतीयों ने स्क्रीन देखते हुए रिकॉर्ड 1.2 लाख करोड़ घंटे (यानी रोजाना औसतन ढाई घंटे) बिताए। इसी समय में से चंद मिनट चुराना इन माइक्रो ड्रामा का लक्ष्य है। बीते साल देश में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या 58.4 करोड़ थी, जिसमें अगले दो साल में 10 करोड़ का इजाफा होने की उम्मीद है। फिक्की के अनुमानों के मुताबिक, 50 फीसदी से अधिक की सालाना वृद्धि दर के साथ यह सेक्टर अगले पांच साल (2030 तक) में 24 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

प्रमुख प्लेटफॉर्म

1-जियोस्टार: अप्रैल 2026 में आऊपीएल के दौरान जियो हॉटस्टार पर 100 से ज्यादा माइक्रो ड्रामा के साथ ‘तड़का’ की शुरुआत की।

2-अमेजन: एमएक्स प्लेयर पर ‘फटाफट’ लेकर आया।

3-अन्य प्लेटफॉर्मः कुकू टीवी, स्टोरी टीवी और क्विक टीवी पहले से ही इस रेस में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

थ्रिल-कमबैक-लव और धोखा

इन ड्रामा की कहानियां मुख्य रूप से थ्रिल, कमबैक, ऑफिस लव, गरीब से अमीर बनना, पारिवारिक ड्रामा, धोखा और अलौकिक जगत जैसी थीम पर आधारित होती हैं। दो-तीन मिनट की इन कहानियों को करोड़ों दर्शक मिल रहे हैं। निर्माताओं के लिए ये शो एक प्रयोग की तरह हैं। यदि कहानी हिट होती है, तो उस पर आगे चलकर लंबा शो, फिल्म या एनिमेशन बनाया जा सकता है।

एआई और सोशल मीडिया का प्रभाव

माना जाता है कि माइक्रो ड्रामा की शुरुआत चीन में सोशल मीडिया ऐप के जरिए हुई थी। बीजिंग की कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं (जिनुआ डिआओ और मिंगजिआ शू) के अनुसार, एआई-जनरेटेड कंटेंट के कारण यह क्षेत्र तेजी से फैल रहा है। एआई की मदद से कंटेंट को स्थानीय स्तर पर ढालना बेहद आसान हो गया है। थाईलैंड के किंग मोंगकुट विश्वविद्यालय के शोधकर्ता जीरावत पोर्नसुप्पयाकुल का मानना है कि इस लोकप्रियता के पीछे सोशल मीडिया रील हैं, जहां आम यीजर शॉर्ट फॉर्मेट में कहानियां पेश करते थे। अब बड़ी कंपनियां इसी रीलनुमा फॉर्मेट को प्रोफेशनल तरीके से विकसित कर रही हैं।

कौन हैं इसके दर्शक?

विभिन्न सर्वे के अनुसार, भारत में टियर-2 और टियर-3 शहरों की विवाहित महिलाएं और युवा इन ड्रामा को सबसे ज्यादा देख रहे हैं। इसके अलावा, शहरों की तेज-तर्रार जीवनशैली में उलझे वे लोग भी इसके बड़े दर्शक हैं, जो व्यस्तता के बीच चंद मिनटों का शॉर्ट ब्रेक लेकर अपने दिमाग को राहत देना चाहते हैं।

आंकड़ों में स्थिति

वर्ष – बाजार भारतीय रुपए में

2025 – 650 करोड़

2026 – 1,000 करोड़

2028 – 2,300 करोड़

2030 – 3,800 करोड़

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