MGM मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के खिलाफ लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने NGS मशीन खरीदी मामले में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 14(3) के तहत आरोप पत्र जारी किया है। डॉ. घनघोरिया को 15 दिन के भीतर इसका जवाब देना होगा। विभाग ने उन पर कुल तीन आरोप लगाए हैं। पहले आरोप के मुताबिक संस्थान में वर्ष 2022 से उपलब्ध Illumina Mi-Seq Model NGS मशीन की वास्तविक स्थिति, उपयोगिता और उसे AMC व जरूरी consumables के जरिए दोबारा चालू किए जाने की संभावना का पर्याप्त परीक्षण किए बिना करीब 8 करोड़ रुपए की नई NGS मशीन खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। दूसरे आरोप में कहा गया है कि नई मशीन के लिए शासन को भेजे गए प्रस्ताव में MDRU योजना के तहत केंद्र से प्राप्त होने वाली करीब 4 करोड़ रुपए की शेष राशि की स्थिति का स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया और इसके बावजूद राज्य शासन से करीब 8 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि मांगी गई। तीसरे आरोप में इसे वित्तीय अनुशासन और सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के विपरीत बताया गया है। विभाग के अनुसार, इससे शासन पर अतिरिक्त और टाले जा सकने वाला वित्तीय दायित्व बनने की स्थिति बनी। 8 गवाहों की सूची भी जारी
आरोप पत्र के साथ गवाहों की सूची भी जारी की गई है। इसमें टीएस बघेल, डॉ. सचिन शर्मा, डॉ. मनीष पुरोहित, डॉ. शैलेश राय, डॉ. पूजा प्रपन्ना, डॉ. अक्षरादित्य शुक्ला, बायोमेडिकल इंजीनियर प्रेरक बंसोड़ और फार्मासिस्ट संजय उपाध्याय के नाम शामिल हैं। EOW में भी चल रही जांच
NGS मशीन खरीद मामले में EOW ने भी 2025 में डॉ. अरविंद घनघोरिया एवं अन्य के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। 5 अक्टूबर 2026 को EOW ने दोनों से करीब पांच घंटे पूछताछ की थी। मामले में शासन द्वारा गठित जांच समिति के पांच सदस्यों को भी नोटिस जारी कर बयान के लिए बुलाया गया है। हाईकोर्ट में PIL, 26 अक्टूबर को अगली सुनवाई
मामले के शिकायतकर्ता राकेश भाबर ने हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में डीन डॉ. घनघोरिया और टेंडर समिति की अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने शासन और EOW को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को निर्धारित है। इसमें टेंडर में करीब 30 प्रतिशत अधिक दर पर उपकरण का अनुबंध कराने समेत गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय हैं। स्वशासी संस्था की कर्मचारी होने के कारण उनके खिलाफ अलग से कार्यकारिणी समिति स्तर पर कार्रवाई की बात भी सामने आई है।

