सिद्धार्थनगर में अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही भीषण गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है। सोमवार को जिले का अधिकतम तापमान 41.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रहा। लू के थपेड़ों और तेज धूप के कारण जून जैसी तपिश महसूस की जा रही है। सुबह 9 बजे के बाद से ही लू का प्रकोप बढ़ने लगा, जिससे दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। जिला मुख्यालय समेत इटवा, बांसी, शोहरतगढ़, डुमरियागंज और नौगढ़ जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में भी रौनक कम दिखी। लोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। बाहर निकलने वाले लोग गमछे, टोपी और कपड़ों से अपना सिर व चेहरा ढके हुए नजर आए, जबकि महिलाएं छाते और दुपट्टे का सहारा ले रही थीं। तेज गर्मी का असर दैनिक जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। दोपहर के समय प्रमुख सड़कों, चौराहों और बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में आवाजाही काफी कम रही। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बाग-बगीचों, पेड़ों की छांव और ट्यूबवेलों के पास समय बिताते दिखे। कई स्थानों पर दोपहर में बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं। पंखे और कूलर बंद होने से उमस और गर्मी का दोहरा संकट महसूस किया गया। गर्मी से राहत पाने के लिए जिलेभर में गन्ने के रस, लस्सी, शर्बत, नींबू पानी और ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों पर भीड़ देखी जा रही है। सड़क किनारे मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा और खीरा की बिक्री में भी तेजी आई है। लोग लगातार ठंडे पेय पदार्थों और छायादार स्थानों का सहारा ले रहे हैं। भीषण गर्मी का असर स्कूली बच्चों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। स्कूलों का समय यथावत होने के कारण बच्चों को तपती धूप में घर लौटना पड़ रहा है। अभिभावकों में इसे लेकर चिंता बढ़ रही है। दोपहर के समय छोटे बच्चों को लू और डिहाइड्रेशन का खतरा भी बढ़ गया है। कई अभिभावकों ने स्कूलों के समय में बदलाव की मांग भी उठानी शुरू कर दी है।
पशुपालकों और किसानों पर भी गर्मी का असर पड़ने लगा है। नहरों और रजवाहों में पानी की कमी तथा सूखते जलस्रोतों के कारण पशुओं के लिए पानी और चारे की व्यवस्था चुनौती बनती जा रही है। खेतों में काम करने वाले किसानों को भी सुबह और शाम के समय ही काम निपटाना पड़ रहा है, क्योंकि दोपहर की गर्मी में खेतों में रुकना मुश्किल हो गया है। चिकित्सकों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी और लू के बीच बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। दोपहर में अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और शरीर को ढककर रखने की सलाह दी जा रही है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भी गर्मी से संबंधित समस्याओं वाले मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मौसम के बदलते मिजाज ने यह साफ संकेत दे दिया है कि इस बार गर्मी समय से पहले ही अपना प्रचंड रूप दिखाने लगी है।
अप्रैल में जून जैसी तपिश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यदि तापमान में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल पूरे सिद्धार्थनगर में लू, तपिश और बिजली संकट के बीच आम जनजीवन गर्मी की मार झेलने को मजबूर है।


