नालन्दा के अस्थावां में शनिवार को स्व. त्रिपुरी सिंह (उर्फ टीपी सिंह) और सुधीर सिंह का 25वां शहादत दिवस समारोहपूर्वक मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम का आयोजन टीपी सिंह विचारक मंच और उनके समर्थकों की ओर से किया जा रहा है। समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में बहुजनों के नेता वारसलीगंज के राजद विधायक के पति अशोक महतो बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे और अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। राजनीति से प्रेरित नहीं है आयोजन आयोजक सदस्य सोनू कुमार ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम किसी राजनीति से प्रेरित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को टीपी सिंह के संघर्षों और उनके कार्यों से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि टीपी सिंह एक ऐसे योद्धा थे, जिन्होंने हमेशा दबे-कुचले और बहुजन समाज के अधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद की। आयोजकों ने सभी गार्जियन और बड़े भाइयों से गिले-शिकवे भुलाकर कार्यक्रम में शामिल होने और श्रद्धांजलि देने की अपील की है। समाज के हर वर्ग के लिए किया काम सरमेरा के पूर्व जिला परिषद सदस्य बहादुर सिंह ने कहा कि टीपी सिंह ने जमीन से उठकर समाज में अपनी पहचान बनाई थी। वे दबे-कुचले लोगों के आदर्श थे। उन्होंने अस्थावां के किसी प्रमुख चौराहे पर टीपी सिंह की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। नीरपुर पंचायत के मुखिया सह जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार (उर्फ बिहारी सिंह) ने कहा कि 25 साल बाद किसी युवा (सोनू) ने उनकी याद में कार्यक्रम आयोजित करने का बीड़ा उठाया है, जो सराहनीय है। इसे राजनीतिक रूप देना गलत है। शिक्षक धनंजय कुमार ने कहा कि टीपी सिंह का नाम सुनते ही उनके समर्थकों का सीना चौड़ा हो जाता है; उन्होंने हर जाति-वर्ग के उत्थान के लिए काम किया। पंचायती कर सुलझाते थे विवाद कुंदन कुमार ने कहा कि टीपी सिंह सिर्फ एक जाति के नेता नहीं थे, बल्कि वे सभी जातियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। वे सामाजिक स्तर पर पंचायती कर विवादों का निपटारा करते थे। विशेष चौधरी ने पटना, नालंदा, शेखपुरा और नवादा जिले के लोगों से इस शहादत दिवस में शामिल होने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि टीपी सिंह में अपार शक्ति और नेतृत्व क्षमता थी। उन्होंने पंचायत चुनावों में कई लोगों को जीत दिलाई और हमेशा अन्याय के खिलाफ खड़े रहे। नालन्दा के अस्थावां में शनिवार को स्व. त्रिपुरी सिंह (उर्फ टीपी सिंह) और सुधीर सिंह का 25वां शहादत दिवस समारोहपूर्वक मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम का आयोजन टीपी सिंह विचारक मंच और उनके समर्थकों की ओर से किया जा रहा है। समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में बहुजनों के नेता वारसलीगंज के राजद विधायक के पति अशोक महतो बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे और अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। राजनीति से प्रेरित नहीं है आयोजन आयोजक सदस्य सोनू कुमार ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम किसी राजनीति से प्रेरित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को टीपी सिंह के संघर्षों और उनके कार्यों से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि टीपी सिंह एक ऐसे योद्धा थे, जिन्होंने हमेशा दबे-कुचले और बहुजन समाज के अधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद की। आयोजकों ने सभी गार्जियन और बड़े भाइयों से गिले-शिकवे भुलाकर कार्यक्रम में शामिल होने और श्रद्धांजलि देने की अपील की है। समाज के हर वर्ग के लिए किया काम सरमेरा के पूर्व जिला परिषद सदस्य बहादुर सिंह ने कहा कि टीपी सिंह ने जमीन से उठकर समाज में अपनी पहचान बनाई थी। वे दबे-कुचले लोगों के आदर्श थे। उन्होंने अस्थावां के किसी प्रमुख चौराहे पर टीपी सिंह की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। नीरपुर पंचायत के मुखिया सह जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार (उर्फ बिहारी सिंह) ने कहा कि 25 साल बाद किसी युवा (सोनू) ने उनकी याद में कार्यक्रम आयोजित करने का बीड़ा उठाया है, जो सराहनीय है। इसे राजनीतिक रूप देना गलत है। शिक्षक धनंजय कुमार ने कहा कि टीपी सिंह का नाम सुनते ही उनके समर्थकों का सीना चौड़ा हो जाता है; उन्होंने हर जाति-वर्ग के उत्थान के लिए काम किया। पंचायती कर सुलझाते थे विवाद कुंदन कुमार ने कहा कि टीपी सिंह सिर्फ एक जाति के नेता नहीं थे, बल्कि वे सभी जातियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। वे सामाजिक स्तर पर पंचायती कर विवादों का निपटारा करते थे। विशेष चौधरी ने पटना, नालंदा, शेखपुरा और नवादा जिले के लोगों से इस शहादत दिवस में शामिल होने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि टीपी सिंह में अपार शक्ति और नेतृत्व क्षमता थी। उन्होंने पंचायत चुनावों में कई लोगों को जीत दिलाई और हमेशा अन्याय के खिलाफ खड़े रहे।


