Maratha Reservation: फडणवीस और शिंदे का घमंड तोड़े बिना शांत नहीं बैठूंगा- मनोज जरांगे ने फिर दी चेतावनी

Maratha Reservation: फडणवीस और शिंदे का घमंड तोड़े बिना शांत नहीं बैठूंगा- मनोज जरांगे ने फिर दी चेतावनी

Manoj Jarange on Devendra Fadnavis, Eknath Shinde: मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील इन दिनों पश्चिम महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। सोलापुर के वैराग में मराठा समाज को संबोधित करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र सरकार और महायुति के प्रमुख नेताओं पर जमकर निशाना साधा। मनोज जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर बेहद आक्रामक बयान दिया। उन्होंने कहा, “आपके बच्चे संकट में हैं। अब मराठा समाज संकट में फंस गया है। देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे कितनी भी कोशिश कर लें, उनका घमंड तोड़े बिना मैं चुप नहीं बैठूंगा।”

‘एकनाथ शिंदे को मैं बहुत मानता हूं’

मराठा समुदाय से आने वाले शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे पर बोलते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। शिंदे ने ही मराठा समाज की पुरानी वंशावली संबंधी रिकॉर्ड खोजने के लिए समिति गठित की थी और करीब 58 लाख रिकॉर्ड खोजी गई थीं।

जरांगे ने कहा, “जिन एकनाथ शिंदे ने मराठों को 58 लाख रिकॉर्ड दिए, उन्हीं के मंत्री संजय शिरसाट ने शिंदे के आदेश पर इन रिकॉर्ड को रद्द करने की साजिश शुरू कर दी है।” बता दें कि हैदराबाद गजट, निजाम के दौर और ब्रिटिश प्रशासन से जुड़ा एक ऐतिहासिक दस्तावेज है जिसका हवाला मराठा आरक्षण के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ता कुनबी जाति के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का दर्जा पाने की मांग के समर्थन में देते हैं।

फडणवीस पर भी लगाया गंभीर आरोप

मराठा आरक्षण आंदोलन कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने भाजपा के वरिष्ठ नेता व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मुंबई में आंदोलन के बाद उन्होंने फडणवीस के खिलाफ एक भी गलत शब्द नहीं कहा था। इसके बावजूद उनके निर्देश पर मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मराठा समाज के कुनबी प्रमाणपत्र रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

कुनबी प्रमाणपत्र रद्द होने से नाराज हैं जरांगे

मराठवाड़ा में चार कुनबी प्रमाणपत्र रद्द किए जाने के बाद मनोज जरांगे पाटील सरकार के खिलाफ और अधिक आक्रामक नजर आ रहे हैं। पश्चिम महाराष्ट्र के दौरे के दौरान वह लगातार देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और सरकार के मंत्रियों पर निशाना साध रहे हैं।

वैराग की सभा में भी उन्होंने मराठा आरक्षण और कुनबी प्रमाणपत्र के मुद्दे को लेकर सरकार को सीधे तौर पर चेतावनी दी। उनके ताजा बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में गरमा सकता है। क्योंकि राज्य में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मराठा समुदाय के सदस्यों की संख्या लगभग 30 फीसदी है।

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