किशनगंज में डूबने से हुई मेनका की मौत:पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुआ खुलासा; SDPO बोले- लापरवाही पर होगी कार्रवाई

किशनगंज में डूबने से हुई मेनका की मौत:पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुआ खुलासा; SDPO बोले- लापरवाही पर होगी कार्रवाई

किशनगंज में 13 वर्षीय मेनका का पोस्टमॉर्टम के 2 दिन बाद रिपोर्ट बरामद हो गया है। एसडीपीओ खुसरो सिराज ने बताया कि रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट रूप से पानी में डूबना बताया गया है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्राकृतिक मौत का मामला प्रतीत होता है। एसडीपीओ ने आगे बताया कि बच्ची के लापता होने के बाद पुलिस द्वारा बरती गई किसी भी प्रकार की लापरवाही की जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। परिजन अब भी घटना की विस्तृत जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। घटना सोमवार शाम की है, मझिया पुल के पास नदी से शव बरामद हुआ था। स्थानीय लोगों की सूचना पर टाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव की पहचान लापता मेनका कुमारी के रूप में हुई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी। एफएसएल टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की सदर अस्पताल पहुंचने पर तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए अस्पताल प्रशासन ने पोस्टमार्टम मंगलवार सुबह कराने की बात कही। इससे नाराज परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर जांच में लापरवाही का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इस दौरान कुछ लोगों की पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम अनिकेत कुमार और एसडीपीओ-1 खुसरो सिराज पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीएम अनिकेत कुमार ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद प्रशासन की पहल पर सोमवार देर रात ही शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। वहीं मंगलवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया। 4 बार लगाना पर रहा कार्यालयों का चक्कर वहीं, इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों सहित कई जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा आवेदन दिए जाने पर प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट समन्वय नहीं किया जाता। आरोप है कि आवेदन स्वीकार करने के लिए पीड़ित पक्ष को तीन से चार बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर विभिन्न प्रकार के अभियान चलाए जा रहे हैं। कई लोग बच्ची को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए अधिकारियों की आलोचना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर “जस्टिस फॉर मेनका” जैसे अभियान भी चलाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस प्रशासन ने समय रहते आवेदन स्वीकार कर त्वरित जांच शुरू की होती, तो शायद इस प्रकार की अनहोनी को रोका जा सकता था। लोगों का यह भी दावा है कि पिछले तीन महीनों में नाबालिग लड़के-लड़कियों के लापता होने के करीब 18 मामले सामने आए हैं, लेकिन इन मामलों में प्रशासन की उपलब्धियां बेहद सीमित रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किशनगंज में 13 वर्षीय मेनका का पोस्टमॉर्टम के 2 दिन बाद रिपोर्ट बरामद हो गया है। एसडीपीओ खुसरो सिराज ने बताया कि रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट रूप से पानी में डूबना बताया गया है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्राकृतिक मौत का मामला प्रतीत होता है। एसडीपीओ ने आगे बताया कि बच्ची के लापता होने के बाद पुलिस द्वारा बरती गई किसी भी प्रकार की लापरवाही की जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। परिजन अब भी घटना की विस्तृत जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। घटना सोमवार शाम की है, मझिया पुल के पास नदी से शव बरामद हुआ था। स्थानीय लोगों की सूचना पर टाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव की पहचान लापता मेनका कुमारी के रूप में हुई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी। एफएसएल टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की सदर अस्पताल पहुंचने पर तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए अस्पताल प्रशासन ने पोस्टमार्टम मंगलवार सुबह कराने की बात कही। इससे नाराज परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर जांच में लापरवाही का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इस दौरान कुछ लोगों की पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम अनिकेत कुमार और एसडीपीओ-1 खुसरो सिराज पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीएम अनिकेत कुमार ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद प्रशासन की पहल पर सोमवार देर रात ही शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। वहीं मंगलवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया। 4 बार लगाना पर रहा कार्यालयों का चक्कर वहीं, इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों सहित कई जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा आवेदन दिए जाने पर प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट समन्वय नहीं किया जाता। आरोप है कि आवेदन स्वीकार करने के लिए पीड़ित पक्ष को तीन से चार बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर विभिन्न प्रकार के अभियान चलाए जा रहे हैं। कई लोग बच्ची को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए अधिकारियों की आलोचना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर “जस्टिस फॉर मेनका” जैसे अभियान भी चलाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस प्रशासन ने समय रहते आवेदन स्वीकार कर त्वरित जांच शुरू की होती, तो शायद इस प्रकार की अनहोनी को रोका जा सकता था। लोगों का यह भी दावा है कि पिछले तीन महीनों में नाबालिग लड़के-लड़कियों के लापता होने के करीब 18 मामले सामने आए हैं, लेकिन इन मामलों में प्रशासन की उपलब्धियां बेहद सीमित रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।  

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