ओड़िशा के पुरी की विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा की तरह अब राजस्थान के अलवर के ऐतिहासिक जगन्नाथजी मेले को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है। अलवर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को ग्लोबल मैप पर लाने के लिए राष्ट्रपति कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद प्रदेश का प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है। राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सचिव ने इस संबंध में राजस्थान के मुख्य सचिव को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। मुख्य सचिव स्तर से निर्देश मिलने के बाद अब देवस्थान विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में कार्ययोजना बनाने के लिए अवगत करा दिया गया है। संस्था ‘महामाया’ की चिट्ठी से बनी बात दरअसल, अलवर की संस्था ‘ महामाया अलवर’ ने राष्ट्रपति को एक पत्र भेजा था। पत्र में बताया गया था कि अलवर के जगन्नाथ मेले में अपार पर्यटन और धार्मिक क्षमताएं हैं। मेले के दौरान पूरे शहर में उत्सव का माहौल रहता है और हर दिन हजारों-लाखों लोग इसमें शामिल होते हैं। अगर सरकार इच्छाशक्ति दिखाए और सही स्तर पर प्रयास किए जाएं, तो इसे पुरी की रथयात्रा की तरह अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है। संस्था के प्रतिनिधि शंकर सिंह राजपूत ने बताया कि इसी पत्र का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रपति कार्यालय ने राजस्थान सरकार को कार्रवाई के लिए लिखा है। सरकार के स्तर पर के मेले के दौरान खास सौंदर्यीकरण कराया जाए। देश दुनिया में जानकारी भेजी जाए। बाहर के टूरिस्ट को बुलाया जाए। यह सब होने पर मेले की प्रसिद्धी दुनिया भर में बढ़ती जाएगी। जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकेंगे। इस बार 12 से 29 जुलाई तक मचेगी धूम, जानिए क्यों खास है यह मेला: अलवर का जगन्नाथ मेला अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है। इस बार मेला 12 जुलाई से शुरू होकर 29 जुलाई तक चलेगा। मेले के दौरान 2 बार भगवान की भव्य शोभायात्रा (रथयात्रा) निकाली जाती है, जो पूरे शहर का भ्रमण करती है। रात 3 बजे तक उमड़ती है भीड़: भगवान के दर्शनों के लिए दीवानगी ऐसी होती है कि लाखों की संख्या में श्रद्धालु रात के 3-3 बजे तक सड़कों और मंदिरों में डटे रहते हैं। मिनी पुरी का अहसास: मेले के दिनों में पूरा अलवर शहर ‘जगन्नाथमय’ हो जाता है। व्यापारिक और सांस्कृतिक रूप से भी यह अलवर का सबसे बड़ा आयोजन है। अब आगे क्या? राष्ट्रपति कार्यालय से पत्र आने के बाद देवस्थान विभाग अब मेले के इंफ्रास्ट्रक्चर, देश-विदेश में इसके प्रचार-प्रसार और वीआईपी रूट व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया खाका तैयार कर सकता है। अगर इसे केंद्रीय पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाता है, तो आने वाले दिनों में अलवर में विदेशी पर्यटकों की आवक में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है। यहां टूरिस्ट का आकर्षित किया जा सकता है। वैसे भी अलवर में विश्व प्रसिद्ध सरिस्का अभ्याण्य है।


