Mahadev App: सौरभ चंद्राकर पर ED का एक्शन तेज, भगोड़ा घोषित करने रायपुर कोर्ट में लगाई अर्जी

Mahadev App: सौरभ चंद्राकर पर ED का एक्शन तेज, भगोड़ा घोषित करने रायपुर कोर्ट में लगाई अर्जी

(नीलाभ श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली/रायपुर, दो नवंबर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में एक अर्जी दाखिल की है, जिसमें महादेव सट्टेबाजी ऐप के प्रवर्तक सौरभ चंद्राकर को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित करने और उसकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया में “तेजी लाने” का अनुरोध किया गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, ईडी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर चंद्राकर का वानुअतु का पासपोर्ट रद्द करने की मांग भी की है।

आरोप है कि उसने यह पासपोर्ट मई 2022 में भारत छोड़ने के तुरंत बाद हासिल किया था। चंद्राकर को रविवार को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ईडी ने नवंबर 2024 में रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में एक अर्जी दायर की थी, जिसमें चंद्रकार और महादेव सट्टेबाजी ऐप के सह-प्रवर्तक रवि उप्पल को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम’ (एफईओए) के तहत ऍ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित करने का अनुरोध किया गया था।

उन्होंने बताया कि चूंकि, इस मामले में सुनवाई कई बार टल चुकी है, इसलिए जांच एजेंसी ने अक्टूबर में उसी विशेष पीएमएलए अदालत में एक नयी अर्जी दाखिल की, जिसमें दोनों आरोपियों के खिलाफ जारी मुकदमे में “तत्काल सुनवाई और जल्द निपटारा” सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, विशेष अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए पांच दिसंबर की तारीख तय की है। उन्होंने कहा कि चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत वापस लाए जाने के बावजूद उसके खिलाफ ईडी की एफईओए याचिका वैध है; क्योंकि उसने खुद “कानून के सामने आत्मसमर्पण” नहीं किया है, बल्कि एजेंसियों के प्रयासों से उसे जांच का सामना करने के लिए लाया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि एक बार जब किसी व्यक्ति को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित कर दिया जाता है, तो ईडी को उसकी मुख्य और संबंधित संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिल जाता है। उन्होंने बताया कि ईडी ने चंद्राकर के खिलाफ दर्ज मामले में कुल 1,700 करोड़ रुपये (बाजार मूल्य) की संपत्तियां कुर्क की हैं। यह भी कहा जा रहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने भारत और विदेश में चंद्राकर की कई संपत्तियों का पता लगाया है, जिन्हें एफईओए के तहत जब्त किया जाएगा।

इनमें से कई संपत्तियां बेनामी बताई जा रही हैं। केंद्र सरकार 2018 में एफईओए लेकर आई थी, ताकि कम से कम 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के बाद कानून से बचने के लिए भारत से भाग जाने वाले लोगों को न्याय के दायरे में लाया जा सके। इससे पहले, कारोबारी विजय माल्या और नीरव मोदी को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किया जा चुका है।

अधिकारियों के अनुसार, ईडी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर चंद्रकार का वानुअतु का पासपोर्ट रद्द करने की मांग की है। बताया जा रहा है कि चंद्रकार ने यह पासपोर्ट 16 फरवरी 2022 को भारत से दुबई जाने के कुछ समय बाद मई 2022 में हासिल किया था। अधिकारियों ने कहा कि भारत दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देता है और ईडी ने पाया है कि चंद्राकर जन्म से भारतीय नागरिक है तथा उसने भारतीय पासपोर्ट रखते हुए ही वानुअतु का पासपोर्ट हासिल किया था।

ईडी ने चंद्राकर को महादेव सट्टेबाजी ऐप का “मुख्य प्रवर्तक, रकम इकट्ठा करने वाला और लाभार्थी” बताया है तथा अक्टूबर 2023 में दाखिल आरोपपत्र में उसे आरोपी नंबर-1 के तौर पर नामजद किया है। ईडी का दावा है कि महादेव ऐप के संचालकों की छत्तीसगढ़ के बड़े नेताओं और नौकरशाहों के साथ “सांठगांठ” थी। अधिकारियों ने बताया कि दिसंबर 2020 तक चंद्रकार छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई शहर में अपने परिवार की कंपनी की ओर से संचालित जूस की दुकान में काम करता था, लेकिन अगले दो वर्षों में उसने दुबई से हजारों कर्मचारियों के साथ सट्टेबाजी का कारोबार शुरू कर दिया।

ईडी महादेव ऐप के सह-प्रवर्तक रवि उप्पल के प्रत्यर्पण के लिए भी अनुरोध भेज रही है, जिसके दुबई में होने का अंदेशा है। एजेंसी ने उप्पल के खिलाफ एफईओए संबंधी कार्यवाही में तेजी लाने और उसके वानुअतु के पासपोर्ट को रद्द करने की भी मांग की है। ईडी इस मामले के एक अन्य आरोपी और कथित ‘फंड मैनेजर’ विकास छपरिया के प्रत्यर्पण के लिए भी अनुरोध भेज रही है, जिसके दुबई में होने का अंदेशा है।

जांच एजेंसी ने बताया कि महादे‍व ऐप का संचालन 2019-20 में शुरू हुआ था। उसने बताया कि ऐप के उपयोगकर्ताओं की संख्या 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान “तेजी से” बढ़ी और इसमें लगातार वृद्धि होती गई। ईडी के मुताबिक, हजारों पैनल के जरिये संचालित महादेव सट्टेबाजी ऐप ने 2019 से कथित तौर पर 80,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।

इसके जरिये क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, ताश और अन्य खेलों में अवैध रूप से सट्टा लगवाया जाता था। ईडी के अनुसार, संबंधित वेबसाइट को इस तरह से सेट किया गया था कि इनसे भारी मुनाफा कमाया जा सके और जो खिलाड़ी बड़ी रकम जीतता था, उसकी उपयोगकर्ता आईडी ब्लॉक कर दी जाती थी। ईडी ने छत्तीसगढ़ पुलिस और सीबीआई की ओर से दर्ज प्राथमिकी तथा आरोपपत्र के आधार पर अक्टूबर 2022 में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था।

जांच एजेंसी ने इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, 1,885 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है, अपने छह आरोपपत्र में 116 आरोपियों को नामजद किया है और देशभर में 190 ठिकानों पर तलाशी ली है।

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