अरवल मोड़ पर मगही चौपाल का आयोजन:मगही को मातृभाषा का दर्जा देने की मांग, अष्टम अनुसूची में शामिल करने की अपील

अरवल मोड़ पर मगही चौपाल का आयोजन:मगही को मातृभाषा का दर्जा देने की मांग, अष्टम अनुसूची में शामिल करने की अपील

जहानाबाद शहर के अरवल मोड़ पर रविवार को मगही भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल कराने और जनगणना में मातृभाषा के रूप में दर्ज कराने की मांग को लेकर एक चौपाल का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। चौपाल में वक्ताओं ने मगही को केवल एक बोली नहीं, बल्कि पूरे मगध क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बताया। उन्होंने लोगों से अपील की कि जनगणना के दौरान अपनी मातृभाषा के रूप में मगही का उल्लेख करें, ताकि इसकी वास्तविक स्थिति और महत्व सामने आ सके। मुख्य वक्ता प्रख्यात कवि सुधाकर राजेंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है और इसके बिना संस्कृति अधूरी है। उन्होंने मगही को उचित सम्मान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। कवि विश्वजीत कुमार अलबेला ने अपनी कविताओं के माध्यम से उपस्थित लोगों को भाषा के प्रति जागरूक किया। उन्होंने मगही की समृद्ध परंपरा और उसके महत्व को रेखांकित किया। इस कार्यक्रम में शोधकर्ता सन्नी कुमार कश्यप, अजय विश्वकर्मा, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी संजय कुमार तथा गोल्ड मेडलिस्ट कमलेश कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक गौतम पाराशर के नेतृत्व में आयोजित इस चौपाल के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि मगही भाषा को अष्टम अनुसूची में शामिल कराने का अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रखा जाएगा। जहानाबाद शहर के अरवल मोड़ पर रविवार को मगही भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल कराने और जनगणना में मातृभाषा के रूप में दर्ज कराने की मांग को लेकर एक चौपाल का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। चौपाल में वक्ताओं ने मगही को केवल एक बोली नहीं, बल्कि पूरे मगध क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बताया। उन्होंने लोगों से अपील की कि जनगणना के दौरान अपनी मातृभाषा के रूप में मगही का उल्लेख करें, ताकि इसकी वास्तविक स्थिति और महत्व सामने आ सके। मुख्य वक्ता प्रख्यात कवि सुधाकर राजेंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है और इसके बिना संस्कृति अधूरी है। उन्होंने मगही को उचित सम्मान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। कवि विश्वजीत कुमार अलबेला ने अपनी कविताओं के माध्यम से उपस्थित लोगों को भाषा के प्रति जागरूक किया। उन्होंने मगही की समृद्ध परंपरा और उसके महत्व को रेखांकित किया। इस कार्यक्रम में शोधकर्ता सन्नी कुमार कश्यप, अजय विश्वकर्मा, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी संजय कुमार तथा गोल्ड मेडलिस्ट कमलेश कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक गौतम पाराशर के नेतृत्व में आयोजित इस चौपाल के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि मगही भाषा को अष्टम अनुसूची में शामिल कराने का अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रखा जाएगा।  

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