पत्नी को जिंदा जलाकर मारने पर पति-देवर को उम्रकैद:5 लाख दहेज की मांग को लेकर करते थे प्रताड़ित, कोर्ट ने 17-17 हजार का जुर्माना लगाया

पत्नी को जिंदा जलाकर मारने पर पति-देवर को उम्रकैद:5 लाख दहेज की मांग को लेकर करते थे प्रताड़ित, कोर्ट ने 17-17 हजार का जुर्माना लगाया

अंबेडकरनगर के अहिरौली क्षेत्र में विवाहिता को जिंदा जलाकर हत्या करने के करीब 10 साल पुराने मामले में अदालत ने पति और देवर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राम विलास सिंह की अदालत ने दोनों दोषियों पर 17-17 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। मामला वर्ष 2016 का है। रोहनापारा गांव निवासी प्रेमशंकर राजभर ने अहिरौली थाने में अपनी बहन मीरा की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में कहा गया था कि मीरा की शादी करीब 10 वर्ष पहले केवारी श्रीपाल गांव निवासी अमरनाथ राजभर से हुई थी। दहेज और संतान न होने पर करते थे प्रताड़ित अभियोजन के अनुसार, शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष मीरा पर पांच लाख रुपए नकद लाने का दबाव बनाता था। दहेज की मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित किया जाता था। संतान न होने को लेकर भी उसे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था। पति, ससुर और देवर पर लगाया था हत्या का आरोप वादी पक्ष का आरोप था कि 6 फरवरी 2016 की रात पति अमरनाथ राजभर, ससुर राधेश्याम और देवर जगन्नाथ राजभर ने मिलकर मीरा को जिंदा जलाकर मार डाला। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सात गवाहों के बयान बने अहम साक्ष्य मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन ने हत्या और क्रूरता के आरोप साबित करने का प्रयास किया। वहीं बचाव पक्ष ने इसे आत्महत्या का मामला बताते हुए दलील दी कि मृतका मानसिक अवसाद से ग्रस्त थी और उसने खुद यह कदम उठाया था। अदालत ने पति और देवर को माना दोषी सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पति अमरनाथ राजभर और देवर जगन्नाथ राजभर को हत्या और क्रूरता का दोषी करार दिया। इसके बाद दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और 17-17 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। सह-आरोपी ससुर की हो चुकी है मौत मामले में नामजद सह-आरोपी राधेश्याम के खिलाफ सुनवाई के दौरान उनकी मृत्यु हो जाने के कारण न्यायालय ने उनके विरुद्ध वाद समाप्त कर दिया था।

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