किशनगंज सदर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन से EOU आय से अधिक संपत्ति मामले में पूछताछ करेगी। उन्हें नोटिस जारी कर पटना स्थित ईओयू कार्यालय में पेश होने के लिए बुलाया जाएगा। ईओयू सूत्रों के अनुसार, आरोपित थानाध्यक्ष को अगले हफ्ते सोमवार को उपस्थित होने का नोटिस दिया जा सकता है। पूछताछ के दौरान, अभिषेक कुमार रंजन को अपने पक्ष में बयान और दस्तावेज पेश करने का अवसर मिलेगा। उन पर अपने 17 साल के सेवाकाल में लगभग 50 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियां बनाने का आरोप है। पूर्व SDPO गौतम कुमार के थे राजदार अभिषेक रंजन निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार पर दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच के दौरान ईओयू के निशाने पर आए थे। जांच में सामने आया कि अभिषेक निलंबित एसडीपीओ के करीबी थे और उनके स्थानीय बालू माफिया, एंट्री माफिया, शराब माफिया व तस्करों से गहरे संबंध थे। आरोप है कि वे इन अवैध व्यवसायों को संरक्षण देने के एवज में नियमित रूप से बड़ी कमीशन राशि प्राप्त करते थे। इस राशि का निवेश जमीन, मकान सहित अन्य नामी-बेनामी संपत्तियां जमा करने में किया जाता था। थानाध्यक्ष की नामी-बेनामी संपत्तियों की मिली जानकारी ईओयू को मुजफ्फरपुर के कांटी सहित पश्चिम बंगाल, दिल्ली एनसीआर और कई अन्य जगहों पर थानाध्यक्ष की नामी-बेनामी संपत्तियों की जानकारी मिली है। अलग-अलग टीमों के माध्यम से इन संपत्तियों का सत्यापन किया जा रहा है। सिलीगुड़ी स्थित फ्लैट से लेकर दार्जिलिंग रोड में खरीदी गई जमीन के भुगतान स्रोतों की भी जांच चल रही है। ईओयू की एक टीम किशनगंज थानेदार के पश्चिम चंपारण में सिकटा स्थित ससुराल भी पहुंची थी। हालांकि, छापेमारी की भनक लग जाने के कारण वहां से अधिक कुछ बरामद नहीं हो सका। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर चर्चा है कि इतनी बड़ी छापेमारी के बावजूद आर्थिक अपराध इकाई की टीम को कोई नकदी, सोना या चांदी हाथ नहीं लगा। लोगों का मानना है कि एसडीपीओ गौतम कुमार के छापेमारी के बाद थाना अध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन अपनी सुरक्षा के लिए किसी अन्य स्थानों पर पैसे और सोना चांदी को रखे हुए हैं । किशनगंज सदर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन से EOU आय से अधिक संपत्ति मामले में पूछताछ करेगी। उन्हें नोटिस जारी कर पटना स्थित ईओयू कार्यालय में पेश होने के लिए बुलाया जाएगा। ईओयू सूत्रों के अनुसार, आरोपित थानाध्यक्ष को अगले हफ्ते सोमवार को उपस्थित होने का नोटिस दिया जा सकता है। पूछताछ के दौरान, अभिषेक कुमार रंजन को अपने पक्ष में बयान और दस्तावेज पेश करने का अवसर मिलेगा। उन पर अपने 17 साल के सेवाकाल में लगभग 50 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियां बनाने का आरोप है। पूर्व SDPO गौतम कुमार के थे राजदार अभिषेक रंजन निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार पर दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच के दौरान ईओयू के निशाने पर आए थे। जांच में सामने आया कि अभिषेक निलंबित एसडीपीओ के करीबी थे और उनके स्थानीय बालू माफिया, एंट्री माफिया, शराब माफिया व तस्करों से गहरे संबंध थे। आरोप है कि वे इन अवैध व्यवसायों को संरक्षण देने के एवज में नियमित रूप से बड़ी कमीशन राशि प्राप्त करते थे। इस राशि का निवेश जमीन, मकान सहित अन्य नामी-बेनामी संपत्तियां जमा करने में किया जाता था। थानाध्यक्ष की नामी-बेनामी संपत्तियों की मिली जानकारी ईओयू को मुजफ्फरपुर के कांटी सहित पश्चिम बंगाल, दिल्ली एनसीआर और कई अन्य जगहों पर थानाध्यक्ष की नामी-बेनामी संपत्तियों की जानकारी मिली है। अलग-अलग टीमों के माध्यम से इन संपत्तियों का सत्यापन किया जा रहा है। सिलीगुड़ी स्थित फ्लैट से लेकर दार्जिलिंग रोड में खरीदी गई जमीन के भुगतान स्रोतों की भी जांच चल रही है। ईओयू की एक टीम किशनगंज थानेदार के पश्चिम चंपारण में सिकटा स्थित ससुराल भी पहुंची थी। हालांकि, छापेमारी की भनक लग जाने के कारण वहां से अधिक कुछ बरामद नहीं हो सका। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर चर्चा है कि इतनी बड़ी छापेमारी के बावजूद आर्थिक अपराध इकाई की टीम को कोई नकदी, सोना या चांदी हाथ नहीं लगा। लोगों का मानना है कि एसडीपीओ गौतम कुमार के छापेमारी के बाद थाना अध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन अपनी सुरक्षा के लिए किसी अन्य स्थानों पर पैसे और सोना चांदी को रखे हुए हैं ।


