कानपुर के व्यस्त घंटाघर इलाके में स्थित जय सियाराम होटल में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक्वेरियम में संरक्षित श्रेणी के दो कछुए मिलने की सूचना सामने आई। जैसे ही यह खबर फैली, स्थानीय लोगों की भीड़ होटल के बाहर जमा हो गई और मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। बताया जा रहा है कि कछुए लंबे समय से होटल के एक्वेरियम में रखे गए थे। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे परिसर का निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम ने पाया कि कछुए न केवल संरक्षित प्रजाति के हैं, बल्कि उन्हें बिना किसी वैध अनुमति के रखा गया था, जो कानून का सीधा उल्लंघन है।
सूचना पर हरकत में आया वन विभाग, मौके पर की छापेमारी
वन दरोगा राम बाबू दोहरे के मुताबिक, विभाग को एक युवक द्वारा गोपनीय सूचना दी गई थी कि होटल में अवैध रूप से कछुओं को पाला जा रहा है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग की टीम ने बिना देरी किए छापेमारी की योजना बनाई और तुरंत जय सियाराम होटल पहुंच गई। टीम ने जब एक्वेरियम की जांच की तो उसमें दो कछुए तैरते मिले, जिन्हें देखकर अधिकारियों ने पुष्टि की कि ये संरक्षित श्रेणी में आते हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत ऐसे जीवों को रखना, खरीदना या बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बाद टीम ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए दोनों कछुओं को अपने कब्जे में ले लिया और आगे की प्रक्रिया शुरू की।
कार्रवाई के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर फरार हुआ मालिक
छापेमारी के दौरान होटल में अचानक भीड़ बढ़ने लगी, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए होटल मालिक पंकज गुप्ता मौके से फरार हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही टीम ने कछुओं को जब्त करना शुरू किया, मालिक वहां से चुपचाप निकल गया। वन विभाग और पुलिस की टीम ने आसपास के क्षेत्रों में उसकी तलाश शुरू की, लेकिन वह हाथ नहीं लग सका। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की पहचान स्पष्ट है और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है और संभावित ठिकानों पर छानबीन जारी है।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, कछुओं को सुरक्षित सौंपा गया
कलक्टरगंज थानाध्यक्ष विनय तिवारी ने जानकारी दी कि वन दरोगा की तहरीर के आधार पर होटल मालिक के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। वहीं, बरामद किए गए दोनों कछुओं को वन विभाग की टीम को सुरक्षित रूप से सौंप दिया गया है। विभाग अब उनकी देखरेख और प्राकृतिक वातावरण में पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करेगा, ताकि उन्हें किसी तरह का नुकसान न हो और वे सुरक्षित रह सकें।
वन्यजीव संरक्षण को लेकर सख्ती जरूरी, बढ़ाई जाएगी निगरानी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से यह स्पष्ट होता है कि लोगों में अब भी वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर जागरूकता की कमी है। संरक्षित प्रजातियों को घरों, होटलों या अन्य स्थानों पर रखना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इससे जैव विविधता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आगे भी इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आम लोगों से अपील की गई है कि यदि कहीं भी वन्यजीवों को अवैध रूप से रखा या बेचा जाता दिखे, तो इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।


