बेगूसराय में काबर-बगरस नहर की उड़ाही होगी:बांधों को ऊंचा और मजबूत किया जाएगा, पेड़ भी लगाने की है योजना

बेगूसराय में काबर-बगरस नहर की उड़ाही होगी:बांधों को ऊंचा और मजबूत किया जाएगा, पेड़ भी लगाने की है योजना

काबर झील क्षेत्र में काबर-बगरस नहर के अस्तित्व को लेकर स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बैठक की है। जयमंगलागढ़ स्थित नहर घाट पर काबर नहर नवजीवन अभियान के तहत महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें नहर के संरक्षण, पुनरुद्धार और क्षेत्र के विकास को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार और लेखक महेश भारती ने की। अध्यक्षता करते हुए महेश भारती ने नहर के ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला। बैठक में उपस्थित लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि काबर-बगरस नहर की नियमित उड़ाही और सफाई व्यवस्था कराई जाएगी। नहर में साल भर पानी का सतत प्रवाह और जलस्तर बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। सफाई से निकली मिट्टी से दोनों तरफ के बांधों को ऊंचा और मजबूत किया जाएगा। इसके बाद बांध पर पेड़ लगाए जाएंगे। बैठक में अजय पाठक, आर्यन राज, धर्मेंद्र यादव, सरबू सदा एवं संजय सहनी सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता, किसान एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे। सभी लोगों ने एकजुट होकर काबर-बगरस नहर के संरक्षण और इसे नया जीवन देने के लिए सामूहिक रूप से संघर्ष और प्रयास करने का दृढ़ संकल्प लिया। नहर 8 किमी लंबी है, 15 लाख बनाने में लगे थे महेश भारती ने बताया कि इस नहर का निर्माण 1951 से 1956 के बीच कराया गया था। उस दौर में लगभग 15 लाख रुपए की लागत से बनी यह नहर करीब साढ़े आठ किलोमीटर लंबी और 11 फीट गहरी है। यह नहर आज सरकारी उपेक्षा का शिकार है। भारी अतिक्रमण और रखरखाव के अभाव के कारण दम तोड़ रही है। जगह-जगह बाड़ लगाकर इसके जल प्रवाह और जल निकासी को पूरी तरह बाधित कर दिया गया है। नहर में जलप्रवाह बनाए रखने के लिए सुधार बेहद जरूरी है। काबर-बगरस नहर से तुरंत अवैध अतिक्रमण हटाया जाए काबर टाल किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक वल्लभ बादशाह ने बैठक को संबोधित करते हुए स्थानीय हितधारकों की आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि काबर क्षेत्र को टकराव का अखाड़ा बनाने के बजाय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत है। किसानों की जमीन पर किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई उचित नहीं होगी। सरकार और प्रशासन को कोई भी योजना बनाते समय स्थानीय किसानों, मछुआरों और मजदूरों के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए। काबर-बगरस नहर से तुरंत अवैध अतिक्रमण हटाया जाए। काबर में वर्षों से जमी गाद (कीचड़) की सफाई हो और काबर से बगरस तक पूरे नहर क्षेत्र को पुनर्जीवित किया जाए। बैठक में मौजूद पर्यावरण प्रेमी नीतेश रंजन ने नहर की वर्तमान दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने क्षेत्र के पर्यावरण को बचाने के लिए तीन सूत्रीय फॉर्मूला पर काम हो। काबर झील क्षेत्र में काबर-बगरस नहर के अस्तित्व को लेकर स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बैठक की है। जयमंगलागढ़ स्थित नहर घाट पर काबर नहर नवजीवन अभियान के तहत महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें नहर के संरक्षण, पुनरुद्धार और क्षेत्र के विकास को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार और लेखक महेश भारती ने की। अध्यक्षता करते हुए महेश भारती ने नहर के ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला। बैठक में उपस्थित लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि काबर-बगरस नहर की नियमित उड़ाही और सफाई व्यवस्था कराई जाएगी। नहर में साल भर पानी का सतत प्रवाह और जलस्तर बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। सफाई से निकली मिट्टी से दोनों तरफ के बांधों को ऊंचा और मजबूत किया जाएगा। इसके बाद बांध पर पेड़ लगाए जाएंगे। बैठक में अजय पाठक, आर्यन राज, धर्मेंद्र यादव, सरबू सदा एवं संजय सहनी सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता, किसान एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे। सभी लोगों ने एकजुट होकर काबर-बगरस नहर के संरक्षण और इसे नया जीवन देने के लिए सामूहिक रूप से संघर्ष और प्रयास करने का दृढ़ संकल्प लिया। नहर 8 किमी लंबी है, 15 लाख बनाने में लगे थे महेश भारती ने बताया कि इस नहर का निर्माण 1951 से 1956 के बीच कराया गया था। उस दौर में लगभग 15 लाख रुपए की लागत से बनी यह नहर करीब साढ़े आठ किलोमीटर लंबी और 11 फीट गहरी है। यह नहर आज सरकारी उपेक्षा का शिकार है। भारी अतिक्रमण और रखरखाव के अभाव के कारण दम तोड़ रही है। जगह-जगह बाड़ लगाकर इसके जल प्रवाह और जल निकासी को पूरी तरह बाधित कर दिया गया है। नहर में जलप्रवाह बनाए रखने के लिए सुधार बेहद जरूरी है। काबर-बगरस नहर से तुरंत अवैध अतिक्रमण हटाया जाए काबर टाल किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक वल्लभ बादशाह ने बैठक को संबोधित करते हुए स्थानीय हितधारकों की आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि काबर क्षेत्र को टकराव का अखाड़ा बनाने के बजाय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत है। किसानों की जमीन पर किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई उचित नहीं होगी। सरकार और प्रशासन को कोई भी योजना बनाते समय स्थानीय किसानों, मछुआरों और मजदूरों के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए। काबर-बगरस नहर से तुरंत अवैध अतिक्रमण हटाया जाए। काबर में वर्षों से जमी गाद (कीचड़) की सफाई हो और काबर से बगरस तक पूरे नहर क्षेत्र को पुनर्जीवित किया जाए। बैठक में मौजूद पर्यावरण प्रेमी नीतेश रंजन ने नहर की वर्तमान दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने क्षेत्र के पर्यावरण को बचाने के लिए तीन सूत्रीय फॉर्मूला पर काम हो।  

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