Jharkhand Delimitation का विरोध करेंगे आदिवासी, Bandhu Tirkey ने दी चेतावनी

Jharkhand Delimitation का विरोध करेंगे आदिवासी, Bandhu Tirkey ने दी चेतावनी

झारखंड कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने शनिवार को आशंका जताई कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार इस साल ‘अवश्य’ परिसीमन लागू करेगी। उन्होंने कहा कि अगर यह प्रक्रिया 2007-08 की रिपोर्ट पर आधारित हुई, तो राज्य के आदिवासी समुदाय इसका विरोध करेंगे। केंद्र सरकार ने 14 फरवरी, 2008 को परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी थी, जिससे देश का राजनीतिक मानचित्र बदल गया।

हालांकि, सरकार ने असम, मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ झारखंड में भी परिसीमन की प्रक्रिया को 2026 तक टालने का फैसला किया था। इसके बाद संसद ने इस संबंध में एक संशोधन पारित किया। झारखंड के पूर्व मंत्री तिर्की ने रविवार को प्रस्तावित ‘आदिवासी महाजुटाव रैली’ की तैयारियों की समीक्षा के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘इस रैली के जरिए राज्य के आदिवासियों को केंद्र सरकार की गलत नीतियों के बारे में जागरूक किया जाएगा।’’
तिर्की ने कहा, ‘‘हमें लगता है कि केंद्र सरकार इस साल निश्चित रूप से परिसीमन कराएगी, और अगर वह 2007-08 की परिसीमन रिपोर्ट के आधार पर यह प्रक्रिया करती है, तो हम इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

आदिवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सीटों की संख्या उसी अनुपात में बढ़नी चाहिए।’’
झारखंड विधानसभा की मौजूदा संख्या 1971 की जनगणना पर आधारित है। झारखंड की 81 सदस्यों वाली इस विधानसभा में 28 सीट अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं, जबकि राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से पांच सीट इसी समुदाय के लिए आरक्षित हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस रैली के जरिए झारखंड के आदिवासियों को संसद में ‘खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक पारित होने से होने वाले नुकसान के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

तिर्की ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार झारखंड से कोयला ले जाना चाहती है और खनिज अधिकारों और खनिजों वाली जमीन पर कर लगाने के राज्य के अधिकार को सीमित करना चाहती है। इसे भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि राज्य की झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस सरकार संशोधित खनन अधिनियम के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी और जरूरत पड़ने पर राज्य में आर्थिक नाकेबंदी भी करेगी।

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