राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी आज मेरठ की सिवाल खास विधानसभा के गांव ईकड़ी में एक जनसभा को संबोधित करने पहुंच रहे हैं। जिसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं ने पिछले लगभग 15 दिनों से तैयारी शुरू की गई थी।
गठबंधन के बाद पहली जनसभा
भाजपा से गठबंधन होने के बाद राष्ट्रीय लोकदल के सुप्रीमो जयंत चौधरी की यह पहली ऐसी जनसभा है जिसे वह अकेले संबोधित करने पहुंच रहे हैं। अब देखना यह होगा कि 2027 के चुनाव को लेकर इस जनसभा में क्या फैसला लिए जाते हैं इसके साथ-साथ क्या रूपरेखा तैयार की जाती है। जिला अध्यक्ष के गांव में है जनसभा जब जनसभा के लिए जो स्थान चुना गया है वह सिवालखास विधानसभा क्षेत्र का गांव ईकड़ी है। इसके साथ-साथ वह रालोद के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष अनिकेत भारद्वाज का पैतृक गांव भी है। देखना यहां होगा कि यह जनसभा पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्या संकेत देती है। कार्यकर्ताओं की लंबे समय से तैयारी
इस जनसभा को एक विशाल रूप देने के लिए रालोद कार्यकर्ता लगभग पिछले 15 दिनों से तैयारी में जुटे। हुए हैं लगभग दो हफ्ते पहले कैंप कार्यालय पर की गई मीटिंग के बाद सभी कार्यकर्ताओं को उनके दायित्व समझते हुए जिम्मेदारी दी गई है। इस रैली को सफल बनाने की कार्यकर्ताओं ने हर एक गांव में जाकर अपील भी की है। पहली बार जर्मन हैंगर का प्रयोग
राष्ट्रीय लोकदल के कार्यक्रम में पंडाल के लिए पहली बार जर्मन हैंगर का प्रयोग किया गया है। इससे पहले जब जब भी रालोद की जनसभाएं होती थी, चाहे वह स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह की जनसभा क्यों ना हो सभी में सामान्य पंडाल ही लगाए जाते थे। ऐसा पहली बार हो रहा है कि मेरठ में जयंत चौधरी अकेले किसी जनसभा को संबोधित करने पहुंच रहे हैं और उसमें जर्मन हैंगर के पंडाल का प्रयोग किया जा रहा है।


