जैसलमेर। शहर के पुराने व्यापारिक क्षेत्रों में शामिल गुलासतला मार्ग से आसनी पथ तक का करीब 250 मीटर का हिस्सा इन दिनों यातायात अव्यवस्था का पर्याय बन गया है। यहां शाम होते ही सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ने के साथ जाम के हालात बनने लगते हैं। शाम 5 बजे से रात करीब 9.30 बजे तक स्थिति इतनी विकट रहती है कि लगभग हर पांच मिनट में वाहनों के पहिए थम जाते हैं। कुछ देर के लिए रास्ता खुलता है और फिर वाहनों की कतारें लग जाती हैं। संकरे रास्ते और दुपहिया वाहनों की भारी आवाजाही के बीच तिपहिया वाहनों का जबरन प्रवेश परेशानी को कई गुना बढ़ा देता है। नतीजतन स्थानीय व्यापारियों, ग्राहकों और राहगीरों को रोजाना जाम से जूझना पड़ रहा है।
दुपहिया वाहनों की भीड़, तिपहिया वाहनों की घुसपैठ
इस मार्ग पर शाम के समय खरीदारी और व्यापारिक गतिविधियों के चलते दुपहिया वाहनों की आवाजाही काफी बढ़ जाती है। ऐसे में तिपहिया वाहनों के प्रवेश से सड़क पर उपलब्ध जगह और कम हो जाती है। आमने-सामने वाहन आने पर निकलने तक की जगह नहीं बचती। कई बार वाहन चालक आगे निकलने की कोशिश में रास्ता और अवरुद्ध कर देते हैं। इसका असर आसपास की गलियों और संपर्क मार्गों पर भी दिखाई देता है। महज 250 मीटर का रास्ता पार करने में लोगों को अनावश्यक समय गंवाना पड़ता है।
दुकानदार बोले, कारोबार के साथ ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि शाम का समय कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इसी दौरान जाम की समस्या सबसे ज्यादा रहती है। दुकानदार अशोक कुमार के अनुसार, बार-बार जाम लगने से ग्राहक दुकानों तक पहुंचने से कतराने लगे हैं। वहीं एक अन्य व्यापारी दिनेश कुमार का कहना है कि तिपहिया वाहनों के अनियंत्रित प्रवेश पर रोक लगे और यातायात पुलिस की नियमित तैनाती हो तो काफी हद तक राहत मिल सकती है। क्षेत्र के स्थानीय निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि रोजाना इसी रास्ते से गुजरने वाले लोगों को जाम के कारण परेशानी झेलनी पड़ती है। विशेषकर शाम के समय पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है।
नियमित निगरानी और ठोस यातायात योजना की दरकार
पुराने शहर के इस महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए केवल अस्थायी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। शाम के व्यस्त समय में तिपहिया वाहनों के प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण, यातायातकर्मियों की नियमित तैनाती और वाहनों की आवाजाही के लिए स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।
मुकेश व्यास, स्थानीय निवासी

