Jaipur : जयपुर. आरक्षण व्यवस्था में सुधार और यूजीसी नियमों की वापसी सहित विभिन्न मांगों को लेकर जयपुर में प्रस्तावित सवर्ण आक्रोश सभा से पहले आंदोलन तेज हो गया है। राष्ट्रीय करणी सेना की महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष लक्ष्मी तंवर रविवार को चित्रकूट, वैशाली नगर स्थित राष्ट्रीय करणी सेना भवन में सर्व समाज की सैकड़ों महिलाओं के साथ अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगों पर कार्रवाई होने तक अनशन जारी रहेगा। राष्ट्रीय करणी सेना के अध्यक्ष शिव सिंह शेखावत के नेतृत्व में 25 अक्टूबर को विद्याधर नगर स्टेडियम में सवर्ण आक्रोश सभा आयोजित की जाएगी।
बैठक में आंदोलन की रूपरेखा बताई सभा की तैयारियों और मांगों को लेकर जयपुर में रविवार को चित्रकूट स्थित राष्ट्रीय करणी सेना भवन में बैठक हुई। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव सिंह शेखावत, महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष लक्ष्मी तंवर, राष्ट्रीय प्रवक्ता नरेंद्र सिसोदिया, राष्ट्रीय सचिव कुलदीप सिंह भादवा सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर समाज के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर सरकार के समक्ष मांगें रखी जाएंगी।
सभा में उठेंगी प्रमुख मांगें
यूजीसी नियमों की वापसी: संबंधित नियमों को वापस लेने की मांग।
आरक्षण व्यवस्था में सुधार: आरक्षण संबंधी प्रावधानों में बदलाव की मांग।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन: अधिनियम में संशोधन की मांग।
ईडब्ल्यूएस प्रक्रिया का सरलीकरण: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए प्रावधानों और प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग।
सवर्ण आयोग का गठन: सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए आयोग बनाने की मांग।
गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करना: इस संबंध में सरकार से मांग उठाई जाएगी।
सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल
बैठक में विप्र महासभा के संस्थापक सुनील उदेईया, प्रदेश अध्यक्ष योगेंद्र भारद्वाज, श्री परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट अनिल चतुर्वेदी, सर्व समाज हिंदू महासभा के संस्थापक चंद्रप्रकाश अग्रवाल, खंडेलवाल समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश तुंगा वाला और एडवोकेट राम मनोहर शर्मा सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने विचार रखे।
प्रदेशभर में जनसंपर्क अभियान
आयोजकों के अनुसार, सभा में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में संपर्क सभाएं और जनसंपर्क अभियान चलाए जा रहे हैं। 25 अक्टूबर की सभा से पहले लक्ष्मी तंवर के अनिश्चितकालीन अनशन से आंदोलन को नया मोड़ मिला है।

