(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 10 सितंबर दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को कथित आईआरसीटीसी होटल घोटाले से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और छह अन्य के खिलाफ धन शोधन के आरोप तय करने का आदेश दिया। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने 16 आरोपियों में से सात को आरोप मुक्त कर दिया और नौ के खिलाफ आरोप तय किए हैं। आदेश के मुख्य हिस्सों को मौखिक रूप से सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि इस समय आपराधिक इरादे या अपराध करने की मानसिक स्थिति का पता लगाने के कड़े मानकों की जरूरत नहीं है और अदालत को केवल यह देखना है कि क्या आरोपी के खिलाफ कोई पुख्ता संदेह है।
अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज इसी कथित घोटाले के मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख और 11 अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किये थे। न्यायाधीश गोगने ने कहा कि धन शोधन के अपराध के मामले में सात लोगों के खिलाफ ‘‘पुख्ता संदेह’’ है तथा जांच का स्वरूप, समय और तरीका — ऐसा नहीं लगता कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित हो, जैसा कि आरोपियों के वकीलों ने दलील दी है। अदालत ने कहा, ‘‘कुछ संदिग्ध सौदे असल में सबके सामने किए जाते हैं, जहां आम लोगों की मौजूदगी असलियत जानने के बजाय उसे छिपाने का काम करती है।
अदालत इस बात पर खास तौर पर गौर करेगी कि सीबीआई और पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) मामलों, खासकर सांसद और विधायक (एमपी/एमएलए) से जुड़े मुकदमे की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत का उद्देश्य ही ऐसे छिपे हुए और अनैतिक सौदों का पता लगाना है, जिनमें निजी फायदे के लिए जनता के भरोसे और संपत्ति का सौदा किया जाता है।’’
अदालत ने कहा कि 2005 से 2014 के बीच की अवधि से जुड़े ईडी के आरोपों से साफ पता चलता है कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के कहने पर रेलवे अधिकारियों ने रांची और ओडिशा के पुरी में होटलों का पट्टा सुजाता होटल को देने के लिए निविदा में हेर-फेर की थी। अदालत ने कहा, ‘‘इसके बदले में, सुजाता होटल के निदेशक विनय कोचर और विजय कोचर ने पटना में अपनी बेशकीमती जमीन डीएमसीपीएल नाम की कंपनी को बहुत औने-पौने दाम पर हस्तांतरति कर दी। इस कंपनी का संचालन लालू प्रसाद के करीबी सहयोगी प्रेम चंद (पीसी) गुप्ता और उनकी पत्नी सरला गुप्ता करते थे।’’
अदालत ने यह भी कहा कि बाद में सरला गुप्ता और अन्य लोगों ने इस कंपनी के शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को बहुत कम कीमत पर हस्तांतरित कर दिए।
अदालत ने कहा, ‘‘इस लगभग मुफ़्त जमीन की देखरेख करने वाली नयी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी है। इस बारे में पुख्ता संदेह है कि लालू प्रसाद ने अपने पद का दुरूपयोग करके अपनी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के लिए गैर-कानूनी तरीके से संपत्ति अर्जित की, और वे पटना के एक महंगे वाणिज्यिक इलाके में मौजूद इस जमीन को उपयोग में लाते रहे।’’
अदालत ने कहा कि पटना स्थित यह जमीन अपराध की आय से अर्जित संपत्ति है और लारा प्रोजेक्ट्स, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद, पी.सी. गुप्ता, सरला गुप्ता, विजय कोचर और विनय कोचर के खिलाफ धन शोधन का आरोप तय किया जा सकता है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हालांकि, अदालत को आरोपी गौरव गुप्ता, नाथ मल काकरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव कुमार रेलन और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिले।’’
अदालत ने कहा, ‘‘नौ आरोपियों पर आरोप तय किए जा रहे हैं।
सात को आरोप मुक्त कर दिया गया है। निर्देश दिया जाता है कि पीएमएलए की धारा 3 (धन शोधन का अपराध) और धारा 4 (धन शोधन के लिए सजा) के तहत आरोपियों पर आरोप तय किए जाएं।’’
अदालत ने औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए मामले को तीन अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया। आदेश सुनाने से पहले रवींद्रनाथ टैगोर को उद्धृत करते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जब भी सत्ता अपना रास्ता आसान बनाने के लिए अपने रास्ते से सभी रोक-टोक हटा देती है, तो वह जीत के जोश में अपनी बर्बादी की कहानी खुद लिखती है।
उसे पता भी नहीं चलता और उसका नैतिक पतन हर दिन बढ़ता जाता है, और फिसलन भरा यह रास्ता ही उसकी बर्बादी का रास्ता बन जाता है।

