Hormuz Tanker Attack: ईरान युद्ध अब सिर्फ मिसाइलों और सैन्य हमलों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसका असर समुद्री रास्तों, तेल आपूर्ति और वैश्विक कूटनीति तक पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान को फिर शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर को निशाना बनाए जाने की खबर और चीन की बढ़ती मध्यस्थता ने हालात को और पेचीदा बना दिया है। अब दुनिया की नजर ट्रंप के अगले फैसले पर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने अगले सैन्य कदम पर बड़ा संकेत दिया है। Axios को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ फिर से बड़े पैमाने पर हमला करने या नहीं करने को लेकर अहम फैसला लेने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आगे कुछ भी हो सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही ट्रंप ने संकेत दिया था कि युद्ध अपने अंत के करीब हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। इन देशों पर संघर्ष का सीधा सुरक्षा और आर्थिक असर पड़ रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय सहयोगियों की राय ट्रंप के अगले कदम में महत्वपूर्ण हो सकती है।
चीन ने बढ़ाई कूटनीतिक सक्रियता
दूसरी तरफ चीन ने ईरान संकट में अपनी राजनयिक भूमिका तेज कर दी है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की। इससे पहले उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी चर्चा की थी। बीजिंग ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत फिर शुरू करने की अपील की है। चीन की चिंता का बड़ा कारण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भी है।
ऊदी अरब की अपील के बाद चीन ने ईरान से यमन के हूती विद्रोहियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने को कहा है, ताकि लाल सागर और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर दबाव कम किया जा सके।
होर्मुज में शिपिंग लगभग ठप
संघर्ष का सबसे बड़ा आर्थिक संकेत होर्मुज जलडमरूमध्य से मिल रहा है। बुधवार को यहां केवल तीन कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि एक दिन पहले यह संख्या 12 थी और 10 दिनों का औसत करीब 17 जहाज था। हालांकि AIS बंद करके गुजरने वाले जहाज इन आंकड़ों में शामिल नहीं हो सकते।
इसी बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने होर्मुज में एक टोगो-फ्लैग वाले टैंकर को निशाना बनाया। यह घटनाक्रम दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक पर बढ़ते जोखिम को रेखांकित करता है।
तेल बाजार पर सीधा असर
संघर्ष का असर कच्चे तेल पर भी दिखाई दे रहा है। 17 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 104.82 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी WTI करीब 101.91 डॉलर रहा। सऊदी तेल आपूर्ति को लेकर चिंताओं और होर्मुज में कम होती जहाज आवाजाही ने बाजार की चिंता बनाए रखी है।
यानी अब ट्रंप का अगला फैसला केवल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का मामला नहीं रह गया है। इसका असर खाड़ी देशों की सुरक्षा, वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर, चीन बातचीत के जरिए तनाव कम कराने की कोशिश में जुटा है। आने वाले दिनों में ट्रंप की खाड़ी नेताओं के साथ बैठक इस पूरे संकट की दिशा तय करने वाली अहम कड़ी बन सकती है।


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