पाकिस्तान में हुई हाई-लेवल बैठकें, आईएसआई की भारत में ड्रग-तस्करी की साजिश

पाकिस्तान में हुई हाई-लेवल बैठकें, आईएसआई की भारत में ड्रग-तस्करी की साजिश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कुछ दिन पहले कहा है कि ड्रग्स के खिलाफ भारत (India) की जंग 2026-29 के लिए एक बड़े मिशन के तौर पर शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व में देश को ड्रग-फ्री बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इसी बीच भारतीय खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान (Pakistan) बहुत बड़े लेवल पर भारत में ड्रग-तस्करी (Drug-Smuggling) बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान में हुई हाई-लेवल बैठकें

खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी से पता चलता है कि पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान आईएसआई (ISI) के अधिकारियों, दाऊद इब्राहिम सिंडिकेट के सदस्यों और ड्रग तस्करों के बीच कई हाई-लेवल बैठकें हुई हैं। ये बैठके लाहौर में हुई हैं और आईएसआई की साजिश पंजाब और जम्मू-कश्मीर की बॉर्डर से भारत में और ज़्यादा ड्रग्स भेजने की है और बैठकों में इसके कई तरीकों पर चर्चा की गई।

मोदी सरकार को चुनौती देना चाहती है आईएसआई

खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार आईएसआई न सिर्फ आतंकी समूहों को फंड देने के लिए और पैसा चाहती है, बल्कि मोदी सरकार को चुनौती भी देना चाहती है। इसी वजह से ड्रग-तस्करी के खिलाफ मोदी सरकार ने अभियान शुरू किया है। आईएसआई का मकसद आतंक के लिए फंड जुटाना, भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव डालना और मोदी सरकार के नशा-मुक्त भारत के विज़न को चुनौती देना है।

भारत के सामने क्या है चुनौती?

खुफिया एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान में पकड़े गए इंटरसेप्ट्स से आईएसआई की साजिश के साफ संकेत मिल रहे हैं। भारत के सामने न सिर्फ मौजूदा नेटवर्क और तरीकों से लड़ने की चुनौती है, बल्कि आईएसआई द्वारा अपनाए जाने वाले नए तरीकों का मुकाबला करने की भी चुनौती है। आईएसआई का फोकस ड्रग-तस्करी को पंजाब और जम्मू-कश्मीर में बढ़ाना है, लेकिन भारत सरकार पूरी तरह से अलर्ट है और इन दोनों राज्यों की बॉर्डर के साथ ही दूसरे राज्यों की बॉर्डर पर भी नज़र रख रही है। इसकी वजह है पाकिस्तान ‘गोल्डन ट्राएंगल’ में काम करने वाले कार्टेल के साथ मिलकर काम करने की संभावना, जो म्यांमार, लाओस और थाईलैंड की बॉर्डर वाला इलाका है। यह कार्टेल मुख्य रूप से हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी पर फोकस करता है। गोल्डन ट्राएंगल से होने वाली ड्रग-तस्करी का सबसे ज्यादा असर नॉर्थईस्ट के राज्यों पर पड़ता है।

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