कानपुर पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। फजलगंज थाना पुलिस ने IPL समेत क्रिकेट मैचों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के पांच सदस्यों को मौके से गिरफ्तार किया है।आरोपियों के पास से 1,04,300 रुपये नकद,15 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और सट्टेबाजी का हिसाब-किताब लिखे रजिस्टर बरामद हुए हैं।
कैसे पकड़े गए आरोपी
पुलिस उपायुक्त के अनुसार, फजलगंज थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग दादानगर ढाल से कंटेनर यार्ड की ओर जाने वाले रास्ते पर स्कारपियो में बैठकर ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे हैं। सूचना पर तत्काल पुलिस टीम ने घेराबंदी की। चेकिंग के दौरान एक काले रंग की स्कारपियो को रोका गया। गाड़ी में सवार पांच लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस को देखकर आरोपी मोबाइल और लैपटॉप से डेटा डिलीट करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन टीम ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें पकड़ लिया।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सौरभ गुप्ता निवासी गाजियाबाद, अभिषेक मित्तल, अनन्य वत्स, शुभम विजय तीनों निवासी मेरठ और अभिषेक जैन निवासी कानपुर नगर के रूप में हुई है। पूछताछ में पता चला कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि यूपी के कई जिलों में फैला हुआ है।
IPL पर लगाते थे करोड़ों का सट्टा
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से संगठित नेटवर्क चलाकर IPL समेत विभिन्न क्रिकेट मैचों पर ऑनलाइन सट्टा लगवा रहे थे। जब्त मोबाइल और लैपटॉप की जांच में कई सट्टेबाजी ऐप, वेबसाइट लिंक, व्हाट्सएप चैट और बैंकिंग लेन-देन के सबूत मिले हैं। आरोपी ग्राहकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आईडी-पासवर्ड देते थे। सट्टे की रकम बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट के जरिए मंगाई जाती थी। हर मैच पर लाखों रुपये का लेन-देन होता था।
बड़े सिंडीकेट से जुड़े तार
पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि वे एक बड़े सिंडीकेट का हिस्सा हैं। गिरोह का मास्टरमाइंड अभी फरार है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है ताकि मनी ट्रेल का पता लगाया जा सके। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की भी तलाश की जा रही है।
पुलिस ने दर्ज किया केस
फिलहाल थाना फजलगंज में सभी आरोपियों के खिलाफ सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। साइबर सेल की मदद से यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह किन-किन वेबसाइट और ऐप के जरिए सट्टा संचालित कर रहा था।


