America में फिर गूंजा भारत का नाम, Shrey Parikh बने Spelling Bee Champion, दबदबा कायम

America में फिर गूंजा भारत का नाम, Shrey Parikh बने Spelling Bee Champion, दबदबा कायम

अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित स्पेलिंग प्रतियोगिता में एक बार फिर भारतीय मूल के छात्र ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कैलिफोर्निया के रैंचो कुकामोंगा में रहने वाले 14 वर्षीय श्रेय पारिख ने स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर लिया है। यह अमेरिका की सबसे पुरानी और बड़ी शैक्षणिक खेलोंं में गिनी जाती है।फाइनल मुकाबले में श्रेय पारिख ने बेहद शानदार प्रदर्शन करते हुए केवल डेढ़ मिनट से कुछ अधिक समय में 32 कठिन शब्दों की सही स्पेलिंग बताकर निर्णायकों और दर्शकों को प्रभावित कर दिया। मुकाबले के दौरान श्रेय लगातार तेजी से शब्दों की स्पेलिंग बताते रहे और बिना रुके अगले दौर में पहुंचते गए। हालांकि “साइडिडाउ”, “सॉडर” और “उआयब” जैसे शब्दों में उन्हें हल्की परेशानी हुई, लेकिन इससे उनके आत्मविश्वास पर कोई असर नहीं पड़ा।मौजूद जानकारी के अनुसार अंतिम और निर्णायक शब्द “कैशॉ” था, जिसकी सही वर्तनी बताकर श्रेय ने प्रतियोगिता अपने नाम कर ली है। जैसे ही समय समाप्त होने की घोषणा हुई, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। गौरतलब है कि यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा। फाइनल में श्रेय का सामना 12 वर्षीय ईशान गुप्ता से हुआ था। दोनों के बीच 90 सेकंड का तेज रफ्तार स्पेल-ऑफ राउंड हुआ, जिसमें श्रेय ने 32 शब्दों की सही वर्तनी बताई, जबकि ईशान 25 शब्द ही सही बता सके हैं। यह प्रतियोगिता अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में आयोजित हुई।बता दें कि श्रेय पारिख पहले से ही इस प्रतियोगिता के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। वर्ष 2024 में वह तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं पिछले साल स्कूल स्तर की प्रतियोगिता में बुखार के बावजूद हिस्सा लेने के कारण वह आगे नहीं बढ़ पाए थे। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और कई ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज की।श्रेय सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं बल्कि अन्य गतिविधियों में भी काफी रुचि रखते हैं। उन्हें टेनिस खेलना, किताबें पढ़ना, गणित और शतरंज पसंद है। इसके अलावा वह अपने स्कूल बैंड में ताल वाद्य यंत्र भी बजाते हैं। वह स्नेयर ड्रम, बेस ड्रम, टिम्पानी, ट्रायंगल, ग्लॉकनस्पील और मरीम्बा जैसे कई वाद्य यंत्रों में निपुण माने जाते हैं।श्रेय को भारत आकर अपने दादा-दादी के साथ समय बिताना भी काफी पसंद है। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय मूल के समुदाय के लिए गर्व की बात माना जा रहा है।गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारतीय मूल के छात्रों का इस प्रतियोगिता में दबदबा लगातार बना हुआ है। वर्ष 2025 में डलास, टेक्सास के 13 वर्षीय फैजान जाकी ने यह खिताब जीता था। वहीं वर्ष 2024 में 12 वर्षीय भारतीय मूल के छात्र ब्रुहत सोमा ने प्रतियोगिता में जीत दर्ज की थी। उस दौरान उन्होंने 90 सेकंड में 30 में से 29 कठिन शब्दों की सही वर्तनी बताकर सबको चौंका दिया था। उन्हें प्रतियोगिता जीतने पर 50 हजार अमेरिकी डॉलर यानी करीब 41 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी मिली थी।स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में भारतीय मूल के बच्चों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह दिखाता है कि शिक्षा और भाषा कौशल के क्षेत्र में भारतीय समुदाय का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित स्पेलिंग प्रतियोगिता में एक बार फिर भारतीय मूल के छात्र ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कैलिफोर्निया के रैंचो कुकामोंगा में रहने वाले 14 वर्षीय श्रेय पारिख ने स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर लिया है। यह अमेरिका की सबसे पुरानी और बड़ी शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है।फाइनल मुकाबले में श्रेय पारिख ने बेहद शानदार प्रदर्शन करते हुए केवल डेढ़ मिनट से कुछ अधिक समय में 32 कठिन शब्दों की सही वर्तनी बताकर निर्णायकों और दर्शकों को प्रभावित कर दिया। मुकाबले के दौरान श्रेय लगातार तेजी से शब्दों की वर्तनी बताते रहे और बिना रुके अगले दौर में पहुंचते गए। हालांकि “साइडिडाउ”, “सॉडर” और “उआयब” जैसे शब्दों में उन्हें हल्की परेशानी हुई, लेकिन इससे उनके आत्मविश्वास पर कोई असर नहीं पड़ा।अंतिम और निर्णायक शब्द “कैशॉ” था, जिसकी सही वर्तनी बताकर श्रेय ने प्रतियोगिता अपने नाम कर ली है। जैसे ही समय समाप्त होने की घोषणा हुई, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। श्रेय के चेहरे पर राहत भरी मुस्कान दिखाई दी और लगातार बजर दबाने के कारण उन्होंने अपने हाथों की उंगलियां भी फैलाकर आराम दिया है।गौरतलब है कि यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा। फाइनल में श्रेय का सामना 12 वर्षीय ईशान गुप्ता से हुआ था। दोनों के बीच 90 सेकंड का तेज रफ्तार स्पेल-ऑफ राउंड हुआ, जिसमें श्रेय ने 32 शब्दों की सही वर्तनी बताई, जबकि ईशान 25 शब्द ही सही बता सके हैं। यह प्रतियोगिता अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में आयोजित हुई है।बता दें कि श्रेय पारिख पहले से ही इस प्रतियोगिता के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। वर्ष 2024 में वह तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं पिछले साल स्कूल स्तर की प्रतियोगिता में बुखार के बावजूद हिस्सा लेने के कारण वह आगे नहीं बढ़ पाए थे। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और कई ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज की है।श्रेय सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं बल्कि अन्य गतिविधियों में भी काफी रुचि रखते हैं। उन्हें टेनिस खेलना, किताबें पढ़ना, गणित और शतरंज पसंद है। इसके अलावा वह अपने स्कूल बैंड में ताल वाद्य यंत्र भी बजाते हैं। वह स्नेयर ड्रम, बेस ड्रम, टिम्पानी, ट्रायंगल, ग्लॉकनस्पील और मरीम्बा जैसे कई वाद्य यंत्रों में निपुण माने जाते हैं।श्रेय को भारत आकर अपने दादा-दादी के साथ समय बिताना भी काफी पसंद है। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय मूल के समुदाय के लिए गर्व की बात माना जा रहा है।गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारतीय मूल के छात्रों का इस प्रतियोगिता में दबदबा लगातार बना हुआ है। वर्ष 2025 में डलास, टेक्सास के 13 वर्षीय फैजान जाकी ने यह खिताब जीता था। वहीं वर्ष 2024 में 12 वर्षीय भारतीय मूल के छात्र ब्रुहत सोमा ने प्रतियोगिता में जीत दर्ज की थी। उस दौरान उन्होंने 90 सेकंड में 30 में से 29 कठिन शब्दों की सही वर्तनी बताकर सबको चौंका दिया था। उन्हें प्रतियोगिता जीतने पर 50 हजार अमेरिकी डॉलर यानी करीब 41 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी मिली थी।स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में भारतीय मूल के बच्चों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह दिखाता है कि शिक्षा और भाषा कौशल के क्षेत्र में भारतीय समुदाय का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। 

अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित स्पेलिंग प्रतियोगिता में एक बार फिर भारतीय मूल के छात्र ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कैलिफोर्निया के रैंचो कुकामोंगा में रहने वाले 14 वर्षीय श्रेय पारिख ने स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर लिया है। यह अमेरिका की सबसे पुरानी और बड़ी शैक्षणिक खेलोंं में गिनी जाती है।
फाइनल मुकाबले में श्रेय पारिख ने बेहद शानदार प्रदर्शन करते हुए केवल डेढ़ मिनट से कुछ अधिक समय में 32 कठिन शब्दों की सही स्पेलिंग बताकर निर्णायकों और दर्शकों को प्रभावित कर दिया। मुकाबले के दौरान श्रेय लगातार तेजी से शब्दों की स्पेलिंग बताते रहे और बिना रुके अगले दौर में पहुंचते गए। हालांकि “साइडिडाउ”, “सॉडर” और “उआयब” जैसे शब्दों में उन्हें हल्की परेशानी हुई, लेकिन इससे उनके आत्मविश्वास पर कोई असर नहीं पड़ा।
मौजूद जानकारी के अनुसार अंतिम और निर्णायक शब्द “कैशॉ” था, जिसकी सही वर्तनी बताकर श्रेय ने प्रतियोगिता अपने नाम कर ली है। जैसे ही समय समाप्त होने की घोषणा हुई, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। 
गौरतलब है कि यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा। फाइनल में श्रेय का सामना 12 वर्षीय ईशान गुप्ता से हुआ था। दोनों के बीच 90 सेकंड का तेज रफ्तार स्पेल-ऑफ राउंड हुआ, जिसमें श्रेय ने 32 शब्दों की सही वर्तनी बताई, जबकि ईशान 25 शब्द ही सही बता सके हैं। यह प्रतियोगिता अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में आयोजित हुई।
बता दें कि श्रेय पारिख पहले से ही इस प्रतियोगिता के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। वर्ष 2024 में वह तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं पिछले साल स्कूल स्तर की प्रतियोगिता में बुखार के बावजूद हिस्सा लेने के कारण वह आगे नहीं बढ़ पाए थे। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और कई ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज की।
श्रेय सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं बल्कि अन्य गतिविधियों में भी काफी रुचि रखते हैं। उन्हें टेनिस खेलना, किताबें पढ़ना, गणित और शतरंज पसंद है। इसके अलावा वह अपने स्कूल बैंड में ताल वाद्य यंत्र भी बजाते हैं। वह स्नेयर ड्रम, बेस ड्रम, टिम्पानी, ट्रायंगल, ग्लॉकनस्पील और मरीम्बा जैसे कई वाद्य यंत्रों में निपुण माने जाते हैं।
श्रेय को भारत आकर अपने दादा-दादी के साथ समय बिताना भी काफी पसंद है। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय मूल के समुदाय के लिए गर्व की बात माना जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारतीय मूल के छात्रों का इस प्रतियोगिता में दबदबा लगातार बना हुआ है। वर्ष 2025 में डलास, टेक्सास के 13 वर्षीय फैजान जाकी ने यह खिताब जीता था। वहीं वर्ष 2024 में 12 वर्षीय भारतीय मूल के छात्र ब्रुहत सोमा ने प्रतियोगिता में जीत दर्ज की थी। उस दौरान उन्होंने 90 सेकंड में 30 में से 29 कठिन शब्दों की सही वर्तनी बताकर सबको चौंका दिया था। उन्हें प्रतियोगिता जीतने पर 50 हजार अमेरिकी डॉलर यानी करीब 41 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी मिली थी।
स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में भारतीय मूल के बच्चों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह दिखाता है कि शिक्षा और भाषा कौशल के क्षेत्र में भारतीय समुदाय का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।
अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित स्पेलिंग प्रतियोगिता में एक बार फिर भारतीय मूल के छात्र ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कैलिफोर्निया के रैंचो कुकामोंगा में रहने वाले 14 वर्षीय श्रेय पारिख ने स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर लिया है। यह अमेरिका की सबसे पुरानी और बड़ी शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है।
फाइनल मुकाबले में श्रेय पारिख ने बेहद शानदार प्रदर्शन करते हुए केवल डेढ़ मिनट से कुछ अधिक समय में 32 कठिन शब्दों की सही वर्तनी बताकर निर्णायकों और दर्शकों को प्रभावित कर दिया। मुकाबले के दौरान श्रेय लगातार तेजी से शब्दों की वर्तनी बताते रहे और बिना रुके अगले दौर में पहुंचते गए। हालांकि “साइडिडाउ”, “सॉडर” और “उआयब” जैसे शब्दों में उन्हें हल्की परेशानी हुई, लेकिन इससे उनके आत्मविश्वास पर कोई असर नहीं पड़ा।
अंतिम और निर्णायक शब्द “कैशॉ” था, जिसकी सही वर्तनी बताकर श्रेय ने प्रतियोगिता अपने नाम कर ली है। जैसे ही समय समाप्त होने की घोषणा हुई, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। श्रेय के चेहरे पर राहत भरी मुस्कान दिखाई दी और लगातार बजर दबाने के कारण उन्होंने अपने हाथों की उंगलियां भी फैलाकर आराम दिया है।
गौरतलब है कि यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा। फाइनल में श्रेय का सामना 12 वर्षीय ईशान गुप्ता से हुआ था। दोनों के बीच 90 सेकंड का तेज रफ्तार स्पेल-ऑफ राउंड हुआ, जिसमें श्रेय ने 32 शब्दों की सही वर्तनी बताई, जबकि ईशान 25 शब्द ही सही बता सके हैं। यह प्रतियोगिता अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में आयोजित हुई है।
बता दें कि श्रेय पारिख पहले से ही इस प्रतियोगिता के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। वर्ष 2024 में वह तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं पिछले साल स्कूल स्तर की प्रतियोगिता में बुखार के बावजूद हिस्सा लेने के कारण वह आगे नहीं बढ़ पाए थे। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और कई ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज की है।
श्रेय सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं बल्कि अन्य गतिविधियों में भी काफी रुचि रखते हैं। उन्हें टेनिस खेलना, किताबें पढ़ना, गणित और शतरंज पसंद है। इसके अलावा वह अपने स्कूल बैंड में ताल वाद्य यंत्र भी बजाते हैं। वह स्नेयर ड्रम, बेस ड्रम, टिम्पानी, ट्रायंगल, ग्लॉकनस्पील और मरीम्बा जैसे कई वाद्य यंत्रों में निपुण माने जाते हैं।
श्रेय को भारत आकर अपने दादा-दादी के साथ समय बिताना भी काफी पसंद है। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय मूल के समुदाय के लिए गर्व की बात माना जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारतीय मूल के छात्रों का इस प्रतियोगिता में दबदबा लगातार बना हुआ है। वर्ष 2025 में डलास, टेक्सास के 13 वर्षीय फैजान जाकी ने यह खिताब जीता था। वहीं वर्ष 2024 में 12 वर्षीय भारतीय मूल के छात्र ब्रुहत सोमा ने प्रतियोगिता में जीत दर्ज की थी। उस दौरान उन्होंने 90 सेकंड में 30 में से 29 कठिन शब्दों की सही वर्तनी बताकर सबको चौंका दिया था। उन्हें प्रतियोगिता जीतने पर 50 हजार अमेरिकी डॉलर यानी करीब 41 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी मिली थी।
स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में भारतीय मूल के बच्चों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह दिखाता है कि शिक्षा और भाषा कौशल के क्षेत्र में भारतीय समुदाय का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।

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