विदिशा में मंगलवार को लाखों रुपए के कथित गोल्ड लोन घोटाले का मामला सामने आया है। आधा दर्जन से अधिक मजदूरों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्जी तरीके से गोल्ड लोन स्वीकृत किए गए हैं। पीड़ितों ने कुछ निजी व्यक्तियों, बैंक अधिकारियों और एक ज्वेलर्स पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, लगभग 11 महीने पहले कुछ मजदूरों ने शहर में एक मकान निर्माण का ठेका लिया था। आरोप है कि मकान मालिक और उसके सहयोगियों ने मजदूरों को जल्द भुगतान का झांसा दिया। इस दौरान उनके बैंक खाते, पासबुक, चेकबुक, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज अपने पास रख लिए गए। आरोप- धोखे से हस्ताक्षर करवाए
इसके बाद, मजदूरों को अलग-अलग दिनों में बैंक ले जाकर विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि यह केवल कागजी प्रक्रिया है। हालांकि, हाल ही में बैंक कर्मचारियों द्वारा बकाया लोन की जानकारी दिए जाने पर उन्हें पता चला कि उनके नाम पर लाखों रुपए के गोल्ड लोन स्वीकृत हो चुके हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि एक संगठित गिरोह ने कथित तौर पर नकली सोना तैयार किया। इस नकली सोने को बैंक में गिरवी रखकर गरीब मजदूरों के नाम पर गोल्ड लोन हासिल किया गया। उनका दावा है कि इस पूरे मामले में बैंक के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है। पीड़ित बोले- राशि हमारे हाथ में नहीं आई
पीड़ितों का आरोप है कि लोन की राशि उनके हाथ में नहीं आई। यह रकम चेकों के माध्यम से निकालकर अन्य लोगों ने अपने कब्जे में ले ली। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि जिले में इसी तरह के लगभग 123 लोगों को निशाना बनाया गया है। हालांकि, इस संख्या और आरोपों की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने बताया कि गोल्ड लोन से संबंधित एक शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने अन्य व्यक्तियों को भरोसे में लेकर उनके नाम पर गोल्ड लोन कराया। मामले में बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों और संबंधित तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गोल्ड लोन घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या वास्तव में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत थी या नहीं।


