प्रयागराज में बैसाखी महोत्सव में नाटक ‘संगच्छध्वम्’ का मंचन:कबीर-रैदास की वाणी से दिया सांस्कृतिक एकता का संदेश

प्रयागराज में बैसाखी महोत्सव में नाटक ‘संगच्छध्वम्’ का मंचन:कबीर-रैदास की वाणी से दिया सांस्कृतिक एकता का संदेश

प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में बैसाखी महोत्सव का आयोजन किया गया। रविवार को महोत्सव के तहत नाटक “संगच्छध्वम्” का मंचन हुआ, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह लाइव म्यूज़िकल नाटक दिनेश नय्यर द्वारा लिखा गया था और इसका निर्देशन डॉ. नवदीप कौर ने किया था। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि न्यायाधीश योगेश कुमार और विशिष्ट अतिथि सतविंदर सिंह अध्यक्ष, गुरुद्वारा, सदियापुर ने किया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा और कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय भी उपस्थित थीं। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही नाटक का मंचन शुरू हुआ, जिसके बाद सभागार में शांति छा गई और दर्शक कहानी में लीन हो गए। नाटक “संगच्छध्वम्” भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “वसुधैव कुटुम्बकम्” पर आधारित था। इसमें संत कबीर और रैदास की शिक्षाओं को संगीत और संवाद के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कबीर की साखियों और रैदास के पदों ने प्रस्तुति को आध्यात्मिक और भावनात्मक गहराई दी। यह नाटक एक लाइव म्यूज़िकल प्रस्तुति थी, जहाँ संगीत केवल पृष्ठभूमि तक सीमित नहीं था, बल्कि कहानी का एक अभिन्न अंग बन गया था। समूह-गायन और मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को प्रभावशाली बनाया। कई दृश्यों में दर्शकों ने कहानी के साथ गहरा जुड़ाव महसूस किया। नाटक में कलाकारों का प्रदर्शन सराहनीय रहा। शगुन ने सूत्रधार की भूमिका निभाई, जबकि साहिल मंताज, गौरव और अमनप्रीत ने बाबा के किरदार में उत्कृष्ट अभिनय किया। भारत की भूमिका में अनमोल जोशी की प्रस्तुति भी प्रभावशाली रही। लवप्रीत सिंह, तान्या और कुनिका ने कोरस में अपने गायन से नाटक को जीवंतता प्रदान की।

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