पूर्णिया में सैकड़ों महिलाओं से करोड़ों की ठगी:सहायता माइक्रो फाइनेंस नाम से फर्जी कंपनी खोली, 5 दिन में 1.60 लाख लोन दिलाने का झांसा देकर फरार

पूर्णिया में सैकड़ों महिलाओं से करोड़ों की ठगी:सहायता माइक्रो फाइनेंस नाम से फर्जी कंपनी खोली, 5 दिन में 1.60 लाख लोन दिलाने का झांसा देकर फरार

पूर्णिया में गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को आसान लोन का सपना दिखाकर करोड़ों रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। यहां सहायता माइक्रो फाइनेंस नाम से एक फर्जी कंपनी खोलकर शातिरों ने सैकड़ों महिलाओं को अपने जाल में फंसाया और महज पांच दिनों के भीतर करोड़ों रुपए की वसूली कर फरार हो गए। घटना शहर के सदर थाना क्षेत्र इलाके की है। इस फर्जीवाड़े के बाद से पीड़ित महिलाओं में आक्रोश है और वे अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने के लिए पुलिस के चक्कर लगा रही हैं। ठगों ने महिलाओं को 1 लाख 60 हजार रुपए का लोन दिलाने का झांसा दिया। इसके बदले प्रत्येक महिला से रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर 5-5 हजार रुपए जमा कराए गए। लोन की बड़ी राशि मिलने की उम्मीद में कई महिलाओं ने अपनी जमा-पूंजी निकाल ली, जबकि कई ने उधार लेकर पैसे जमा किए। लेकिन पैसा लेने के बाद न तो किसी के खाते में लोन आया और न ही कंपनी के कर्मचारी दोबारा दिखाई दिए। 2 जून को कार्यालय का उद्घाटन किया था पीड़ित महिलाओं में गुलाबबाग की सुकनी देवी, के. नगर की रंजू देवी, मीना देवी, साधो देवी, प्रतिमा और सुरभि कुमारी समेत दर्जनों महिलाओं ने सदर थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। महिलाओं का आरोप है कि राहुल रंजन, सोनू और सुधांशु नामक युवक घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे थे और खुद को माइक्रो फाइनेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे। वे दावा करते थे कि उनकी कंपनी बिना किसी परेशानी के बेहद कम समय में लोन उपलब्ध कराती है। आरोपियों ने पूरी योजना के साथ काम किया। मुख्य आरोपी राहुल रंजन ने 28 मई को एक कमरा किराए पर लिया और पैन कार्ड समेत अन्य दस्तावेज देकर मकान मालिक का भरोसा जीत लिया। इसके बाद 2 जून को ‘सहायता माइक्रो फाइनेंस’ के नाम से कार्यालय का भव्य उद्घाटन किया गया। उद्घाटन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं वहां पहुंचीं और कंपनी की बातों पर विश्वास कर पैसे जमा करने लगीं। 2 दिन में पूरा खेल खत्म हो गया मकान मालिक ने बताया कि राहुल रंजन ने सिक्योरिटी मनी के रूप में एक लाख रुपए देने का वादा किया था, लेकिन वह रकम भी कभी जमा नहीं की गई। जब पैसे मांगे गए तो उसने बेगूसराय स्थित घर से लाकर देने का बहाना बनाया। इसी दौरान महिलाओं से लगातार पैसे जुटाने का काम चलता रहा। उद्घाटन के महज दो दिन बाद पूरा खेल खत्म हो गया। जब महिलाएं अपने लोन की जानकारी लेने कार्यालय पहुंचीं तो वहां ताला लटका मिला। कंपनी के सभी कर्मचारी गायब थे। जिन मोबाइल नंबरों से संपर्क किया जाता था, वे बंद मिले या दूसरे नंबरों पर फॉरवर्ड हो चुके थे। इसके बाद महिलाओं को एहसास हुआ कि वे बड़े ठगी गिरोह का शिकार हो चुकी हैं। सैकड़ों महिलाओं से 5-5 हजार रुपए वसूले जाने की बात सामने आ रही है, ऐसे में ठगी की रकम लाखों नहीं बल्कि करोड़ों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं यह गिरोह अन्य जिलों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम तो नहीं दे चुका है। सुनियोजित ठगी का मामला सदर थाना के अपर थानाध्यक्ष शशि भगत ने बताया कि पीड़ित महिलाओं की शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। कार्यालय और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। आरोपियों की ओर से दिए गए दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह मामला सुनियोजित ठगी का प्रतीत होता है। पूर्णिया में गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को आसान लोन का सपना दिखाकर करोड़ों रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। यहां सहायता माइक्रो फाइनेंस नाम से एक फर्जी कंपनी खोलकर शातिरों ने सैकड़ों महिलाओं को अपने जाल में फंसाया और महज पांच दिनों के भीतर करोड़ों रुपए की वसूली कर फरार हो गए। घटना शहर के सदर थाना क्षेत्र इलाके की है। इस फर्जीवाड़े के बाद से पीड़ित महिलाओं में आक्रोश है और वे अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने के लिए पुलिस के चक्कर लगा रही हैं। ठगों ने महिलाओं को 1 लाख 60 हजार रुपए का लोन दिलाने का झांसा दिया। इसके बदले प्रत्येक महिला से रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर 5-5 हजार रुपए जमा कराए गए। लोन की बड़ी राशि मिलने की उम्मीद में कई महिलाओं ने अपनी जमा-पूंजी निकाल ली, जबकि कई ने उधार लेकर पैसे जमा किए। लेकिन पैसा लेने के बाद न तो किसी के खाते में लोन आया और न ही कंपनी के कर्मचारी दोबारा दिखाई दिए। 2 जून को कार्यालय का उद्घाटन किया था पीड़ित महिलाओं में गुलाबबाग की सुकनी देवी, के. नगर की रंजू देवी, मीना देवी, साधो देवी, प्रतिमा और सुरभि कुमारी समेत दर्जनों महिलाओं ने सदर थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। महिलाओं का आरोप है कि राहुल रंजन, सोनू और सुधांशु नामक युवक घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे थे और खुद को माइक्रो फाइनेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे। वे दावा करते थे कि उनकी कंपनी बिना किसी परेशानी के बेहद कम समय में लोन उपलब्ध कराती है। आरोपियों ने पूरी योजना के साथ काम किया। मुख्य आरोपी राहुल रंजन ने 28 मई को एक कमरा किराए पर लिया और पैन कार्ड समेत अन्य दस्तावेज देकर मकान मालिक का भरोसा जीत लिया। इसके बाद 2 जून को ‘सहायता माइक्रो फाइनेंस’ के नाम से कार्यालय का भव्य उद्घाटन किया गया। उद्घाटन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं वहां पहुंचीं और कंपनी की बातों पर विश्वास कर पैसे जमा करने लगीं। 2 दिन में पूरा खेल खत्म हो गया मकान मालिक ने बताया कि राहुल रंजन ने सिक्योरिटी मनी के रूप में एक लाख रुपए देने का वादा किया था, लेकिन वह रकम भी कभी जमा नहीं की गई। जब पैसे मांगे गए तो उसने बेगूसराय स्थित घर से लाकर देने का बहाना बनाया। इसी दौरान महिलाओं से लगातार पैसे जुटाने का काम चलता रहा। उद्घाटन के महज दो दिन बाद पूरा खेल खत्म हो गया। जब महिलाएं अपने लोन की जानकारी लेने कार्यालय पहुंचीं तो वहां ताला लटका मिला। कंपनी के सभी कर्मचारी गायब थे। जिन मोबाइल नंबरों से संपर्क किया जाता था, वे बंद मिले या दूसरे नंबरों पर फॉरवर्ड हो चुके थे। इसके बाद महिलाओं को एहसास हुआ कि वे बड़े ठगी गिरोह का शिकार हो चुकी हैं। सैकड़ों महिलाओं से 5-5 हजार रुपए वसूले जाने की बात सामने आ रही है, ऐसे में ठगी की रकम लाखों नहीं बल्कि करोड़ों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं यह गिरोह अन्य जिलों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम तो नहीं दे चुका है। सुनियोजित ठगी का मामला सदर थाना के अपर थानाध्यक्ष शशि भगत ने बताया कि पीड़ित महिलाओं की शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। कार्यालय और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। आरोपियों की ओर से दिए गए दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह मामला सुनियोजित ठगी का प्रतीत होता है।  

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