पटना-IGIC में 19 बच्चों का बिना चीरा-फाड़ हार्ट ऑपरेशन सफल:बाल हृदय योजना से गरीब मरीजों को मिली जिंदगी, अत्याधुनिक ‘डिवाइस क्लोजर’ तकनीक का उपयोग

पटना-IGIC में 19 बच्चों का बिना चीरा-फाड़ हार्ट ऑपरेशन सफल:बाल हृदय योजना से गरीब मरीजों को मिली जिंदगी, अत्याधुनिक ‘डिवाइस क्लोजर’ तकनीक का उपयोग

बिहार में बच्चों के हृदय उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) में आयोजित दो दिवसीय विशेष शिविर के दौरान 19 बच्चों का बिना चीरा-फाड़ सफल हृदय ऑपरेशन किया गया। यह ऑपरेशन मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पूरी तरह नि:शुल्क संपन्न हुआ। यह विशेष शिविर 20 और 21 मई को आयोजित किया गया था। इसमें जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित उन बच्चों का इलाज किया गया, जिनके परिवार आर्थिक अभाव के कारण उपचार कराने में असमर्थ थे। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अत्याधुनिक “डिवाइस क्लोजर” तकनीक का उपयोग कर बच्चों का सफल इलाज किया। बिना ओपन हार्ट सर्जरी हुआ इलाज संस्थान प्रशासन के मुताबिक, सभी ऑपरेशन अत्याधुनिक उपकरणों और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीक की मदद से किए गए। इस प्रक्रिया में सीने पर बड़ा चीरा लगाने या ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसमें शरीर की नसों के जरिए एक विशेष डिवाइस हृदय तक पहुंचाई जाती है, जिससे हृदय में मौजूद छेद या दोष को बंद किया जाता है। संक्रमण का खतरा कम, जल्दी मिलती है छुट्टी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रक्रिया पारंपरिक सर्जरी की तुलना में बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित मानी जाती है। इसमें संक्रमण और अन्य जटिलताओं की संभावना काफी कम होती है। साथ ही मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं पड़ती। अधिकांश बच्चे ऑपरेशन के एक-दो दिन के भीतर सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते हैं, जिससे परिवारों को भी बड़ी राहत मिलती है। दिल्ली और पटना के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने निभाई अहम भूमिका पूरे ऑपरेशन का संचालन संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील कुमार के मार्गदर्शन में किया गया। इस विशेष शिविर में नई दिल्ली के प्रसिद्ध बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज अवस्थी और आईजीआईसी पटना की डॉ. पूजा कुमारी की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉक्टरों ने अत्याधुनिक कैथ लैब तकनीक का उपयोग करते हुए सभी बच्चों का सफल ऑपरेशन किया। चिकित्सकों के अनुसार, ज्यादातर बच्चे जन्मजात हृदय रोग यानी जन्म से हृदय में छेद या अन्य दोष की समस्या से पीड़ित थे। गरीब परिवारों के लिए राहत, खुशी जाहिर किया इस शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सभी ऑपरेशन पूरी तरह नि:शुल्क किए गए। कई परिवार ऐसे थे जो अपने बच्चों का इलाज कराने के लिए वर्षों से परेशान थे। निजी अस्पतालों में ऐसे ऑपरेशन पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, जो गरीब परिवारों के लिए संभव नहीं होता। बाल हृदय योजना के तहत राज्य सरकार ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका मुफ्त इलाज सुनिश्चित कर रही है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। कई अभिभावकों ने बताया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बिहार में ही इतना आधुनिक और बेहतर इलाज उपलब्ध हो सकेगा। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की अहम भूमिका इस अभियान को सफल बनाने में संयुक्त निदेशक सह नोडल पदाधिकारी डॉ. विरेंद्र कुमार सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्मिता सिंह और डॉ. अभिषेक नंदन भारद्वाज ने भी पूरी प्रक्रिया में सक्रिय योगदान दिया। वहीं, ओटी बैकअप सीटीवीएस टीम, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों ने लगातार सहयोग करते हुए ऑपरेशन को सफल बनाया। संस्थान प्रशासन ने सभी चिकित्सकों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। बिहार में ही संभव हो रहा जटिल इलाज विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले तक बिहार के मरीजों को ऐसे जटिल हृदय उपचार के लिए दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता था। लेकिन अब आईजीआईसी में लगातार बढ़ रही सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक तकनीकों की वजह से राज्य में ही बेहतर इलाज उपलब्ध हो रहा है। इस तरह के विशेष शिविरों से न सिर्फ बच्चों को समय पर उपचार मिल रहा है, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे पर लोगों का भरोसा भी मजबूत हो रहा है। विशेषज्ञों बोले- समय पर पहचान जरूरी विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कहा कि जन्मजात हृदय रोग के मामलों में समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है। यदि बच्चों में सांस फूलना, जल्दी थक जाना, वजन नहीं बढ़ना या बार-बार बीमार पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक, सही समय पर इलाज मिलने से बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। देर होने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है। जीवनदायी साबित हो रही बाल हृदय योजना राज्य सरकार की बाल हृदय योजना अब गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को बेहतर और समय पर हृदय उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि पैसे के अभाव में किसी बच्चे का इलाज प्रभावित न हो। आईजीआईसी में आयोजित यह विशेष शिविर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सफल ऑपरेशन के बाद अब 19 बच्चों और उनके परिवारों के चेहरे पर राहत और खुशी साफ दिखाई दे रही है। बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यह उपलब्धि आने वाले समय में और अधिक बच्चों के लिए नई उम्मीद बन सकती है। बिहार में बच्चों के हृदय उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) में आयोजित दो दिवसीय विशेष शिविर के दौरान 19 बच्चों का बिना चीरा-फाड़ सफल हृदय ऑपरेशन किया गया। यह ऑपरेशन मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पूरी तरह नि:शुल्क संपन्न हुआ। यह विशेष शिविर 20 और 21 मई को आयोजित किया गया था। इसमें जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित उन बच्चों का इलाज किया गया, जिनके परिवार आर्थिक अभाव के कारण उपचार कराने में असमर्थ थे। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अत्याधुनिक “डिवाइस क्लोजर” तकनीक का उपयोग कर बच्चों का सफल इलाज किया। बिना ओपन हार्ट सर्जरी हुआ इलाज संस्थान प्रशासन के मुताबिक, सभी ऑपरेशन अत्याधुनिक उपकरणों और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीक की मदद से किए गए। इस प्रक्रिया में सीने पर बड़ा चीरा लगाने या ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसमें शरीर की नसों के जरिए एक विशेष डिवाइस हृदय तक पहुंचाई जाती है, जिससे हृदय में मौजूद छेद या दोष को बंद किया जाता है। संक्रमण का खतरा कम, जल्दी मिलती है छुट्टी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रक्रिया पारंपरिक सर्जरी की तुलना में बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित मानी जाती है। इसमें संक्रमण और अन्य जटिलताओं की संभावना काफी कम होती है। साथ ही मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं पड़ती। अधिकांश बच्चे ऑपरेशन के एक-दो दिन के भीतर सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते हैं, जिससे परिवारों को भी बड़ी राहत मिलती है। दिल्ली और पटना के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने निभाई अहम भूमिका पूरे ऑपरेशन का संचालन संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील कुमार के मार्गदर्शन में किया गया। इस विशेष शिविर में नई दिल्ली के प्रसिद्ध बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज अवस्थी और आईजीआईसी पटना की डॉ. पूजा कुमारी की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉक्टरों ने अत्याधुनिक कैथ लैब तकनीक का उपयोग करते हुए सभी बच्चों का सफल ऑपरेशन किया। चिकित्सकों के अनुसार, ज्यादातर बच्चे जन्मजात हृदय रोग यानी जन्म से हृदय में छेद या अन्य दोष की समस्या से पीड़ित थे। गरीब परिवारों के लिए राहत, खुशी जाहिर किया इस शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सभी ऑपरेशन पूरी तरह नि:शुल्क किए गए। कई परिवार ऐसे थे जो अपने बच्चों का इलाज कराने के लिए वर्षों से परेशान थे। निजी अस्पतालों में ऐसे ऑपरेशन पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, जो गरीब परिवारों के लिए संभव नहीं होता। बाल हृदय योजना के तहत राज्य सरकार ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका मुफ्त इलाज सुनिश्चित कर रही है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। कई अभिभावकों ने बताया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बिहार में ही इतना आधुनिक और बेहतर इलाज उपलब्ध हो सकेगा। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की अहम भूमिका इस अभियान को सफल बनाने में संयुक्त निदेशक सह नोडल पदाधिकारी डॉ. विरेंद्र कुमार सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्मिता सिंह और डॉ. अभिषेक नंदन भारद्वाज ने भी पूरी प्रक्रिया में सक्रिय योगदान दिया। वहीं, ओटी बैकअप सीटीवीएस टीम, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों ने लगातार सहयोग करते हुए ऑपरेशन को सफल बनाया। संस्थान प्रशासन ने सभी चिकित्सकों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। बिहार में ही संभव हो रहा जटिल इलाज विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले तक बिहार के मरीजों को ऐसे जटिल हृदय उपचार के लिए दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता था। लेकिन अब आईजीआईसी में लगातार बढ़ रही सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक तकनीकों की वजह से राज्य में ही बेहतर इलाज उपलब्ध हो रहा है। इस तरह के विशेष शिविरों से न सिर्फ बच्चों को समय पर उपचार मिल रहा है, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे पर लोगों का भरोसा भी मजबूत हो रहा है। विशेषज्ञों बोले- समय पर पहचान जरूरी विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कहा कि जन्मजात हृदय रोग के मामलों में समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है। यदि बच्चों में सांस फूलना, जल्दी थक जाना, वजन नहीं बढ़ना या बार-बार बीमार पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक, सही समय पर इलाज मिलने से बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। देर होने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है। जीवनदायी साबित हो रही बाल हृदय योजना राज्य सरकार की बाल हृदय योजना अब गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को बेहतर और समय पर हृदय उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि पैसे के अभाव में किसी बच्चे का इलाज प्रभावित न हो। आईजीआईसी में आयोजित यह विशेष शिविर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सफल ऑपरेशन के बाद अब 19 बच्चों और उनके परिवारों के चेहरे पर राहत और खुशी साफ दिखाई दे रही है। बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यह उपलब्धि आने वाले समय में और अधिक बच्चों के लिए नई उम्मीद बन सकती है।  

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