लखनऊ के गोमतीनगर स्थित नोवा अस्पताल पर पूर्व IAS अधिकारी किशोर कुमार सिन्हा ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने गोमती नगर थाने में मुकदमा दर्ज करते हुए बताया कि अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने उन्हें धमकी दी। अवैध रूप से रोककर रखा। बंधक बनाने की कोशिश की। इस मामले में गोमती नगर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। विवेक खंड निवासी किशोर कुमार सिन्हा के मुताबिक, उन्हें 2 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने 3 अप्रैल की दोपहर 3 बजे डिस्चार्ज देने की बात कही थी, लेकिन तय समय के बाद भी उन्हें अस्पताल से जाने नहीं दिया गया। कमरे के बाहर बाउंसर बैठा दिया सिन्हा का आरोप है कि बार-बार डिस्चार्ज की मांग करने पर अस्पताल प्रबंधन ने उनके कमरे के बाहर एक बाउंसर तैनात कर दिया। जब उन्होंने बाहर निकलने की कोशिश की तो सुरक्षाकर्मी ने उन्हें लिफ्ट तक जाने से रोका और रास्ता बाधित किया। इसके बाद वह किसी तरह सीढ़ियों से नीचे उतरकर अस्पताल गेट तक पहुंचे। गार्ड ने हाथ पकड़कर अंदर खींचने की कोशिश की शिकायत के अनुसार शाम करीब 5 बजे जब वह अस्पताल गेट से बाहर निकल रहे थे, तब वहां तैनात गार्ड ने उनका हाथ पकड़ लिया और दोबारा अस्पताल के अंदर खींचने का प्रयास किया। खुद को असुरक्षित महसूस होने पर वह सड़क पार कर सामने स्थित एक ज्वैलरी दुकान के बाहर पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद कई अन्य गार्ड और कुछ डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ भी वहां आ गए। सभी ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और अस्पताल के अंदर ले जाने का दबाव बनाया। उनका कहना है कि जब भी वह वहां से हटने की कोशिश करते, गार्ड रास्ता रोक लेते थे। पत्नी ने 112 पर कॉल की घटना के दौरान उनकी पत्नी ने घरेलू सहायक गोपाल चंद्र सांवला के मोबाइल फोन से डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने से पहले वह बेटे की मदद से किसी तरह घर पहुंच गए। पूर्व IAS अधिकारी ने पुलिस को दिए पत्र में कहा है कि अस्पताल और आसपास के इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज कब्जे में लेकर जांच कराई जाए।


