लोक अदालत में हार-जीत नहीं,बल्कि मामलों का समाधान होता-जिला जज:शिवहर में शुभारंभ,कहा-चेक बाउंस-बैंक रिकवरी का लाभ उठाएं

शिवहर जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में इस वर्ष के दूसरे राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. दीपक कुमार, जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी, फैमिली जज, एसडीपीओ सुशील कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ललन कुमार और जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अवध किशोर सिंह समेत अन्य न्यायाधीशों ने दीप प्रज्वलित कर इसका उद्घाटन किया। सौहार्दपूर्ण समझौते से विवादों का समाधान इस अवसर पर जिला जज डॉ. दीपक कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आपसी सहमति, त्वरित न्याय और लंबित मामलों के निष्पादन का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में हार-जीत नहीं होती, बल्कि सौहार्दपूर्ण समझौते के जरिए विवादों का समाधान किया जाता है, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है और आपसी रिश्ते भी बने रहते हैं। जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी ने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य बिना हार-जीत की भावना के सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा करना है। उन्होंने बताया कि यहां लोगों को सस्ता एवं त्वरित न्याय प्राप्त होता है। डीएम ने आम लोगों से अपील की कि वे चेक बाउंस, पारिवारिक विवाद, बैंक रिकवरी और ट्रैफिक चालान जैसे लंबित मामलों के समाधान के लिए लोक अदालत का लाभ उठाएं। एसडीपीओ बोले-न्यायालयों का बोझ कम करना लक्ष्य एसडीपीओ सुशील कुमार ने कहा कि लोक अदालत न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम करने के साथ-साथ समाज में शांति एवं सौहार्द स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में हुआ समझौता दोनों पक्षों के लिए मान्य होता है तथा इसके विरुद्ध अपील का कोई प्रावधान नहीं है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ललन कुमार ने जानकारी दी कि आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 10,152 मामलों को रखा गया है। विशेष रूप से ट्रैफिक चालान मामलों के निष्पादन के लिए दो विशेष शाखाओं का गठन किया गया है, जिसका उद्घाटन जिला जज एवं डीएम प्रतिभा रानी द्वारा फीता काटकर किया गया। इस मौके पर व्यवहार न्यायालय के सभी न्यायाधीशगण, अधिवक्ता, जिला परिवहन पदाधिकारी अनुराग रवि, एलडीएम रविशंकर प्रसाद, विभिन्न बैंकों के पदाधिकारी एवं कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। शिवहर जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में इस वर्ष के दूसरे राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. दीपक कुमार, जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी, फैमिली जज, एसडीपीओ सुशील कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ललन कुमार और जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अवध किशोर सिंह समेत अन्य न्यायाधीशों ने दीप प्रज्वलित कर इसका उद्घाटन किया। सौहार्दपूर्ण समझौते से विवादों का समाधान इस अवसर पर जिला जज डॉ. दीपक कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आपसी सहमति, त्वरित न्याय और लंबित मामलों के निष्पादन का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में हार-जीत नहीं होती, बल्कि सौहार्दपूर्ण समझौते के जरिए विवादों का समाधान किया जाता है, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है और आपसी रिश्ते भी बने रहते हैं। जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी ने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य बिना हार-जीत की भावना के सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा करना है। उन्होंने बताया कि यहां लोगों को सस्ता एवं त्वरित न्याय प्राप्त होता है। डीएम ने आम लोगों से अपील की कि वे चेक बाउंस, पारिवारिक विवाद, बैंक रिकवरी और ट्रैफिक चालान जैसे लंबित मामलों के समाधान के लिए लोक अदालत का लाभ उठाएं। एसडीपीओ बोले-न्यायालयों का बोझ कम करना लक्ष्य एसडीपीओ सुशील कुमार ने कहा कि लोक अदालत न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम करने के साथ-साथ समाज में शांति एवं सौहार्द स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में हुआ समझौता दोनों पक्षों के लिए मान्य होता है तथा इसके विरुद्ध अपील का कोई प्रावधान नहीं है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ललन कुमार ने जानकारी दी कि आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 10,152 मामलों को रखा गया है। विशेष रूप से ट्रैफिक चालान मामलों के निष्पादन के लिए दो विशेष शाखाओं का गठन किया गया है, जिसका उद्घाटन जिला जज एवं डीएम प्रतिभा रानी द्वारा फीता काटकर किया गया। इस मौके पर व्यवहार न्यायालय के सभी न्यायाधीशगण, अधिवक्ता, जिला परिवहन पदाधिकारी अनुराग रवि, एलडीएम रविशंकर प्रसाद, विभिन्न बैंकों के पदाधिकारी एवं कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।  

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